जीवन को सरल बनाये जीवन में योग अपनाये

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तेज़ रफ़्तार सी दौड़ती ज़िंदगी में खुद को तरो ताज़ा और स्वस्थ रखना कोई आसान बात नहीं है | रोज़मर्रा के घर के काम और बाहर की भाग दौड़ में हम स्वस्थ जीवन के मायने भूलते जा रहे है, खुद को निरोग बनाये रखना रखना इतना भी मुश्किल काम नहीं है रोज़मर्रा की थकावट और मानसिक तनाव से खुद को बचाने के लिए ना जाने हम क्या क्या उपाए करते है, मानो आधा जीवन दवाइयों और अस्वस्थ होने में ही बीत रहा हो |

पर इन सभी परेशानियों को दूर करने के लिए आपको सिर्फ दिन का आधा घंटा ही खुद को देना है, सिर्फ दिन के आधे घंटे से आप खुद में एक सकारात्मक सोच का एहसास करेंगे |

शारीरिक प्रवृति और शरीर के सही विकास के लिए जीवन में व्यायाम और योग बहुत जरुरी है, जो आपको लम्बे समय तक निरोग रखेगा और और साथ ही छोटी-छोटी बीमारियों (जैसे - खासी,जुखाम , सर दर्द, घुटनो का दर्द, )से भी आपको दूर रखेगा | निरोग होने की एक वजह हमारा गलत खान पान भी है|

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योग हमारे लिए क्यों फायदेमंद है?

आज के दौर में हम सबसे ज्यादा अगर किसी बीमारियों से ग्रस्त है, तो वो - मधुमेह, रक्तचाप, मानसिक तनाव आदि |हमारी जीवनशैली मोटापे और मधुमेह के कारण खराब होती जा रही है |

मोटापा एक ऐसी बीमारी है जो आगे चल कर और कई नयी बीमारियों का रूप ले लेती है| मोटापे और मधुमेह कि बीमारी दिन प्रतिदिनं बढ़ती जा रही है और आम बीमारियों कि तरह| इसलिए इंबीमारियो को खुद से दूर रखने के लिए हर व्यक्ति के जीवन में स्वस्थ रहना और योग करना जरुरी है |

आइए अब जानते है कुछ योग आसनो के बारे में जो हमे रोज़मर्रा के जीवन मे हमे निरोग रखने मे मदद कर सकता है -

अनुलोम-विलोम प्राणायाम - प्राणायाम एक ऐसा योग आसान है, जो बहुत फायदेमंद और अच्छा है| यदि आपके जीवन में समय की कमी है तो प्राणायाम आपके लिए साबसे अच्छा विकल्प है| प्रणायाम हमे सकारात्मक सोच को खुद में शामिल करने और नकारात्मक सोच को खुद से दूर रखने में मदद करता है

प्राणायाम के फायदे -

- नियमित करने से मानसिक तनाव से खुद को दूर रख सकते है |

- प्राणायाम हमे स्मरण शक्ति तेज़ करने में मदद करता है |

- प्राणायाम हमे लिवर और और किडनी की बीमारियों से दूर रखता है |

- प्राणायाम का नियामत अभ्यास हमारे शरीर में फूर्ति दिलाती है,आँखों के काले घेरे हटाने में भी लाभदायक है|

- प्राणायाम से मेटाबॉलिसिम ठीक रहता है |

व्याघ्रासन - ये आसान आपको बाघ जैसा लगता है, व्याघ्रासन एक ऐसा आसान है जो आपकी कमर की मांसपेशियों व मेरुदंड के लिए होता है | कमर दर्द से ग्रस्त सभी महिलाओ के लिए ये आसान बहुत ही लाभदायक आसान है| यह एक ऐसा आसान है जो आपको एकाग्रता बनाये रखने में मदद करता है|

व्याघ्रासन के फायदे -

- शरीर का सही प्रकार से रक्त संचार होता है |

- पेट के लिए बहुत गुणकारी है, पेट की सभी बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है |

- मासपेशियो और हड्डियों के लिए को मज़बूत बनाये रखता है |

- पेट की चर्बी काम करने में भी मदद करता है, और पाचन शक्ति को ठीक रखने में भी मदद करता है |

योगमुद्रासन - यह एक ऐसा आसान है जो आपके चेहरे को सुन्दर और निरोग बनाये रखने में अति लाभदायक है, इस आसान को दिन में दो बार 5 से 10 सेकंड ही करना चाहिए |

योगमुद्रासन के फायदे -

- मन एकाग्र व स्वभाव विनम्र होता है |

- चेहरे को सुन्दर बनाये रखने में सहायता करता है |

- योगमुद्रासन हमे रक्त सम्बन्धी सभी बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है |

कपालभाति प्राणायाम - कपालभाति प्राणायाम का अर्थ है दिमाग को तेज़ करना, मानसिक आभा को बढ़ाने के लिए कपालभाति प्राणायाम का इस्तेमाल किया जाता है| कपालभाति प्राणायाम में पेट के पिचकाने और फुलाने की क्रिया पर जोर दिया जाता है।

कपालभाति प्राणायाम के फायदे -

- मोटापा और मधुमेह को दूर रखने में मदद करता है |

- दमा और स्वाश सम्बंधित बीमारियों से लड़ने में मदद करता है |

- फेफड़ो और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है |

नौकासन योग - सामान्य जीवन में अगर कोई परेशानी है तो वो है मोटापा,जिसे सभी लोग ग्रस्त है|नौकासन योगएक ऐसा आसान है जिसके रोज़ाना अभ्यास से आसानी से वज़न काम किया जा सकता है,जो की एक सरल व अच्छा तरीका है |

नौकासन योग के फायदे -

- पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है |

- पेट से जुडी सभी गंभीर बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है|

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Written By pooja mishra

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pooja mishraExplorer | 1 followers

मैं बेटी हूँ इस धरती का बोझ नहीं | main beti hu bojh nahi | daughters are not curse

वैसे तो संसार में पत्थर को देवी कह कर पूजा जाता है, पर बेटियों को उनके जन्म से पहले कोख में मार दिया जाता है | संस्कार बदल रहे है, विचार बदल रहे है कहने को हर दिन यह समाज नयी प्रगति कीओर बढ़ रहा है लेकिन हमारे समाज में बेटियों के प्रति आज भी भेद भाव और बोझ जैसी भावनाओं ने लोगों के दिमाग में घर कर रखा है | आज भी कई ऐसे घर है जहाँ जश्न सिर्फ बेटों के पैदा होने पर मनाया जाता है, और गलती से अगर बेटी हुई तो मातम मनाया जाता है | ये बेटियों के प्रति कौन सी सोच है जो हमें भेद - भाव पर मज़बूर कर देती है, जो हमें बेटी और बेटा होने में अंतर करना सीखाती है | साल 2011 में राजस्थान के झुंझुनू इलाके में जहाँ लड़कियों की संख्यां 837 थी वही लड़कों की संख्यां 1000 के पार थी, यह अंतर रूढ़िवादी सोच का है या फिर बेटियों को बोझ समझने का | कहने को तो हम ऐसे कलयुग में जी रहे है जहाँ लड़कियों को लड़कों के सामान बराबर अधिकार दिए हुए है की वह जैसे चाहे रहे, आगे बढ़ें और स्कूल जायें, लेकिन यह सभीबातें कहने और सुनने तक ही सीमित है , भारत जैसे देश में आज भी लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदियां लगाई जाती है उन्हें बोझ बताया जाता है, क्योंकि हमारे समाज की जंग खायी सोच का कहना है एक लड़की पढ़ लिख कर क्या करेगी जब उसे एक दिन शादी कर के मात्र खाना पकाना है और अपना घर संभालना है | बेटियों और बेटों में अंतर कोई नयी बात नहीं है, और इस समाज को समझा पाना की बेटियां भार नहीं आभार होती है बहुत मुश्किल है ये सोच में लगे वो कीड़े है जिनकी जड़ ना जाने कब से हमें जकड़ती हुई आ रही है | जो लोग बेटियों को अभिशाप समझते है उनके लिए यह बात समझना बहुत जरुरी है की वर्तमान काल में कोई भी ऐसा काम नहीं है जो बेटियां न कर पाएं और एक बेटा कर लें, यहाँ तक की समाज में कई ऐसी महिलाएं है जिन्होंने बदलते हमारे समाज में अपने दम पर अपना नाम बनाया और अपने पूरे परिवार का नाम रोशन किया जिनमें से कुछ नाम है | 1- कल्पना चावला भले ही आज कल्पना चावला हमारे बीच न हो लेकिन कल्पना चावला का जन्म भारत देश के हरियाणा राज्य में हुआ था जहा आज भी जहा लडको की अपेक्षा लडकियों की जनसख्या ना के बराबर होती है , लेकिन जब भी कल्पना चावला आकाश की तरफ देखती थी तो वह मन ही मन अन्तरिक्ष की सैर करने की कल्पना करती थी, और कल्पना चावला की इन उड़ानों को पहली बार 1995 में पंख लगा जब वे अमेरिका | USA के नासा में अन्तरिक्ष कोर में शामिल की गयी | भला ऐसी महान बेटी को कोई भुला सकता है कभी | 2- साक्षी मलिक डीटीसी में बस कंडक्टर का काम करने वाले सुखबीर मलिक की बेटी साक्षी मलिक जिनका जन्म 3 सितम्बर 1992 को हुआ है हाल में 2016 में समाप्त हुए रियो ओलम्पिक खेल में भारत की तरफ से प्रवेश करने वाली पहली भारतीय महिला बनी जिन्होनें देश के लिए भारत के लिए ओलम्पिक में कास्य पदक जीता और पूरे देश का नाम रोशन किया | 3- एमसी मैरीकॉम मैरीकॉम का जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर में एक बहुत ही गरीब किसान परिवार में हुआ था, लेकिन मैरीकॉम अपनी मेहनत और सफलता के दम पर वह पहली भारतीय मुक्केबाज बनी जिन्होनें साल 2012 के ओलम्पिक खेल में कास्य पदक जीता, और इतना ही नहीं बल्कि मैरीकॉम 5 बार विश्व मुक्केबाजी में फाइनल विजेता रह चुकी है, मैरीकॉम की उपलब्धी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है उन्हें भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है | 4- चंदा कोचर शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहाँ बेटियों ने अपने हुनर से नाम रोशन न किया हो, ऐसा ही एक नाम है चंदा कोचर जहाँ एक जगह घर से बेटियों को अकेले निकलने नहीं दिया जाता वही दूसरी तरफ चंदा कोचर वह बेटी बनी जो आईसीआईसीआई बैंक के प्रबंध निदेशक (CEO) है, और उनकी उपलब्धी इसी बात से लगाया जा सकता है साल 2009 में फोर्ब्स की 100 शक्तिशाली महिलाओ में चंदा कोचर 20वे स्थान पर आती है | अगर इन सभी के माता - पिता भी इन सभी लड़कियों को बोझ समझते और जन्म से पहले मार देते या फिर अपने सपनो को पूरा करने का एक मौक़ा नहीं देते तो उन्हें कैसे पता चलता की बेटियां कितनी हसीं होती है, और उन्हें भी अपने सपनो को पूरा करने का पूरा हक़ है | उम्मीद है हर व्यक्ति इस बात को समझेगा बेटियां पाप नहीं प्यार होती है वह अभिशाप नहीं ईश्वर का वरदान होती है | " बेटियां परायी नही ये दो परिवारों का प्यार है बेटियाँ बोझ नही ये उस स्वर्ग का द्वार है जिसे हम मजबूर समझते है हर वक़्त वो बेटी मजबूरी नही धारधार तलवार है बेटियां माँ की जान होती है बेटीयाँ पिता का सम्मान होती है जो जानती हो हर दुख को भी सुख में बदलना बेटीयाँ उस माँ का वरदान होती है बेटीयाँ सच की प्रमाण होती है बेटियाँ घर का अभिमान होती है इनकी इज्जत करना सीखो क्योंकि ये सिर्फ लड़की नही उस देवी समान होती है " |

March 5, 2019
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