शारदीय नवरात्रि हिन्दू धर्म में आस्था, अध्यात्म और शक्ति साधना का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। अश्विन महीने में आने वाला यह उत्सव समाज में सकारात्मकता, नई उमंग और धार्मिक अनुशासन का संचार करता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग दिव्य स्वरूपों की पूजा और आराधना की जाती है। श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापित कर व्रत रखते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की मंगलकामना करते हैं।

पौराणिक कथा
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि शब्द 'नौ विशेष रात्रियों' का समावेश होता है। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि देवी दुर्गा ने लगातार नौ दिनों तक महिशासुर नामक दानव से युद्ध कर दसवें दिन उसका संहार किया था। इसी कारण यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की शाश्वत विजय का प्रतीक है।
व्यावहारिक दृष्टिकोण से यह समय ऋतु परिवर्तन (शरद ऋतु के आगमन) का संधिकाल होता है। इस दौरान उपवास, फलाहार और सात्विक जीवन शैली अपनाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मन संतुलित रहता है।
नवदुर्गा: नौ दिन, नौ दिव्य स्वरूप
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशिष्ट रूप का पूजन किया जाता है, जो जीवन के अलग-अलग मूल्यों और ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं:
तिथि / दिन | देवी का स्वरूप | आध्यात्मिक महत्व व संदेश |
|---|---|---|
पहला दिन | माँ शैलपुत्री | हिमालय की पुत्री, जो जीवन में स्थिरता और दृढ संकल्प की प्रेरणा देती हैं। |
दूसरा दिन | माँ ब्रह्मचारिणी | कठिन तपस्या और संयम का मार्ग दिखाकर लक्ष्य प्राप्ति का संदेश देती हैं। |
तीसरा दिन | माँ चंद्रघंटा | मानसिक शांति, सौम्यता और परम कल्याण की प्रदाता हैं। |
चौथा दिन | माँ कूष्मांडा | अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली आद्याशक्ति हैं। |
पांचवां दिन | माँ स्कंदमाता | वात्सल्य, स्नेह और ज्ञान का आशीर्वाद देने वाली माता हैं। |
छठा दिन | माँ कात्यायनी | निडरता, साहस और आंतरिक शक्ति का संचार करती हैं। |
सातवां दिन | माँ कालरात्रि | नकारात्मक शक्तियों और भय का नाश करने वाली देवी हैं। |
आठवां दिन | माँ महागौरी | पवित्रता, शांति और समस्त पापों का क्षय करने वाली हैं। |
नौवां दिन | माँ सिद्धिदात्री | सभी प्रकार की अलौकिक सिद्धियों और मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। |
नवरात्रि पूजन एवं घटस्थापना कैसे करें
पूजा को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए कौन सी जरूरी सामग्री है, इस टेबल के जरिए आपको बताया गया है:
क्र.सं. | पूजन श्रेणी | आवश्यक सामग्री विवरण |
|---|---|---|
1 | प्राथमिक पूजन सामग्री | भगवती दुर्गा व गणेश जी की प्रतिमा/चित्र, लकड़ी की चौकी, लाल सूती वस्त्र, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, कलावा, रोली। |
2 | श्रृंगार व वस्त्र | लाल रंग की चुनरी, सुहाग की वस्तुएं (चूड़ी, सिंदूर, महावर आदि), ताजे फूल और पुष्पमाला। |
3 | कलश एवं जौ सामग्री | मिट्टी या धातु का कलश, आम या अशोक के 5-7 पत्ते, पानी वाला नारियल, मिट्टी का चौड़ा बर्तन, स्वच्छ छानी हुई मिट्टी, जौ के बीज। |
4 | दीपक व आरती | पीतल या मिट्टी का दीपक, गाय का शुद्ध घी, रुई की बत्तियां, कपूर, धूपबत्ती, आरती की थाली, घंटी। |
5 | नैवेद्य एवं भोग | ऋतु फल, पंचमेवा, इलायची, लौंग, पान के पत्ते, सुपारी, बताशे या मिठाई। |
घटस्थापना (कलश स्थापना ) का तरीका
कलश को समस्त तीर्थों और देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। घटस्थापना के बिना नवरात्रि पूजन अधूरा माना जाता है।
पूजा स्थल की तैयारी: घर के उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को साफ करके वहाँ पूजा की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
गणेश व दुर्गा स्थापना: चौकी पर थोड़े अक्षत रखकर माँ दुर्गा और विघ्नहर्ता गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
जौ बोने की विधि: मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ मिट्टी फैलाएं, उस पर जौ के दाने छिड़कें और ऊपर से हल्की मिट्टी डालकर थोड़ा जल छिड़कें।
कलश सजावट: तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरकर उसमें गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत और हल्दी की गांठ डालें।
नारियल व पल्लव रखना: कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएं और कलावा बंधे नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश पर स्थापित करें। नारियल का मुख साधक की ओर होना चाहिए।
अंतिम चरण: इस तैयार कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें और कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।
रोजाना पूजा करने की सही विधि
नवरात्रि में रोजाना पूजा करने की सही विधि के बारे में यहां बताया जा रहा है-
संकल्प व आचमन: हाथ में जल लेकर मन, वचन और कर्म की शुद्धता के लिए संकल्प लें।
गणेश व कलश पूजन: प्रथम पूज्य गणेश जी और तत्पश्चात स्थापित कलश की धूप-दीप से पूजा करें।
मंत्र एवं पाठ: देवी को स्नान, वस्त्र, तिलक और पुष्प अर्पित करने के बाद 'दुर्गा सप्तशती' या देवी के नवार्ण मंत्र का पाठ करें।
भोग व आरती: अंत में माता को फल-मिठाई का भोग लगाकर घी के दीपक व कपूर से आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
अखंड ज्योति एवं कन्या पूजन का महत्व
अखंड ज्योति: यदि नौ दिनों तक अखंड दीपक जला रहे हैं, तो उसे हवा से बचाकर सुरक्षित स्थान पर रखें। ज्योति में नियमित रूप से घी डालते रहें और घर को खाली न छोड़ें।
कन्या पूजन (अष्टमी/नवमी): नवरात्रि के अंतिम दौर में 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं और एक बालक (भैरव रूप) को आमंत्रित किया जाता है। उनके पांव पखारकर तिलक लगाया जाता है, इसके बाद उन्हें और हलवा, पूरी और चना का प्रेम पूर्वक खिलाया जाता है। इसके बाद अपनी समर्थ के अनुसार कन्या को दक्षिणा में पैसा और उपहार दिया जाता है ।
शारदीय नवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन की शुद्धि, पारिवारिक सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का सुअवसर है। सही नियम और पूर्ण श्रद्धा के साथ किया गया पूजन घर में हमेशा सुख और शांति बनाए रखता है।
शारदीय नवरात्रि: अक्सर पूछे जाने वाले 10 प्रश्न (FAQs)
Q1. घटस्थापना (कलश स्थापना) का क्या महत्व है और इसे किस दिशा में करना चाहिए?
उत्तर: कलश को सभी देवी-देवताओं, तीर्थों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसे हमेशा घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में करना सबसे शुभ माना जाता है।
Q2. नवरात्रि में जौ (जवारा) क्यों बोए जाते हैं?
उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जौ को इस सृष्टि की पहली फसल माना गया है। नवरात्रि में जौ का उगना और उनका हरा-भरा होना घर में आने वाली समृद्धि और खुशहाली का संकेत देता है।
Q3. क्या नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक व्रत रखना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, यह आपकी शारीरिक क्षमता और श्रद्धा पर निर्भर करता है। लोग अपनी सुविधानुसार नौ दिनों का पूरा व्रत, केवल पहला और आखिरी दिन (जोड़ा व्रत), या केवल सात्विक आहार लेकर भी पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
Q4. अखंड ज्योति जलाने के क्या नियम हैं?
उत्तर: अखंड ज्योति को नौ दिनों तक बुझने नहीं देना चाहिए। इसे पूजा स्थल पर ऐसे स्थान पर रखें जहाँ सीधी हवा न लगे। इसमें शुद्ध गाय का घी या तिल के तेल का प्रयोग करें और दीपक की देखभाल के लिए घर में हमेशा किसी एक सदस्य का होना आवश्यक है।
Q5. घटस्थापना में नारियल का मुख किस तरफ होना चाहिए?
उत्तर: कलश के ऊपर रखे जाने वाले नारियल का मुख हमेशा पूजा करने वाले साधक (आपकी ओर) होना चाहिए। नारियल का मुख ऊपर या नीचे की तरफ रखना शुभ नहीं माना जाता।
Q6. अष्टमी और नवमी में से कन्या पूजन किस दिन करना बेहतर होता है?
उत्तर: दोनों ही तिथियाँ कन्या पूजन के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। आपके कुल (परिवार) की परंपरा के अनुसार आप महाअष्टमी या महानवमी किसी भी दिन 2 से 10 वर्ष तक की नौ कन्याओं और एक बालक (भैरव रूप) का पूजन कर सकते हैं।
Q7. क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान महिलाएं नवरात्रि का पूजन या व्रत कर सकती हैं?
उत्तर: मासिक धर्म के दौरान महिलाएं व्रत रख सकती हैं, लेकिन उन्हें मूर्तियों को स्पर्श करने, घटस्थापना करने या सीधे पूजा सामग्री छूने से बचना चाहिए। इस दौरान वे मानसिक रूप से मंत्रों का जाप और ध्यान कर सकती हैं।
Q8. नवरात्रि में कौन से मंत्रों का जाप करना सबसे फलदायी होता है?
उत्तर: नवरात्रि में देवी के सबसे सिद्ध नवार्ण मंत्र - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा 'दुर्गा सप्तशती' का पाठ और दुर्गा चालीसा का पाठ भी फलदायी होता है।
Q9. नवरात्रि के बाद कलश, जौ और पूजा सामग्री का विसर्जन कैसे करें?
उत्तर: नवरात्रि के समापन के बाद यानी दशमी तिथि को कलश के जल को पूरे घर में छिड़क और बचे हुए जल को पेड़ पौधे खास तौर पर तुलसी या पीपल में डाल दीजिए और पूजा के सूखे फूलों को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें या गमले की मिट्टी में दबा दें।






