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Satindra Chauhan

| पोस्ट किया | Education


भारतीय संविधान में 18 से 28 तक की धारा क्या हैं

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भारत देश में जब किसी नागरिक द्वारा कोई अपराध किया जाता है तो उस अपराध को कानूनी रूप से परिभाषित करने तथा उसके दंडों का प्रावधान भारतीय दंड संहिता के अनुसार किया जाता है यह संहिता 1860 से ब्रिटिश शासन के समय से प्रभावी है  आईये आज के इस लेख में हम जानते हैं भारतीय संविधान में मौजूद 18 से 28 तक की धाराओं के बारे में..

 

आईपीसी 18 से 28 तक की धाराओं की जानकारी -

 

धारा 18 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता के अनुसार इस धारा का अर्थ है कि भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी का विस्तार क्षेत्र भारत के जम्मू एवं कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत के सभी राज्यों पर लागू होता है लेकिन कुछ समय पहले अनुच्छेद 370 हटाने के बाद यह धारा पूरे भारतवर्ष पर लागू होती है। चलिए इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - इस धारा को समझने के लिए आप ऐसे समझ सकते हैं कि पहले भारत में जम्मू एवं कश्मीर राज्य को छोड़कर किसी भी कार्रवाई को भारतीय दंड संहिता के अनुसार किया जा सकता था। लेकिन अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से जम्मू कश्मीर में भी करवाई इस भारतीय दंड संहिता के अनुसार ही की जाती है।

 

 

धारा 19 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता धारा के अनुसार धारा 19 का संबंध न्यायाधीश से है यह धारा हमें बताती है कि हम न्यायाधीश शब्द को ना केवल किसी ऐसे व्यक्ति के लिए उपयोग कर सकते हैं जो किसी भी तरह के न्यायिक पद पर हो, बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए भी उपयोग कर सकते हैं जो सभी नियमों का पालन करते हुए किसी कार्रवाई पर सभी निर्णयों को सही से लेता है या उसके न्यायिक फैसले को किसी  न्यायिक अधिकारियों द्वारा सही कहा गया हो। चलिए इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - मान लीजिए आपके नगर का मजिस्ट्रेट किसी केस पर सभी नियमों का पालन करते हुए कार्रवाई करता है और एक सही और निष्पक्ष निर्णय निकालता है और हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को सही साबित करता है तो ऐसे में मजिस्ट्रेट को न्यायाधीश के रूप में मान सकते हैं।

 

 

धारा 20 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता के अनुसार धारा 20 यह बताती है कि कोई भी न्यायाधीश की शक्तियां कौन सी हैं आखिर वह कौन सी स्थितियां जिनमें हम किसी व्यक्ति को न्यायाधीश बोल सकते हैं तो इस धारा के अनुसार यदि कोई न्यायाधीश न्यायालय में कुर्सी पर बैठा हुआ है और कोर्ट की कार्रवाई कर रहा है तो तब हम उसे न्यायधीश कह सकते हैं इसके अलावा यदि वह कहीं बाहर किसी जगह पर है तो उसकी न्यायाधीश की शक्तियां नहीं माना जाएगी ।

 

 

धारा 21 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता के अनुसार इस धारा का अर्थ है कि कोई भी एक ऐसा व्यक्ति जो निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा करता है उसे हम लोक सेवक बोल लोकसेवक  बोल सकते हैं। चलिए इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - मान लीजिए किसी हाई कोर्ट के न्यायाधीश के पास एक केस आता है यह केस दो लोगों के आपसी मारपीट का केस है ऐसे में न्यायाधीश  सभी नियमों का पालन करते हुए सही फैसला सुनाता है तो उसे हम लोकसेवक बोल सकते हैं क्योंकि न्यायाधीश इन दोनों व्यक्तियों में ही किसी को भी नहीं जानता है और वह बिना किसी स्वार्थ के अपने फैसले को निसपक्ष सुनाता है तो इस तरह वह एक लोकसेवक हैं।

 भारतीय संविधान में 18 से 28 तक की धारा क्या हैं

 

धारा 22 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता के अनुसार इस धारा का अर्थ है कि आप अपने किसी भी चल संपत्ति जो भू-तल से जुड़ी न हुई है को विस्थापित किया जा सकता है लेकिन किसी भी तरह की जगंम संपत्ति को विस्थापित नहीं कर सकता। चलिए इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - इस धारा का मतलब है कि मान लीजिए आप अपने गांव में रहते हैं और शहर आना चाहते हैं तो ऐसे में आप अपनी अचल संपत्ति जैसे गाड़ी घर की चीजें को तो अपने साथ ले जा सकते हैं लेकिन चल अचल संपत्ति जो भूमि से जुड़ी हुई है जैसे पुराना पेड़ या जमीन या कुछ भी को विस्थापित नहीं कर सकते है।

 

 

धारा 23 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने नुकसान को पूरा करने के लिए किसी गलत तरीके का इस्तेमाल करता है तो इसे धारा 23 के अंतर्गत गलत तरीके से नुकसान कवर करना कहा जाता है चलिए इसे से उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - मान लीजिए आप ने अपने किसी दोस्त को ₹10000 उधार दिए हैं अब मान लीजिए कि आपका दोस्त आपके उन पैसों को लौटा नहीं रहा है तो ऐसे में आप अपने दोस्त से मिलते हैं और अपने नुकसान को कवर करने के लिए उसके फोन को छीनकर अपने उन ₹10000 के बदले फोन को अपने पास रख लेते हैं तो ऐसे में वह व्यक्ति आपके ऊपर धारा 23 के अंतर्गत कार्रवाई करवा सकता है।

 

 

धारा 24 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे इरादे से किसी कार्य को करता है जिससे उस कार्य से किसी व्यक्ति को गलत तरीके का लाभ होता है और किसी व्यक्ति को गलत तरीके से हानि होती है  तो ऐसे कार्य को धारा 24 के अंतर्गत गलत इरादे पूर्वक किए गए कार्य से परिभाषित किया जाता है। चलिए इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - मान लीजिए आप एक छोटे किसानों है तथा आपके खेत में फसल लगी हुई है इसी वक्त कोई दूसरा व्यक्ति आपके ही सामने आपको नुकसान पहुंचाने के लिए आपकी फसल को गलत तरीके से बर्बाद कर देता है तो यह कार्य धारा 24 के अंतर्गत आता है जिस पर आईपीसी की धारा 24 के तहत कार्रवाई की जाती है।

 

 

धारा 25 क्या हैं -

भारतीय दंड संहिता के अनुसार इस धारा का अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य किसी कपट पूर्वक कार्य को करता है यहाँ कपट पूर्वक कार्य का मतलब बेईमानी से नहीं होता है इसमें जब कोई व्यक्ति किसी नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य किसी को धोखा देता है तो इसे कपट पूर्वक कार्य कहा जाता है चलिए से एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - आप लोगों ने बहुत बार देखा होगा कि बहुत सी ई-कॉमर्स कंपनियां या अन्य कोई कम्पनी के स्टोर पर जब हम किसी अच्छे विशेष क्वालिटी वाले प्रोडक्ट को आर्डर करके मंगवाते हैं तो डिलीवर होने वाले प्रोडक्ट की क्वालिटी खराब होती है और कभी - कभी प्रोडक्ट भी खराब होता है तो ऐसे में वह कंपनी अपने प्रोडक्ट को आप को दिखाकर धोखा देता है और उसके बाद आपको खराब प्रोडक्ट देकर आपका नुकसान करता है तो इस तरह वह कंपनी कपट पूर्वक कार्य करती है ऐसे में आप उस कंपनी पर आईपीसी की धारा 25 के तहत मुकदमा कर सकते हैं।

 

 

धारा 26 क्या हैं?

भारतीय दंड संहिता के अनुसार धारा 26 का अर्थ है जब कोई व्यक्ति किसी काम को करता है तो उसे उस काम को कानूनी कानूनी रूप से सही साबित करने के लिए विश्वास करने का एक कारण देना होता है जिससे पता चलता है कि यह विश्वास करने लायक है भी या नहीं इस स्थिति में जब कोई व्यक्ति किसी काम के विश्वास करने का सही कारण नहीं दे पाता है और उस काम को गलत तरीके से करता है तो उसे इस धारा 26 के अंतर्गत सजा मिलती है चलिए से समझते हैं बेहतर उदाहरण के साथ।

 

For Example - मान लीजिए न्यायालय का कोई एक स्टांप विक्रेता जो जाली स्टांप को बेचते हुए पकड़ा गया। और कार्रवाई होने के दौरान उसके द्वारा केवल यह कह देना कि उसने यह सभी स्टांप को कोषालय से खरीदा हुआ है यह विश्वास करने का कारण नहीं है मतलब बिना किसी साक्ष्य, और कागजी बिल या किसी तरह के वास्तविक सबूत को न दे पाने के कारण उसकी बात को सही नहीं माना जाएगा। अतः विश्वास न करने का कारण न दे पाने की वजह से इसे धारा 26 के अंतर्गत रखा जाता है।

 

 

धारा 27 क्या हैं-

भारतीय दंड संहिता के अनुसार इस धारा 27 का अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति Mr ABC अपनी किसी अवैध चीज को छुपाने के लिए तथा पुलिस से बचाने के लिए अपने किसी नौकर, दोस्त या करीबी रिश्तेदार को रखने के लिए कहता है तो इस अवैध तथा गैर कानूनी चीज के बरामद होने पर उस व्यक्ति Mr ABC पर भारतीय दंड संहिता धारा 27 के अंतर्गत कार्रवाई की जाती है  चलिए इसे एक उदाहरण के साथ बेहतर तरीके से समझते हैं।

 

For Example - मान लीजिए आपके पास कोई गैर कानूनी चीज जैसे अवैध शराब, या प्रापर्टी  है और जिसे आपने अवैध रूप से अपने पास रखा है लेकिन किसी कारणवश आपने इन अवैध तथा गैर कानूनी चीजों को अपने नौकर या किसी अन्य करीबी के घर पर कुछ दिनों के लिए रखवा दिया। पुलिस कार्रवाई होने पर यह अवैध चीज आपके नौकर से बरामद की जाती है कार्रवाई जांच होने पर पता चलता है कि यह सभी चीजों को आपने रखवाया है तो इस गैरकानूनी काम के लिए आपको धारा 27 के अंतर्गत अपराधी मानकर सजा दी जाती है

 

 

धारा 28 क्या हैं?

भारतीय दंड संहिता के अनुसार इस धारा का अर्थ है. जब कोई एक व्यक्ति अपने किसी करीबी या दूसरे किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ खुद के मतलब को निकालने के लिए और किसी दूसरे व्यक्ति का फायदा उठाने के लिए वह धोखे से किसी भी तरह के दस्तावेज या अन्य चीजों को एक जैसा बनाकर भ्रम की स्थिति पैदा कर छल कपट करता है। तो उस पर उसके इस अपराधिक उद्देश्य के लिए धारा 28 लगाई जाती है, चलिए इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

 

For Example - मान लीजिए आपका कोई दोस्त आपके साथ धोखे के उद्देश से आपके किसी जमीन को छल कपट करके खुद का करने के लिए आप की जमीन के सही दस्तावेजों की तरह उससे मिलता- जुलता नकली दस्तावेज बनवा कर, धोखे से आपके साथ छल करता है तो वह इस धारा 28 के अंतर्गत अपराधी माना जाता है।