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Rohit Valiyan· 8 साल पहले
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व्यापार करते समय हमें किन बातों का डर होता हैं ?

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ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
अपडेट किया गया08/26/18

भय और व्यापार का गहरा सम्बन्ध है | व्यापार में भय बना ही रहता है | व्यापार में जोखिम होता है और जोखिम की वजह से भय उत्पन्न होता है | जोखिम के अलावा भी व्यापार में लाखों तरह के भय होते हैं | भय होता है व्यापार में लक्ष्य निर्धारित करने का | भय होता है उस लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे या नहीं | लक्ष्य की प्राप्ति हेतु बैंक से लोन लेने का भय, लोन लौटा पाएंगे या नहीं इसका भय आदि |


व्यापार में अक्सर लोग दूसरों से परामर्श भी नहीं करते क्योंकि परामर्श की भी कीमत होती है | परामर्श की कमी के कारण लिए गए निर्णय पर हर समय संसय रहता है की क्या मेरा निर्णय सही है | अगला भय होता है नहीं कहने का डर | व्यापार में हम अक्सर नहीं बोलने से कतराते हैं | व्यापार को और बढाने के लालच के कारण किसी को नहीं नहीं बोलते |

व्यापार से सम्बंधित भय के कारण हम अपना घर, समाज और अन्य जिम्मेदारियां भी अक्सर भूल जाते हैं | दिन हो या रात हर समय व्यापार के बारे में ही सोचते रहते है | इससे परिवार और समाज से कटने लगते हैं और भयभीत हो जाते हैं की परिवार से आप कट गए हैं | यह चक्र चलता रहता है – भय – व्यापार – भय – व्यापार...

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ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया09/14/18

व्यापार करते समय हमें ऐसी कई बातें हैं, जिनका डर होता है | क्योकि हम व्यापार शुरू कर रहे होते हैं, तो हमारे मन में कई विचार आते हैं, कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक विचार | अधिकतर नकारात्मक विचार आते हैं, क्योकि मानव स्वाभाव यही होता है |


अगर व्यापार ठीक नहीं हुआ तो :-

सबसे पहला विचार ये आता है, कि हमने अपना व्यापार शुरू किया और व्यापार ठीक नहीं चला तो क्या होगा? कही व्यापार में घाटा हो गया तो क्या होगा ? ऐसे कई विचार मन में आते हैं, जिसके कारण व्यापार शुरू करने में कई बार हम समय बर्बाद कर देते हैं |

पैसे डूब गए तो :-

जब आप व्यापार शुरू करते हैं, तो आपको व्यापार शुरू करने के लिए पैसों अधिक पैसों की जरूरत होती है | इसके लिए कई लोग लोन लेने की सोचते हैं | कई लोग ब्याज पर पैसा लेते हैं, और साथ ही सबके मन में यही डर होता है,कि कही पैसा डूब गया तो क्या होगा ? लोन कैसे चुका पाएंगे |

साझेदारी व्यापार में धोका मिला तो :-

अगर आप किसी के साथ मिलकर कोई व्यापार शुरू करते हैं, अगर वो इंसान आपका जानकार है या नहीं भी हैं, तो भी एक डर मन में बना रहता है, कि कही साझेदार ने व्यपार में धोका दे दिया तो क्या होगा |

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