नई शिक्षा नीती क्या है - Letsdiskuss
img
Download LetsDiskuss App

It's Free

LOGO
गेलरी
प्रश्न पूछे

himanshu singh

digital marketer | पोस्ट किया 30 Jul, 2020 |

नई शिक्षा नीती क्या है

Awni rai

student | पोस्ट किया 14 Hours ago

ईसमे अब पुरानी शिक्षा को बदल कर नये तरीके से पढ़ाया जायेगा और अब बच्चों को मिडील क्लास मे ही कम्प्यूटर कि कोडिंग सिखाई जायेगी

rudra rajput

phd student | पोस्ट किया 01 Aug, 2020

ईस निती से हम अपनी संस्कृति कि तरफ लौटेंगे

amit singh

student | पोस्ट किया 30 Jul, 2020

ईस शिक्षा निती से बहुत सुधार होगा अब आप विज्ञान और कला साथ मे पढ सकते है

vivek pandit

आचार्य | | अपडेटेड 31 Jul, 2020

नई शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख बातें

अंग्रेजी हुकूमत के समय से लागू लॉर्ड मैकाले की शिक्षा  को समाप्त करते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने आज देश में भारत-केंद्रित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अधिनियम को अनुमोदित कर दिया है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति विधेयक (National Education Policy Bill) कहा जायेगा. अब इसे आने वाले सत्र में संसद के दोनों सदनों में रखा जायेगा, जहाँ से अनुमोदन के उपरांत यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति अधिनियम- कानून बन जायेगा. यह नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से अस्तित्व में आ जाएगी. यूँ तो वर्ष 1947 में देश को आजादी प्राप्त हो गई थी परन्तु शिक्षा के मायनों में देश को आजादी आज 29 जुलाई 2020 को प्राप्त हुई. आज घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति अधिनियम देश की वर्तमान सरकार द्वारा गत 6 वर्षों के अथक प्रयास से शिक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् जैसे शैक्षणिक संगठन के शिक्षा क्षेत्र में 71 वर्षों के दीर्घकालिक अनुभव, देश के कोने-कोने से 2 लाख से भी अधिक शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों व आम नागरिकों की राय/सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है. वैसे तो यह अधिनियम काफी विस्तृत है, जिसको पूरी तरह पढ़ने के बाद ही इसकी व्याख्या की जा सकती है, परन्तु इस अधिनियम की कुछ प्रमुख बातें जो प्रत्येक देशवासी को जाना चाहिए वह निम्नवत है:-*

  • अभी तक देश में 10 2 शिक्षा व्यवस्था लागू है, मतलब कक्षा 1 से लेकर 10 तक एक प्रकार के पढाई की व्यवस्था है और कक्षा 10 के बाद छात्र किस stream में जायेगा यह तय होता है, परन्तु नई शिक्षा व्यवस्था में अब 5 3 3 4 व्यवस्था लागू हो जाएगी. इसका सीधे अर्थों में मतलब क्या होगा, आइये जानते हैं:-
  • पहले 5 वर्षों में खेलो-कूदो-पढ़ो यानि इन 5 वर्षों में छात्रों का मानसिक, शारीरिक व शैक्षणिक विकास साथ-साथ किया जायेगा. इसका पाठ्यक्रम NCERT द्वारा तैयार किया जायेगा. 
  • 5 के अंतर्गत इन 5 वर्षों में छात्र को पहले 3 वर्षों तक पूर्व प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी, जिसमें  किताबों का बोझ बिल्कुल  कम होगा. इसके बाद के दो वर्ष में कक्षा-1 व 2 की पढाई करनी पड़ेगी.
  • अब 3 के अंतर्गत अगले 3 वर्षों में कक्षा 3 से कक्षा 5 तक की पढ़ाई करनी होगी. इसको Foundation stage कहा जायेगा यानी इस stage पर छात्र के शिक्षा की नींव मजबूत बनाये जाने का प्रावधान होगा.
  • कक्षा 5 तक की पढ़ाई अब छात्र की मातृ भाषा, राष्ट्र भाषा अथवा स्थानीय भाषा में होगी. अब अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी. अंग्रेजी माध्यम न होकर अब सिर्फ एक विषय के रूप में पढ़ाई जाएगी जैसे अभी तक हिंदी अथवा संस्कृत को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है.
  • अगले 3 से तात्पर्य कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई से होगा, इसे Middle stage कहा जायेगा. इसके अंतर्गत एक तय पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई होगी.
  • अब कक्षा 6 से 8 के दौरान ही छात्र को Computer coding के साथ-साथ इंटर्नशिप भी कराई जाएगी. मतलब यदि किसी छात्र की पेंटिंग में रूचि है अथवा सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में उसकी रूचि है तो वह छात्र पढ़ाई के साथ-साथ किसी पेंटर अथवा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ इंटर्नशिप करके उस दिशा में अपना करियर शुरू कर सकेगा.
  • अंतिम 4 के अंतर्गत छात्र को कक्षा 9 से 12 की पढ़ाई के दौरान विश्लेषण क्षमता व तर्कशक्ति में वृद्धि करते हुए विषय में गहरी समझ व बड़े लक्ष्य के लिए प्रेरित करने वाले पाठ्यक्रम से रूबरू कराया जायेगा.
  • कक्षा 9 से 12 की पढ़ाई अब सेमेस्टर सिस्टम के अनुसार होगी जिसमें एक साल में दो बार प्रत्येक 6 माह पर परीक्षा देनी होगी. इससे स्कूल न जाकर ट्यूशन व कोचिंग करके सिर्फ परीक्षा के लिए विद्यालय जाने वाले छात्रों की गतिविधियों पर अंकुश लगेगा.
  • बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाया जायेगा तथा रटने के बजाये समझने पर जोर दिया जायेगा.
  • 360 डिग्री मूल्याङ्कन पद्धति लागू की जाएगी यानि अब छात्र का मूल्याङ्कन पढ़ाई के साथ-साथ अपना मूल्याङ्कन स्वयं करेगा, उसके सहपाठी व शिक्षक भी करेंगे जिसमें उसके व्यवहार, पाठ्यक्रम से इतर गतिविधियां (Extra Curricular activities) इत्यादि शामिल रहेंगी.
  • स्नातक को अब 3 व 4 वर्षों के 2 भाग में बाँट दिया जायेगा. इसमें Multiple Entry एवं Multiple Exit की व्यवस्था लागू होगी यानि यदि किसी छात्र को किन्हीं परिस्थितियों में 1 साल में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है तो उसे सर्टिफिकेट कोर्स का प्रमाण पत्र दिया जायेगा तथा एक तय समय सीमा के अंदर यदि वह भविष्य में पुनः पढ़ाई शुरू करना चाहेगा तो उसे शुरू से पढ़ाई शुरू न करते हुए उस 1 वर्ष से आगे की पढ़ाई शुरू करनी होगी. पाठ्यक्रम को इस प्रकार डिज़ाइन किया जायेगा जो हर वर्ष के हिसाब से उपयोगी होगा. इसी प्रकार 2 वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र को डिप्लोमा प्रमाण पत्र जबकि 3 वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र को स्नातक प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा. यदि कोई छात्र पूरे 4 वर्ष का पाठ्यक्रम पूरा करेगा तो उसे शोध के साथ स्नातक की डिग्री (Bachelor degree with research) प्रदान की जाएगी. यानी अब नई व्यवस्था में एम फिल डिग्री को समाप्त कर दिया जायेगा.
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. इसका मतलब है कि रमेश पोखरियाल निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री कहलाएंगे.
  • जीडीपी का छह फ़ीसद शिक्षा में लगाने का लक्ष्य जो अभी 4.43 फ़ीसद है.
  • नई शिक्षा का लक्ष्य 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है.
  • छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे. इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी. इसके अलावा म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा. इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा.
  • उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर). यानी अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दिए जाएंगे और पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा.
  • उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फ़ीसद GER (Gross Enrolment Ratio) पहुंचाने का लक्ष्य है.
  • उच्च शिक्षा में कई बदलाव किए गए हैं. जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा. जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं. उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी.
  • शोध करने के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) की स्थापना की जाएगी. एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बनाना होगा. एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा.
  • ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किए जाएंगे. वर्चुअल लैब विकसित की जा रही है और एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (NETF) बनाया जा रहा है.
  • उच्च शिक्षा संस्थानों को फ़ीस चार्ज करने के मामले में और पारदर्शिता लानी होगी.