हिंदी भाषा में यह एक बहुत प्रसिद्ध मुहावरा है, जो रोज़मर्रा की बातचीत में भी इस्तेमाल होता है। इसका अर्थ होता है अपनी कमी या अयोग्यता छिपाने के लिए दूसरों या परिस्थिति को दोष देना।
जब कोई व्यक्ति खुद किसी काम में सक्षम नहीं होता, तो वह अपनी गलती मानने के बजाय बहाने बनाता है।
अगर कोई नाचना नहीं जानता और जगह को खराब बताने लगे, तो यह इसी मुहावरे को दर्शाता है। यह मुहावरा हमें सिखाता है कि अपनी गलती स्वीकार करना और सुधार करना जरूरी होता है।
इसका उपयोग ऐसे लोगों के लिए किया जाता है जो अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए दूसरों को दोष देते हैं। यह मुहावरा इंसान की उस आदत को दिखाता है, जिसमें वह अपनी कमी मानने के बजाय बहाने बनाता है।


