Krishna Patel
Krishna Patel· 4 years ago
Author

नाच ना आवे आंगन टेढ़ा मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

27
2.4K

Join this conversation

Sort By
Replying to the question above
Updated on03/20/26

आज हम इस मुहावरे का अर्थ बता रहे हैं कि नाच ना आवे आंगन टेढ़ा का अर्थ होता क्या है। यह एक प्रसिद्ध लोक पंक्ति है जो हिंदी में अक्सर इसका प्रयोग निबंध, लेख आदि मे प्रयोग किया जाता है।

प्रयोग - नाच ना आवे आंगन टेढ़ा का अर्थ यह होता है कि मेरी बहन रीता बोलती है की मेरे से बहुत अच्छा नाचते बनता है लेकिन जब नाचने के लिए कोई भी व्यक्ति उसे बोलता है तो वह बहाने बनाने लगती है कि मेरे पैर में मोच लगी हुई है.। इसी को कहते हैं की नाच ना आवे आंगन टेढ़ा ।Letsdiskuss

Aanchal Singh
View Profile
13
Replying to the question above
Answered on05/19/22

आइए आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बताते हैं कि नाच ना आवे आंगन टेढ़ा मुहावरे का अर्थ क्या होता है। नाच ना आवे आंगन टेढ़ा मुहावरे का अर्थ होता है अपनी असफलताओं को स्वीकार ना करना तथा उसका दोष किसी और पर लगा देना ।

वाक्य में प्रयोग :-

मेरी एक फ्रेंड जिसका सुधा नाम है वह हमेशा यह कहते रहती है कि मेरे से बहुत अच्छा डांस करते बनता है और जब उसे नाचने के लिए कहा जाता है तो वह अपने पैरों में चोट लगने का बहाना बताने लगती है। इसी को कहते हैं नाच ना आवे आंगन टेढ़ा।Article image

Krishna Patel
View Profile
13
Replying to the question above
Answered on05/18/22

नाच ना आवे आंगन टेढ़ा मुहावरे का अर्थ - आप अपनी गलतीयों को स्वीकार नहीं करते है, और अपनी गलतियों के लिए दुसरो को दोषी ठहराते है।

मुहावरें का वाक्यों मे प्रयोग - सुरेश हमेशा अपने मित्रो से कहता कि मै बहुत अच्छी बासुरी बजता हूँ। लेकिन ज़ब उसके मित्रो ने बोला बासुरी बजाओ तो वह सही ढंग से बासुरी नहीं बजा पाया उसने बहाना बना दिया कि मेरी बासुरी खराब हो गई है, इसलिए बासुरी मे से अच्छी नहीं बज रही है, इसको कहते है नाच ना आवे आँगन देढ़ा।

Article image

S
View Profile

Mp

13
Replying to the question above
Updated on12/23/25

'नाच न आवे आँगन टेढ़ा' मुहावरे का अर्थ है - अपनी असफलताओं को स्वीकार नहीं करके उसका दोष दूसरों पर डालना है।

मुहावरे का वाक्य प्रयोग – वह सब से कहती फिरती है कि वह नृत्य में माहिर है। जब उसे नृत्य करने के लिए कहा गया तो अपने पैर में मोच बता कर बहाना बना दिया। इसे कहते हैं नाच न जाने आंगन टेढ़ा।

मुहावरे का वाक्य प्रयोग – रमेश अपने आप को गणित का विद्वान समझता है। जब उसे दसवीं के कुछ प्रश्न हल करने के लिए दिए गए तो सिलेबस से बाहर के प्रश्न होने का बहाना बनाकर वहां से खिसक लिया। इसे कहते हैं नाच ना जाने आंगन टेढ़ा।

Anita  Pandey
View Profile
12
Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

Article image

म
View Profile
23
9
Replying to the question above
Answered on03/20/26

हिंदी भाषा में यह एक बहुत प्रसिद्ध मुहावरा है, जो रोज़मर्रा की बातचीत में भी इस्तेमाल होता है। इसका अर्थ होता है अपनी कमी या अयोग्यता छिपाने के लिए दूसरों या परिस्थिति को दोष देना।

जब कोई व्यक्ति खुद किसी काम में सक्षम नहीं होता, तो वह अपनी गलती मानने के बजाय बहाने बनाता है।

अगर कोई नाचना नहीं जानता और जगह को खराब बताने लगे, तो यह इसी मुहावरे को दर्शाता है। यह मुहावरा हमें सिखाता है कि अपनी गलती स्वीकार करना और सुधार करना जरूरी होता है।

इसका उपयोग ऐसे लोगों के लिए किया जाता है जो अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए दूसरों को दोष देते हैं। यह मुहावरा इंसान की उस आदत को दिखाता है, जिसमें वह अपनी कमी मानने के बजाय बहाने बनाता है।

P
View Profile
0