भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु के नाम के पीछे क्या कहानी है ? - letsdiskuss
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Ruchika Dutta

Teacher | पोस्ट किया |


भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु के नाम के पीछे क्या कहानी है ?


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Content writer | पोस्ट किया


भारत ने कई वर्षों तक अंग्रेज़ो की गुलामी की और कड़े परिश्रम और कुछ लोगों की मेहनत के कारण भारत स्वतंत्र देश बन पाया | भारत को आज़ादी दिलवाने में कई लोगों ने अटल मेहनत की और देश को आज़ाद करवाया, ऐसे ही महान लोगों में से भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु के नाम भी शामिल थे | आज हम आपको इन तीन महान लोगों के नामकरण के पीछे की कहानी बताने जा रहे है की कैसे मिला इन्हे यह नाम |


Letsdiskuss (courtesy-facebook)


- भगत सिंह -

शहीद भगत सिंह का परिवार शुरू से ही वतन के प्रति संवेदनशील भाव रखने वाला था, भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह और चाचा भी स्वतंत्रता सेनानी थे, 28 सितंबर, 1907 के दिन जब भगत सिंह का जन्म हुआ तो उसी दिन उनके पिता और चाचा जेल से रिहा हो कर घर आए थे, और उनके घर में इस बात की ख़ुशी फैली थी की इस बच्चे के जन्म से सब अच्छा हो रहा है | तभी भगत सिंह के दादाजी ने कहा यह बच्चा हमारे परिवार के लिए बहुत भाग्यशाली है, और आपसी सहमति से बच्चे का नाम भगत सिंह रखा, और बड़े होने के बाद मात्र 23 साल की उम्र भगत सिंह ने इतिहास रच दिया और वह बहुत बड़े क्रांतिकारी बनें जिन्होनें भारतवासियों को देशभक्ति का सही मतलब सिखाया और शहीद हो गये |



(courtesy-eSakal)


- राजगुरु - 

राजगुरु का जन्म 24 अगस्त, 1908 को खेड़ा पुणे (महाराष्ट्र) में पण्डित हरिनारायण राजगुरु और पार्वती देवी के घर हुआ, शिवराम हरिनारायण अपने नाम के पीछे राजगुरु लिखते थे। यह कोई उपनाम नहीं है, बल्कि एक उपाधि है , क्योंकि शिवराम हरिनारायण प्रकांड ज्ञानी पण्डित थे। उन्ही से राजगुरु को नाम मिला |


(courtesy-lokmatnews)


- सुखदेव -

सुखदेव थापर का जन्म पंजाब के लुधियाना जिले में 15 मई, 1907 में रामलाल और रल्ली देवी के घर हुआ था, यह भी क्रांतिकारियों की सूची में एक बहुत महान नाम है | जन्म से करीब 3 महीने के बाद ही उनके पिता की मृत्यु हो गयी थी , जिसके कारण इनका पालन - पोषण इनके ताऊ अचिंतराम ने किया | सुखदेव शहीद-ए-आज़म भगतसिंह के ख़ास दोस्तों में से एक थे|



(courtesy-countercurrents)


यह केवल संजोग था तीन महान व्यक्ति तीन महान क्रांतिकारी व्यक्ति करीब - करीब साथ पैदा हुए और एक ही दिन सहीद हो गए, और यह कोई मामूली शहादत नहीं थी बल्कि देश का बच्चा-बच्चा इन सभी के नाम को जानता है, यह तीनो भारत के लिए किसी अनमोल रतन से कम नहीं थे , यही वजह है की भगत सिंह , राजगुरु , और सुखदेव की शहादत को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है | 




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