मोबाइल फ़ोन आज हमारी जेब में बैंक, दफ़्तर और बाज़ार तीनों बनकर घूमता है, और यही सुविधा ठगों के लिए सबसे बड़ा अवसर भी बन गई है। भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के नए-नए रूप सामने आते रहते हैं, इसलिए उनके तरीकों को पहचानना सबसे असरदार बचाव ही है।
डिजिटल अरेस्ट घोटाला
इसमें ठग ख़ुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और कहते हैं कि आप किसी मामले में फँस गए हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने चेतावनी दी है कि जाँच एजेंसियाँ वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ़्तार नहीं करतीं, इसलिए ऐसे कॉल पर घबराकर पैसे न भेजें।
यूपीआई और बैंकिंग धोखाधड़ी
ठग बैंक या कंपनी के प्रतिनिधि बनकर ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन माँगते हैं।
कुछ लोगों को "पैसे ग़लती से आपके खाते में चले गए" जैसे संदेश भेजकर पैसे वापस भेजने को कहा जाता है।
भुगतान की रिक्वेस्ट को स्वीकार करने के नाम पर पैसा निकाल लिया जाता है।
फ़िशिंग और नक़ली लिंक
नक़ली ईमेल, एसएमएस और वेबसाइटें बैंक, कूरियर या सरकारी सेवाओं की तरह दिखने वाले लिंक भेजकर आपकी जानकारी चुराने की कोशिश करती हैं। स्क्रीन शेयर करने वाले ऐप डाउनलोड करवाने के बहाने भी जाल बिछाया जाता है।
निवेश और गेमिंग ऐप घोटाले
भारी मुनाफ़े का वादा करने वाली स्कीमें, ट्रेडिंग ग्रुप और मनी गेमिंग ऐप अक्सर ठगी के जाल निकलते हैं। सरकारी जानकारी में भी ऐसे ऐप के प्रति सावधान रहने की सलाह दी गई है।
फ़र्ज़ी नौकरी और ऑनलाइन काम
घर बैठे आसान कमाई, वीडियो लाइक करने के पैसे या विदेश में नौकरी जैसे प्रस्ताव अक्सर पहले छोटा भुगतान देकर विश्वास जमाते हैं, फिर बड़ी रकम जमा करवाकर ग़ायब हो जाते हैं।
बचाव के आसान नियम
किसी भी अनजान कॉल पर ओटीपी या पिन न बताएँ।
अजनबी के कहने पर कोई ऐप या स्क्रीन शेयरिंग सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल न करें।
भारी मुनाफ़े के हर वादे पर संदेह करें।
लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी वेबसाइट आधिकारिक स्रोत से जाँचें।
ठगी हो जाए तो क्या करें
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे को रोकने की संभावना उतनी बढ़ेगी, इसलिए बिलकुल देर न करें। बैंक को भी तुरंत और स्पष्ट रूप से सूचित करें।
सतर्कता ही सुरक्षा
ठगों के तरीके समय के साथ बदलते रहते हैं, पर सिद्धांत एक ही है कि वे डर, लालच या जल्दबाज़ी पैदा करते हैं। जब भी ऐसा कुछ महसूस हो, रुकें, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें और आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।

