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Supriya sunariya· 4 years ago
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अगर आप शिक्षा मंत्री होते तो क्या करते ?

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Answered on10/22/23

यदि मैं अपने भारत देश की शिक्षा मंत्री होती तो अपने देश के लोगों को अनपढ़ नहीं रहने देती, सभी को शिक्षा के प्रति जागरूक करवाती।क्योंकि आज के समय मे शिक्षा बिकाऊ बन चुकी है। सरकारी स्कूलो मे शिक्षक बच्चो क़ो अच्छी शिक्षा नहीं देते है, उन्हें सिर्फ आपने वेतन से मतलब रहता है, जिस कारण से गरीब परिवार के बच्चे अशिक्षित है,यदि मै इस देश की शिक्षा मंत्री होती है।शिक्षा मंत्री होती तो जो स्कूल कॉलगे मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे है उन पर कार्यवाही करती तथा कम फीस का निर्धारण करती ताकि हर बच्चा बिना किसी रोक के पढ़ पता। लेकिन आज के समय की शिक्षा मंत्री बिल्कुल बिकाऊ है। जो लोग बड़े पैसे वाले होते हैं वह अपने बच्चों को पैसा देकर पास करवा देते हैं और गरीबों को फेल कर दिया जाता है।

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Answered on06/21/23

यदि मै देश की शिक्षा मंत्री होती तो शिक्षा प्रणाली मे सुधार करने का प्रयास करती। हमारे देश मे गरीब और अमीर बच्चो क़ो शिक्षा मे भेदभाव किया जाता है, इस बात पर मै जरूर कार्यवाही करती गरीबो के बच्चों क़ो पढ़ने का अधिकार बराबर होना चाहिए क्योंकि वह गरीब है इसलिए उन्हें अच्छी शिक्षा नहीं दी जाती है लेकिन ये बिल्कुल गलत है, सभी वर्गो के लोगो क़ो शिक्षा बराबर मिलनी चाहिए।Article image

M
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Answered on06/19/23

यदि मै इस देश की शिक्षा मंत्री होती तो सबसे पहले शिक्षा प्रणाली मे सुधार करती, क्योंकि आज के समय मे शिक्षा बिकाऊ बन चुकी है। सरकारी स्कूलो मे शिक्षक बच्चो क़ो अच्छी शिक्षा नहीं देते है, उन्हें सिर्फ आपने वेतन से मतलब रहता है, जिस कारण से गरीब परिवार के बच्चे अशिक्षित है,यदि मै इस देश की शिक्षा मंत्री होती है तो ऐसे शिक्षिको की नौकरी से निकलवा देती, क्योंकि देश क़ो अच्छे शिक्षक की जरूरत है ताकि वह देश के हर बच्चे क़ो अच्छी शिक्षा दिला सके,हमारे देश क़ो ऐसे गद्दार शिक्षक की जरूरत नहीं है।

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Mp

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Answered on12/15/21

यदि मैं शिक्षा मंत्री होती तो आज की शिक्षा को अधिक से अधिक सरल बनाने की कोशिश करती है। क्योंकि आज हमारे देश में एम ए, और एमएससी जैसे डिग्री के लिए अधिक से अधिक पैसा खर्च करने के बाद भी हमें कोई नौकरी नहीं मिलती है। और हमारी वर्षों की तपस्या पानी में चली जाती है। जिससे लोग अपने घर को चलाने के लिए गलत काम को करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसलिए मैं हालात को देखते हुए अपने देश की शिक्षा को निशुल्क कराने की कोशिश करती। और शिक्षा के माध्यम से लोगों को बागवानी, सिलाई सेंटर, कोचिंग सेंटर, फोटोग्राफी, चित्रकला आदि को खोलने का मौका देती। क्योंकि हमारे देश के शिक्षा का पूरा बोझ शिक्षा मंत्री के ऊपर होता है। और मैं सभी पढ़ रहे बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करने की कोशिश करती है।Letsdiskuss

इसे भी पढ़ें :- क्या हमारी शिक्षा प्रणाली लोकतंत्र का समर्थन करने के लिए पर्याप्त है?

Krishna Patel
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Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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Answered on10/22/21

शिक्षा एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई परिचित है। पहले के जमाने के लोग शिक्षित नही होने के कारण से बहोत सारे पाप करते थे जो उन्हे नही करना चाहिए जेसे बाल-विवाह , कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, मार पिट, घरेलू हिंसा ये सब अशिक्षित होने की निशानी है। परंतु आज ऐसा नही है। अगर आज मे शिक्षा मंत्री होती तो मे हर व्यक्ति के लिए शिक्षा जरूरी कर देती क्यूकि शिक्षित व्यक्ति अच्छे देश की नीव होता है। बलिकाओ के लिए निशुल्क शिक्षा। उनकी रुचि के अनुसार पाठ्यक्रम ले पाना। तथा हर गाँव मे शिक्षा के नई नई नीतिया बनना जिससे बच्चों के माता पिता को बच्चों को पढ़ाने मे जागरूकता आये। हर व्यक्ति का अधिकार है शिक्षा और एक शिक्षा मंत्री की यह जिम्मेदारी है की वह देश मे ऐसी शिक्षा नीति रखे जो सिर्फ अमीर लोगो के लिए ही नही अपितु हर व्यक्ति के लिए हो। आज मे अगर शिक्षा मंत्री होती तो जो स्कूल कॉलगे मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे है उन पर कार्यवाही करती तथा कम फीस का निर्धारण करती ताकि हर बच्चा बिना किसी रोक के पढ़ पता।

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komal Solanki
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Answered on10/22/21

यदि आज मैं शिक्षामंत्री होती तो सबसे पहले अपने देश की शिक्षा नीति को आगे रखती जिसके कारण सभी लोग शिक्षित होते और अपने देश मे एक बदलाव लाते जिसके कारण आज हमारा देश नई टेक्नोलॉजी का उपयोग करके सभी देशो से आगे रहता और हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी होती! हमारे देश में स्कूल ही नहीं बल्कि अनेक प्रकार के शिक्षा के बारे में भी जानकारी दी जाती जैसे डांस,चित्रकला, संगीत, फोटोग्राफी, सिलाई,एंड बागवानी को भी मैं शिक्षा मे स्थान देती । गरीब छात्रों के लिए मैं छात्रवृत्तियों की व्यवस्था करती मेरा यह मानना है कि किसी भी देश की विकास का आधार उस देश की शिक्षा नीति होती है। यदि किसी देश के निवासी अशिक्षित हैं तो उस देश का कम विकास होगा यदि मैं शिक्षा मंत्री होती तो मेरा सबसे पहला कदम हर एक बच्चे को शिक्षित करना होता इसलिए एक देश के शिक्षा मंत्री को अपने देश के भविष्य के लिए सभी लोगों को शिक्षा दिलाना चाहिए.

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preeti  patel
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