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ब्रिज गुप्ता · 7 साल पहले
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चाय का आविष्कार कब और कहाँ हुआ?

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जवाब दिया गया09/17/23

क्या आप जानते हैं चाय का आविष्कार कब हुआ नहीं जानते होंगे तो आज इस आर्टिकल में मैं आपको बताती हूं कि चाय का आविष्कार कब हुआ और कहां चाय के आविष्कार की कहानी चीन से जुड़ी हुई है आज से करीब 5000 साल पहले जब एक बार चीन के सम्राट सैन नूंग अपने गार्डन में बैठे हुए थे और उनको गर्म पानी पीने की आदत थी और अचानक एक दिन अंदर गार्डन के एक पेड़ की कुछ पत्तियां उनके उबले पानी मैं आकर गिर गई और पानी का रंग बदल गया लेकिन उसमें से आने वाली खुशबू इतनी अच्छी थी के सम्राट उसे चेक बिना नहीं रह सके।

भारत में 1815 मैं कुछ अंग्रेज यात्रियों ने असम में उगने वाली चाय की झाड़ियां को दिखा जिससे वहां के लोग काबइली लोग पेय बनाकर पीते थे उसके बाद भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड बैटिंग ने 1834 में भारत में चाय के उत्पादन के लिए कमेटी बनाई और 1835 में असम में चाय की खेती शुरू कर दी गई।लेख की तस्वीर

Poonam Patel
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अपडेट किया गया04/28/26

भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में ऐसी बहुत सारी जगह है जहाँ आपको कई तरह के चाय प्रेमी मिल जाएंगे, यहाँ तक भारत के प्रधानमंत्री भी किसी समय चाय वाले थे | लेकिन हम में से कभी इस बात को किसी ने गौर किया है की आखिर इस चाय का आविष्कार हुआ कहाँ से |

किसी भी आविष्कार शब्द के पीछे गहन अध्ययन और कड़ी मेहनत होती है, तभी किसी नयी चीज़ की खोज संभव हो पाती है लेकिन जब कोई बहुत बड़ा आविष्कार अनजाने में हो जाये तो इसे किसी रोमांचक चमत्कार से कम नहीं समझना चाहिए ऐसा ही कुछ चाय के साथ भी हुआ |
तो आज जानते है कैसे चाय हम तक या हम चाय तक पहुंच पाएं जानते हैचाय के अविष्कार के पीछे की कहानी -
चाय के अविष्कार की कहानी चीन से जुडी हुई है, आज से करीब 5000 साल पहले, जब एक बार चीन के सम्राट शैन नुंग अपने गार्डन में बैठे हुए थे और उनको गर्म पानी पीने की आदत थी और अचानक एक दिन उनके गार्डन के एक पेड़ की कुछ पत्तियां उनके उबले पानी में आकर गिर गयी और उस पानी का रंग बदल गया लेकिन उसमें से आने वाली खुशबू इतनी अच्छी थी कि सम्राट उसे चखे बिना नहीं रह सके।
सम्राट ने वो पानी पीया, उन्हें उसका स्वाद बहुत पसंद आया और उसे पीने से उन्हें अपने शरीर में ताज़गी और स्पूर्ति का एहसास हुआ और उस समय चीन के सम्राट ने इस अनोखे पेय को “ch’a” नाम दिया जिसका चाइनीज भाषा में अर्थ होता है- चेक करना, इन्वेस्टीगेट करना। ऐसे में इस बात में कोई दो राहें नहीं है की चाय का अविष्कार चीन में हुआ और चीन के सम्राट शैन नुंग ने इसका इजात किया |
वही साल 1610 में डच व्यापारी चीन से चाय को यूरोप ले गए और उसके बाद धीरे-धीरे चाय पूरी दुनिया के फेमस पेय पदार्थों में शामिल हो गयी | वही भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने 1834 में भारत में चाय के उत्पादन के लिए कमेटी बनाई और 1835 में असम में चाय की खेती शुरू कर दी गयी उससे पहले साल 1815 में कुछ अंग्रेज यात्रियों ने असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों को देखा जिसे वहां के कबाइली लोग पेय बनाकर पीते थे।
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अपडेट किया गया04/28/26
चाय का इतिहास चीन से संबंध रखता है और चाय को सबसे पहले बार चीन में बनाया गया था और चाय का इतिहास छोटा नहीं है यह बहुत बड़ा है और आज से बहुत समय पहले लगभग 5000 साल पहले से चाय का इतिहास माना जाता है और चाय की खोज नहीं की गई थी. बल्कि इसकी खोज अपने आप हुई थी क्योंकि एक बार चीन के सम्राट शैन नुंग अपने बगीचे के अंदर पानी को उबाल रहे थे. क्योंकि सम्राट को पानी उबालकर पीने की आदत थी और वह जब पानी उबाल रहे थे तो उसके बगीचे के अंदर एक पेड़ की कुछ पत्तियां पानी में आकर पानी में गिर गई और पानी में उन पतियों के गिर जाने के बाद सम्राट ने देखा कि पानी का रंग बदल गया है. इसके अंदर खुशबू भी आने लगी है और फिर सम्राट ने उस पानी को पिया तो सम्राट को वह पानी बहुत पसंद आया और सम्राट को उस पानी को बार बार उबाल कर पीने की आदत हो गई.
 
वह सम्राट इस चीज को दुनिया में किसी को नहीं बताना चाहता था और जब भी कोई उसके राज्य में आता था तो वह उसके मेहमान नवाजी के लिए उस पतियों के पानी को उबाल कर देता था.जो कि उन लोगों को बहुत पसंद आती थी. प्रमाणिक रूप से चाय का जिक्र डब्ल्यू. एच. उकरस की पुस्तक ‘ऑल, एबाउट टी. में मिलता है. इस पुस्तक में उकरस ने चीनी इतिहासकार द्वारा वर्णित पहाड़ का जिक्र किया है. उसमें लगाई गई चाय सम्राट के लिए आरक्षित थी
 
भारत में चाय का इतिहास
भारत में भी चाय का बहुत हैरान कर देने वाला इतिहास है. क्योंकि भारतीय सबसे पहली बार जब गवर्नर लॉर्ड विलियम बैंटिक आए जो कि पहली बार 1834 में भारत आए थे तो उन्होंने देखा कि भारतीय लोग पानी के अंदर पत्तियां डालकर पी रहे हैं तो उसने लोगों से यह बात पूछी तो लोगों ने उसे चाय को दवाई के तौर पर बताया क्योंकि चाय एक दवाई की तरह मानी जाती है. चाय पीने से हमारे शरीर में थकावट नहीं होती है इसलिए लोगों ने उसे दवाई के रूप में बताया था और फिर लॉर्ड विलियम बैंटिक ने एक समिति का गठन किया जिसके बाद भारत के अंदर धीरे-धीरे चाय का काम शुरु किया गया और 1835 में असम के अंदर चाय के बाग लगाए गए.
 
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