Krishna Patel
Krishna Patel· 4 साल पहले
लेखक

लिंगराज मंदिर कहां स्थित है?

49
616

इस बातचीत में शामिल हों

क्रमबद्ध करें
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया11/24/23

लिंगराज मन्दिर ओडिशा के भुवनेश्वर शहर में स्थित है। यह 11वीं शताब्दी में राजा सोमा वंश द्वारा निर्मित किया गया था। यह एक हिंदू मन्दिर है। इसे सोमावंशी राजा यतातिप्रथमने बनवाया था। यह लाल पत्थर से बना हुआ है और कलिंग शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भुवनेश्वर में सबसे पुराने मंदिरो में से एक है। यही पर बिंदुसागर सरोवर है। मंदिर का प्रागंण 150 मीटर वर्गकार का है तथा कलश की ऊँचाइ 40 मीटर है। यहाँ प्रतिवर्ष अप्रैल माह में रथयात्रा आयोजित की जाती हैं। बिंदुसागर सरोवर में भारत के प्रत्येक झरने और तालाबों का जल संग्रहित है। लिंगराज मन्दिर में सनातन विधि से चौबीस घंटे पूरे विधि - विधान के साथ महादेव शिवशंकर की पूजा अर्चना की जाती है। शिव मन्दिर होने की वजह से महाशिवरात्रि के दिन यहाँ विशेष समारोह होता है। इस मन्दिर में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु जी की भी पूजा की जाती है। लेख की तस्वीर

komal Solanki
letsdiskuss ke sath learn bhi or Earn bhi.......
प्रोफ़ाइल देखें

🔍 Seeking answers & sharing perspectives 🌍 Turning thoughts into meaningful blogs

22
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया11/24/23

आज हम आपको बताएंगे कि लिंगराज मंदिर कहां स्थित है चलिए आज हम आपको इसके बारे में कुछ जानकारी देते हैं।

लिंगराज मंदिर उड़ीसा के राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है।

यह 11वीं शताब्दी में राजा सोमा वंश द्वारा निर्मित किया गया था। और यह एक हिंदू मन्दिर है। इसे सोमावंशी राजा यताति प्रथम ने बनवाया था। यह लाल पत्थर से बना हुआ है। लिंगराज मन्दिर में सनातन विधि से चौबीस घंटे पूरे विधि - विधान के साथ महादेव शिवशंकर की पूजा अर्चना की जाती है। और शिव मन्दिर होने की वजह से महाशिवरात्रि के दिन यहाँ विशेष समारोह भी होता है। इस मन्दिर में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु जी की भी पूजा की जाती है।

लिंगराज अर्थात भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह मंदिर 180 फिट लम्बा है। यहाँ लाखों की तादाद में भक्त भगवान लिंगराज के दर्शन करने आते हैं।

लेख की तस्वीर

S
Knowledge Obsessed Mind
प्रोफ़ाइल देखें
21
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
अपडेट किया गया11/25/23

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि लिंगराज का मंदिर कहां स्थित है। लिंगराज मंदिर भारत के ओड़िशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में है। यह भुवनेश्वर का सबसे प्राचीन और सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में लिंगराज मंदिर को प्राचीन समय में एकमरा क्षेत्र कहा जाता था, क्योंकि भगवान शिव का लिंग एक आम के पेड़ के नीचे स्थित है आमतौर पर भगवान शिव के मंदिरों पर झंडे पर त्रिशूल बनाया जाता है। महादेव शिवशंकर की पूजा अर्चना की जाती है। शिव मन्दिर होने की वजह से महाशिवरात्रि के दिन यहाँ विशेष समारोह होता है। लिंगराज का मंदिर भुवनेश्वर राज्य का सबसे प्राचीन मंदिर है इस मंदिर की लंबाई 180 मीटर ऊंची है। यहां पर भगवान शिव जी के दर्शन करने के लिए रोज लाखों की संख्या में भीड़ लगी हुई होती है। यह लाल पत्थर से बना हुआ है और कलिंग शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भुवनेश्वर में सबसे पुराने मंदिरो में से एक है।

Letsdiskuss

Kanchan  Patel
Multi-Niche Content Researcher
प्रोफ़ाइल देखें
21
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया11/26/23

चलिए आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं जो हमारे भारत देश की सबसे फेमस मंदिरों में से एक है। दोस्तों उसे मंदिर का नाम है लिंगराज मंदिर तो इससे पहले जानते हैं कि लिंगराज मंदिर कहां स्थापित है।मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि लिंगराज मंदिर उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है।जो की एक हिंदू मंदिर है और भगवान शिव को समर्पित है।यह मंदिर भुवनेश्वर के पुराने मंदिरों में से एक है। और भुवनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण सोमवमसी राजवंश के राजाओं द्वारा किया गया था। लिंगराज मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है। इतना ही नहीं इस मंदिर में भगवान शिव जी के साथ भगवान विष्णु जी की भी पूजा की जाती है। इस मंदिर में दर्शन के लिए रोजाना लाखों की संख्या में भक्तगण आते हैं।इस मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है।लेख की तस्वीर

Aanya  Singh
लेखक
प्रोफ़ाइल देखें
20
जवाब दिया गया01/06/24

नमस्कार दोस्तों क्या आप जानते हैं सूर्य मंदिर कहां स्थित है, शायद आपको इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होगी तो चलिए आज हम आपको इस पैराग्राफ के माध्यम से बताते हैं कि सूर्य मंदिर कहां स्थित है। हमारे भारत देश में भगवान सूर्य देव के मुख्य रूप से चार मंदिर हैं और इनमें उड़ीसा का कोणार्क सूर्य मंदिर, राजस्थान के झालरापाटन का सूर्य मंदिर, गुजरात के मेहसाणा को मोढेरा सूर्य मंदिर और जम्मू कश्मीर का मार्तंड आदि मंदिर का नाम आता है। लेकिन आज के इस लेख में हम आपको बताते हैं कि सूर्य मंदिर कहां स्थित है।

भारत देश के उड़ीसा राज्य में जगन्नाथ पुरी से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर कोणार्क नामक शहर में कोणार्क सूर्य मंदिर स्थित है। कलिंग वास्तु कला के तहत इस कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण किया गया है। बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से इस मंदिर को बनाया गया है। कोणार्क दो शब्दों कोण और अर्क से मिलकर बना है यहां अर्क का अभिप्राय सूर्य देव से है जबकि सूर्य देव इस मंदिर में रथ पर सवार है।

कोणार्क सूर्य मंदिर भगवान सूर्य देव को समर्पित किया गया भारत का यह रहस्यमई मंदिर पूरी दुनिया में काफी ज्यादा मशहूर है। भारत समेत पूरी दुनिया भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं को कोणार्क में सूर्य देव के दर्शन करने के लिए और इस मंदिर के अवलोकन के लिए हर वर्ष आते हैं। इसके साथ कोणार्क मंदिर को यूनेस्को की तरफ से वर्ष 1984 में विविश्व धरोहर स्थल की मान्यता दी गई है।

माना जाता है कि इस मंदिर में साक्षात रूप में भगवान के दर्शन होते हैं इसके अलावा इस मंदिर में बावन टन का चुंबक भी लगा है। इसके अतिरिक्त अनूठी मूर्ति कला और इसके से जुड़ी कहानी इस मंदिर को और भी ज्यादा रहस्यमई तथा खास बनाते हैं।

Letsdiskuss

Poonam Patel
लेखक
प्रोफ़ाइल देखें
11
0
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया11/25/23

चलिए आज हम आपको आज हम आपको बताएंगे कि लिंगराज मंदिर कहांआपको इसके बारे में कुछ जानकारी देते हैं।

लिंगराज मंदिर उड़ीसा के राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है।

यह 11वीं शताब्दी में राजा सोमा वंश द्वारा निर्मित किया गया था। और यह एक हिंदू मन्दिर है। इसे सोमावंशी राजा यताति प्रथम ने बनवाया था। यह लाल पत्थर से बना हुआ है। यह भुवनेश्वर का सबसे प्राचीन और सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में लिंगराज मंदिर को प्राचीन समय में एकमरा क्षेत्र कहा जाता था, क्योंकि भगवान शिव का लिंग एक आम के पेड़ के नीचे स्थित है आमतौर पर भगवान शिव के मंदिरों पर झंडे पर त्रिशूल बनाया जाता है। महादेव शिवशंकर की पूजा अर्चना की जाती है। मन्दिर में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु जी की भी पूजा की जाती है।

इस लिंगराज अर्थात भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह मंदिर 180 फिट लम्बा है। यहाँ लाखों की तादाद में भक्त भगवान लिंगराज के दर्शन करने आते हैं। लेख की तस्वीर

K
Natural Health Companion
प्रोफ़ाइल देखें
20
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया10/27/22

हमारे भारत देश के उड़ीसा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर मे लिंगराज का मंदिर स्थित है। जो कि बहुत ही विशाल और प्राचीन मंदिर है। हम आपको बता देंगे लिंगराज का अर्थ होता है लिंगम का राजा और भगवान शिव जी को लिंग के रूप में पूजा जाता है। इसलिए इस मंदिर का नाम लिंगराज मंदिर है। लिंगराज का मंदिर भुवनेश्वर राज्य का सबसे प्राचीन मंदिर है इस मंदिर की लंबाई 180 मीटर ऊंची है। यहां पर भगवान शिव जी के दर्शन करने के लिए रोज लाखों की संख्या में भीड़ लगी हुई होती है। इसलिए आप भी एक बार लिंगराज मंदिर घूमने अवश्य जाएं।Letsdiskuss

और पढ़े- भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर कौन से हैं ?

Krishna Patel
लेखक
प्रोफ़ाइल देखें
23
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया10/22/22

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे एक और नए लेख मे इसलिए मैं आपको लिंगराज मंदिर के बारे में बताना चाहती हूं लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर में स्थित है लिंगराज का अर्थ होता है, लिंगम का राजा और भगवान शिव को लिंग के रूप में पूजा जाता है यह मंदिर उड़ीसा राज्य के राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है और शहर के पुराने मंदिरों में से एक है लिंगराज मंदिर को प्राचीन समय में एकमरा क्षेत्र कहा जाता था, क्योंकि भगवान शिव का लिंग एक आम के पेड़ के नीचे स्थित है आमतौर पर भगवान शिव के मंदिरों पर झंडे पर त्रिशूल बनाया जाता हैलेख की तस्वीर

Poonam Patel
लेखक
प्रोफ़ाइल देखें
23
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया10/18/22

दोस्तों आप ने लिंगराज मंदिर के बारे में सुना ही होगा। पर क्या आप जानते है कि लिंगराज मंदिर कहाँ है यदि आप नहीं जानते है तो हम आपको बताएंगे। लिंगराज मंदिर भारत के ओड़िशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में है। यह भुवनेश्वर का सबसे प्राचीन और सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में लेख की तस्वीरलिंगराज अर्थात भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह मंदिर 180 फिट लम्बा है। यहाँ लाखों की तादाद में भक्त भगवान लिंगराज के दर्शन करने आते हैं।

V
लेखक
प्रोफ़ाइल देखें
23
जवाब दिया गया05/25/22

प्रेम मंदिर वृंदावन के मथुरा मे स्थित है। प्रेम मंदिर मे श्री कृष्ण और राधा की झाकियां है और राम -सीता का फूल बंगला बहुत ही सुंदर रामलीला, दमनलीला,श्रीगोवर्धन लीला आदि लीलाए बहुत ही सुंदर ढंग से दर्शाएं गयी है। इन मन्दिर की सुंदरता को देखने के लिए लोग बड़ी दूर -दूर से आते है, इस मंदिर मे लोग दर्शन करते है और 1-2 घंटे रुकते है उनका जाने मन ही नहीं करता है क्योंकि प्रेम मंदिर बहुत ही मनमोहक मंदिर है, क्योंकि यहाँ पर श्री कृष्ण राधा की सुंदर झाकियां देखने को मिलती है, कृष्ण राधा के प्रेम की कहानी प्रेम मन्दिर से जुडी हुई है।लेख की तस्वीर

S
लेखक
प्रोफ़ाइल देखें

Mp

15
2
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
अपडेट किया गया12/15/23

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि लिंगराज मंदिर कहां स्थित है। लिंगराज मंदिर उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है।लिंगराज मंदिर जो भगवान शिव को समर्पित है। भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक लिंगराज मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था। राक्षसों से युद्ध के बाद थकी और प्यासी माता पार्वती को जल उपलब्ध कराने के लिए इस स्थान पर भगवान शिव ने एक कूप का रूप धारण किया था और सभी नदियों को यहां बुला लिया था।

लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर का सबसे बड़े मंदिरों में से एक माना जाता है। 180 फीट ऊंचे लिंगराज मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजवंश के राजाओं द्वारा किया गया था। लिंगराज मंदिर का निर्माण लाल पत्थरो से किया गया है। बाद में गंगवंश के शासको ने लिंगराज मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।हालांकि मंदिर का वर्तमान स्वरूप सन 1090 से सन 1104 के दौरान हुआ। लेकिन मंदिर के कुछ हिस्से 1400 वर्ष पुराने है।

मंदिर के विषय में एक धार्मिक मान्यता है कि लिट्टी तथा वसा नाम के दो राक्षसों से माता पार्वती का भीषण युद्ध हुआ। माता पार्वती जी ने इन दोनों राक्षसों का वध इसी स्थान पर किया लेकिन युद्ध के कारण माता पार्वती को प्यास लगी। ऐसी स्थिति में माता पार्वती की सहायता करने के लिए भगवान शिव नेकों का धारण कर लिया और सभी नदियों को योगदान देने के लिए वही बुला लिया।इसके बाद इस स्थान पर भगवान शिव कीर्ति वास के रूप में पूजने लगे। बाद में भगवान शिव को हरिहर भुवनेश्वर के रूप में जाना गया। मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति के अलावा भगवान विष्णु की भी मूर्ति विराजित है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए रोजाना करोड़ों की संख्या में लोक दर्शन के लिए यहां भीड़ लगी रहती है। और यह मंदिर देखने में बहुत ही खूबसूरत दिखता है। इसीलिए जो भी व्यक्ति भुवनेश्वर आता है लिंगराज मंदिर घूम कर जरूर जाता है।

Letsdiskuss

Kamlesh Patel
Culture & Tradition Lover
प्रोफ़ाइल देखें
15