नमस्कार दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि लिंगराज मंदिर कहां स्थित है। लिंगराज मंदिर उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है।लिंगराज मंदिर जो भगवान शिव को समर्पित है। भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक लिंगराज मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था। राक्षसों से युद्ध के बाद थकी और प्यासी माता पार्वती को जल उपलब्ध कराने के लिए इस स्थान पर भगवान शिव ने एक कूप का रूप धारण किया था और सभी नदियों को यहां बुला लिया था।
लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर का सबसे बड़े मंदिरों में से एक माना जाता है। 180 फीट ऊंचे लिंगराज मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजवंश के राजाओं द्वारा किया गया था। लिंगराज मंदिर का निर्माण लाल पत्थरो से किया गया है। बाद में गंगवंश के शासको ने लिंगराज मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।हालांकि मंदिर का वर्तमान स्वरूप सन 1090 से सन 1104 के दौरान हुआ। लेकिन मंदिर के कुछ हिस्से 1400 वर्ष पुराने है।
मंदिर के विषय में एक धार्मिक मान्यता है कि लिट्टी तथा वसा नाम के दो राक्षसों से माता पार्वती का भीषण युद्ध हुआ। माता पार्वती जी ने इन दोनों राक्षसों का वध इसी स्थान पर किया लेकिन युद्ध के कारण माता पार्वती को प्यास लगी। ऐसी स्थिति में माता पार्वती की सहायता करने के लिए भगवान शिव नेकों का धारण कर लिया और सभी नदियों को योगदान देने के लिए वही बुला लिया।इसके बाद इस स्थान पर भगवान शिव कीर्ति वास के रूप में पूजने लगे। बाद में भगवान शिव को हरिहर भुवनेश्वर के रूप में जाना गया। मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति के अलावा भगवान विष्णु की भी मूर्ति विराजित है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए रोजाना करोड़ों की संख्या में लोक दर्शन के लिए यहां भीड़ लगी रहती है। और यह मंदिर देखने में बहुत ही खूबसूरत दिखता है। इसीलिए जो भी व्यक्ति भुवनेश्वर आता है लिंगराज मंदिर घूम कर जरूर जाता है।


Answered By Kamlesh Patel
Culture & Tradition Lover






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