अधिकतर हम देखते हैं या हमने सुना है जब भी कोई वैज्ञानिक प्रयोगशाला में अपना कोई परिक्षण करता है तो वो चूहों पर ही परिक्षण करता है। क्या हमने कभी सोचा है ऐसा क्यों? अधिकतर वैज्ञानिक चूहों पर ही अपना परीक्षण करते हैं ,इसका कारण जानने की कोशिश हमने कभी नहीं की परन्तु आपके इस सवाल ने हमें और शायद सभी को इस बात को सोचने पर मजबूर किया कि वाकई में ऐसा क्यों होता है।
चूहे और मूषक इन पर अक्सर वो परिक्षण होता है जो परिक्षण मनुष्य पर किये जाने वाले होते हैं, इसका एक मुख्य कारण यह होता है कि मनुष्य के शरीर में होने वाली कई सारी क्रियाएं मनुष्यों से मिलती हैं।
चूहे आकार में छोटे होते हैं तो उन्हें रखने में अधिक समस्या नहीं होती है और साथ ही चूहे नई जगह में एडजस्ट हो जाते हैं।
चूहे किसी भी प्रकार के परिक्षण में शांति बनाए रखते हैं, जिसके कारण उन पर आसानी से प्रयोग किया जा सकता है।
चूहों को कम खर्च में में अधिक खरीदा जा सकता है जिससे अधिक प्रयोग किये जा सकते हैं।
चूहों की उम्र 2 से 3 साल होती है, जिसके कारण इन पर परिक्षण करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता और 3 साल के बाद एक नई प्रजाति पर परिक्षण करने का मौका मिल जाता है।
अक्सर इंसानों वाले डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापा, पार्किंसन, अल्ज़ाइमर, कैंसर, हार्ट डिसीज, एड्स जैसी बहुत सारी बीमारियों को पता लगाने और उसके इलाज़ में होने वाले प्रयोग चूहों पर किये जाते हैं।
चूहों और मानव जाति की कई क्रिया एक जैसी होती है, जिसके कारण इन पर प्रयोग करना आसान होता है । साथ ही यह पता चल जाता है कि मानव पर कौन सी दवा सही होगी या नहीं, जिसके हिसाब से बीमारी की दवा मनुष्य को दी जाती है।






