Abhishek kant
Abhishek kant· 23 दिन पहले
knowledge education is most important for our life.

गांधी जयंती क्यों मनाई जाती है?

🤗Grateful
5
23

इस बातचीत में शामिल हों

क्रमबद्ध करें
ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
अपडेट किया गया10/03/26

महात्मा गांधी जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य मे प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है | इस वर्ष 2026 मे गांधी जी कि 157 वीं जयंती मनाई गई है | गांधी जयंती के साथ साथ इस दिन अन्तराष्ट्रिय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है | भारत देश को आजादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी जी ने अनेकों कार्य किए | सत्य ओर अहिंसा का लोगों को पाठ पढ़ाया | इन्होंने बिना हथियार उठाए ओर बिना किसी हिंसा के अन्यायों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई ओर जीत भी हासिल की |

गांधी जी का जन्म - महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था | उनके पिता का नाम करमचंद गांधी ओर माता का नाम पुतली बाई था | उनका विवाह मात्र 13 वर्ष कि आयु मे कस्तूरबा से तय कर दिया गया था | कस्तूरबा से इन्हे चार बेटे प्राप्त हुए जिनका नाम हरीलाल गांधी ,मणिलाल गांधी , रामदास गांधी ओर देवदास गांधी था |

गांधी जी को पाँच बार नॉवेल पुरुस्कार के लिए नामांकित किया गया था ,लेकिन यह पुरुस्कार उन्हे कभी दिए नहीं गए |

भारत ही नहीं विदेशों मे भी गांधी जी का बहुत नाम था |

गांधी जी के द्वारा किए गए आंदोलन :-

  • असहयोग आंदोलन

  • सविनय अवज्ञा आंदोलन

  • दांडी मार्च

  • भारत छोड़ो आंदोलन

गांधी जी भारत के अलावा लंदन ओर दक्षिण भारत मे भी रहे | लंदन मे वह पढ़ाई करने गए थे | लंदन के शुआती दिनों मे वहाँ के रहन सहन को देख कर गांधी जी भी उन्ही लोगों कि तरह रहने का प्रयास करने लगे ,लेकिन कुछ समय बाद वह अपने तरीके को ही अपना कर रहने लगे , वहाँ रहकर उन्होंने वेजिटेरियन सोसाइटी कि सदस्यता ली ओर एक संगठन मे रहने का निश्चय कर अपने विचारों को एक नई दिशा प्रदान की | उन्ही विचारों के चलते वह निरंतर भारत को आजादी दिलाने के कार्य मे अग्रसर रहे |

6 जुलाई 1944 को पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हे एक रेडियो पर भाषण देते समय उनके सम्बोधन मे उन्हे राष्ट्रपिता कहकर पुकारा था | तभी से गांधी जी को राष्ट्रपिता के नाम से पुकारा जाने लगा |

1917 मे किया गया चंपारण सत्यागृह सफल होने के कारण गांधी जी को रवींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा का खिताब देकर सम्मानित किया | गांधी जी ने भी रवींद्रनाथ टैगौर को गुरुदेव कि उपाधि दी थी |

गांधी जी को बापू के नाम से भी जाना जाता है | बापू नाम उन्हे साबरमती आश्रम मे रहने वाले राहवासियों द्वारा दिया गया था | वहाँ रहने वाला हर एक व्यक्ति गांधी जी को बहुत ही प्रेम करता था | इसलिए उन्होंने गांधी जी को प्यार से बापू नाम से पुकारना पसंद किया |

लेख की तस्वीर

komal Solanki
letsdiskuss ke sath learn bhi or Earn bhi.......
प्रोफ़ाइल देखें

🔍 Seeking answers & sharing perspectives 🌍 Turning thoughts into meaningful blogs

1