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बसंत पंचमी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है ?

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Vansh ChopraAuthor

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बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जिसे हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है, इसलिए इसे “बसंत पंचमी” कहा जाता है।

इस दिन विशेष रूप से ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए यह दिन उनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

बसंत पंचमी का मुख्य उद्देश्य प्रकृति में आए परिवर्तन और नए जीवन के आगमन का उत्सव मनाना होता है। सर्दियों के बाद जब मौसम सुहावना और हल्का गर्म होने लगता है, पेड़ों पर नई पत्तियाँ आने लगती हैं और वातावरण में हरियाली और फूलों की बहार आ जाती है, तब इस पर्व को मनाया जाता है।

इस दिन विद्यार्थी, शिक्षक और कलाकार मां सरस्वती की पूजा करते हैं ताकि उन्हें ज्ञान, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं, क्योंकि पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा और वसंत ऋतु का प्रतीक माना जाता है।

बसंत पंचमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह प्रकृति और संस्कृति का उत्सव भी है। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि जीवन में ज्ञान का बहुत महत्व है और शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है।

कई स्थानों पर इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा भी होती है, जिससे वातावरण में उत्साह और खुशी का माहौल बन जाता है। इसके अलावा लोग मीठे व्यंजन बनाते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं।

यहां एक और दिलचस्प विषय है जिसका आप आनंद ले सकते हैं: माता दुर्गा किसका अवतार थीं ?
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Answered By Madhav Sharma

Decoding the ancient language of the stars — with six years of practice, study, and thousands of consultations behind every word.
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Madhav Sharma is a professional astrologer with over 6 years of practice in Vedic astrology. He holds a Jyotish Visharad certification from the Indian Council of Astrological Sciences (ICAS), New Delhi — one of India's most recognised credentials in the field — and has studied under senior practitioners with decades of lineage in classical Vedic traditions. His content covers Vedic astrology, birth chart analysis, planetary transits, kundli matching, horoscope predictions, and the practical application of astrological principles in daily life. His work has been published on platforms including AstroSage, GaneshaSpeaks, and Boldsky Astrology, where he writes for readers seeking guidance grounded in classical astrological texts and consistent interpretive practice. Over six years, Madhav has conducted 2,000+ individual consultations and published 200+ articles on astrology, covering everything from beginner guides to in-depth analyses of rare planetary combinations. He is a practising member of the Indian Astrology Federation and has been a featured voice at astrology conferences and spiritual wellness events across India. Across all his writing, his approach remains consistent — classical knowledge, disciplined interpretation, and content that respects both the tradition of Vedic astrology and the intelligence of the reader.

Updated on06/05/26
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बसंत पंचमी हिन्दुओं का एक प्रसिद्ध त्यौहार है । हिन्दू पंचांग के हिसाब से यह त्यौहार हर साल माघ के महीने में आता है , और यह त्यौहार शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन आता है, और इसलिए इसको बसंत पंचमी कहते हैं । बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और यह त्यौहार भारत के आलावा बांग्लादेश और नेपाल में बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है । इस दिन की पूजा में महिलाएं पीले रंग का वस्त्र पहनती हैं।

इस मौसम में प्रकृति का सौंदर्य बहुत ही अच्छा होता है, जो की आपके मन को मोहित करने वाला होता है। लोग इस इस ऋतु के स्वागत के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा करते हैं । बसंत पंचमी के त्यौहार को देवी सरस्वती के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है । इस मंत्र के साथ माता सरस्वती का पूजन किया जाता है ।

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

इसका अर्थ है, कि हे माँ आप परम चेतना हो,सरस्वती के रूप में आप हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षक हो , हम में जो भी संस्कार हैं वो सब आपके दिए हुए हैं , जिसकाआधार आप हो, इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है।

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(इमेज-नूस्ड)

बसंत पंचमी का महत्त्व -

बसंत पंचमी का महत्व पौराणिक रामायण काल से जुड़ा है । जब माता सीता का हरण कर के रावण उन्हें लंका ले जाता है तो उसके बाद भगवान राम अपनी पत्नी सीता को ढूढ़ते हुए कई सारे स्थानों में जाते हैं , जिनमें से एक दंडकारण्य भी था। इस जगह में शबरी नाम की एक भीलनी रहती थी। वह भगवान राम की परम भक्त थी और जब भगवान राम उसकी कुटिया में गए तो वह ख़ुशी के कारण इतनी पागल हो गई कि वह राम को चखकर बेर खिलने लगी, वह इसलिए उन्हें चख रही थी कि कहीं वो राम को खट्टे बेर न खिला दें । कहा जाता है कि गुजरात के डांग जिले में वह जगह आज भी है, जहां पर शबरी मां का आश्रम था। भगवान राम उस जगह में बसंत पंचमी के दिन ही पधारे थे। इसलिए इस क्षेत्र के वनवासी बसंत पंचमी के दिन को पूजते हैं और वो वहाँ रखे हुए एक पत्थर का पूजन करते हैं, उन लोगों की श्रध्दा है कि उस पत्थर पर भगवान श्रीराम आकर बैठे थे और इतना ही नहीं यहाँ शबरी माता का मंदिर स्थापित है।
 
एक मान्यता बसंत पंचमी को मानाने की यह भी मानी जाती है, कि जब मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार युद्ध में पराजित किया परन्तु पृथ्वीराज चौहान की महानता के अनुसार उन्होंने गौरी को जीवन दान दिया,परन्तु जब पृथ्वीराज चौहान 17 वीं बार गौरी से हार गए तो उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को नहीं छोड़ा और अपने साथ अफगानिस्तान ले गए और वहाँ उन्होंने पृथ्वीराज चौहान की दोनों आखें निकाल दी, इसके बाद मोहम्मद ग़ोरी ने मृत्युदंड देने से पहले पृथ्वीराज चौहान के शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा, तो इस अवसर का लाभ उठाकर कवि चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया, जिस संदेशे के अनुसार इस बार पृथ्वीराज चौहान ने कोई गलती नहीं की और अपने शब्द भेदी बाण से सीधा मोहम्मद गौरी के सीने में तीर चला दिया और उसके बाद चंदबरदाई और पृथ्वीराज ने एक दूसरे के पेट में छुरा मर कर खुद ही आत्मबलिदान दे दिया । 1192 ई को यह घटना बसंत पंचमी के दिन ही घटी थी । बसंत पंचमी की एक मान्यता यह भी मानी जाती है ।
Ramesh Kumar

Answered By Ramesh Kumar

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Updated on06/05/26
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धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन ही माँ सरस्वती का जन्‍म हुआ था, इसलिए इस दिन विद्या की देवी मां सरस्‍वती की जयंती के रूप में विश्व भर मे बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है।बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा हर एक कॉलेज, स्कूल मे किया जाता है, इस दिन माँ सरस्वती की जयंती पर सभी सरकारी दफरो मे भी पूजा -पाठ, हवन पुरे विधि -विधान के साथ किया जाता है।Article image

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Answered By Setu Kushwaha

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Answered on04/07/23
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इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। ... वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था।
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Answered By Zyan Malik

The Curious Introvert
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Answered on02/04/20
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