प्रयागराज द्वादश माधव परिक्रमा के बारे में जाने, सभी तीरथों के बराबर मिलता है पुण्य

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प्रयागराज को सनातन परंपरा में केवल एक नगर के रूप में ही नहीं जाना जाता है बल्कि समस्त तीर्थों का राजा माना गया है। इ​सलिए यहां पर द्वादश माधव मंदिर की परिक्रमा की परंपरा है जो कालांतर में भूला दी गई, इसके पीछे का कारण मुगलों ने इन मंदिरों को उजाड़ दिया और परिक्रमा पर बैन लगा दिया लेकिन आजादी के बाद यह परिक्रमा फिर शुरु हुआ। आइए इसके बारे में आपको इस रिसर्च लेख के ​जरिए जानकारी दे। आप भी जब प्रयागराज आए तो द्वादश माधव का दर्शन करें।

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प्रयागराज में ब्रह्मा जी ने बनाया क्यों यज्ञवेदी

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर बसी यह पावन भूमि अनादि काल से धर्म, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है। ब्रह्मा जी के मन में संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की इच्छाा हुतो तो परमपिता ब्रह्मा जी ने सबसे पहले प्रयागराज को पवित्र भमि को अपनी यज्ञ वेदी के रूप में चुना था। इसी कारण प्रयागराज को 'प्रथम यज्ञ भूमि' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। इसलिए प्राचीन समय से प्रयागराज में आयोजित होने वाला महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है। इस महाकुंभ की विशालाता और भव्यता के साथ-साथ यहाँ की एक अत्यंत प्राचीन और दिव्य परंपरा है। प्रयागराज के द्वादश माधव परिक्रमा करके सभी तरथों के भ्रमण का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

प्रयाग को कहा जाता है विष्णुधाम

प्रयागराज को 'विष्णु धाम' की भूमि भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु स्वयं यहाँ 12 अलग-अलग रूपों में प्रकट होकर नगर के रक्षक देवता के रूप में विराजमान हैं। इन 12 स्वरूपों को ही 'द्वादश माधव' कहा जाता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, जो पुण्य फल किसी श्रद्धालु को संसार के सभी तीर्थों का भ्रमण करने और समस्त देव मंदिरों के दर्शन करने से प्राप्त होता है, वह अकेला पुण्य केवल द्वादश माधव की भक्तिभाव से परिक्रमा करने मात्र से मिल जाता है। आइए जानते हैं प्रयागराज के इन 12 दिव्य माधव स्वरूपों, उनके स्थानों और इस अलौकिक परिक्रमा के धार्मिक व ऐतिहासिक महात्म्य के बारे में।

प्रथम यज्ञ भूमि प्रयागराज द्वादश माधव प्रकट स्थान

प्रथम यज्ञ भूमि प्रयागराज और द्वादश माधव का प्राकट्य

मत्स्य पुराण, पद्म पुराण, स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण जैसे महान धार्मिक ग्रंथों में प्रयाग महात्म्य का विस्तार से उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि निर्माण का कार्य आरंभ किया, तो उन्होंने अपनी पहली यज्ञ वेदी प्रयागराज में बनाई। इस यज्ञ की वेदी को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया था—अन्तर्वेदी, मध्य वेदी और बाह्य वेदी।

* अन्तर्वेदी: यह भाग यमुना पार स्थित अरैल क्षेत्र को माना जाता है। संगम तट से दूसरी छोर पर अरेल स्थित है।

* मध्य वेदी: यह भाग संगम के समीप दारागंज क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

* बाह्य वेदी: यह भाग गंगा पार स्थित झूंसी क्षेत्र को कहा जाता है।

इन तीनों वेदियों के चारों दिशाओं में धर्म और यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने बारह रूप प्रकट किए। अब हम आपको 'माधव' शब्द का अर्थ बताने जा रहे हैं। लक्ष्मी ('मा') के स्वामी ('धव')। अर्थात भगवान विष्णु का वह स्वरूप जो अपने भक्तों को ऋद्धि, सिद्धि और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान श्रीकृष्ण ने संगम क्षेत्र की रक्षा का दायित्व संभाला, तब उन्होंने यहाँ माधव रूप धारण किया था। यह माधव रूप उनके 12 रूप यहां पर स्थित है जिसकी परिक्रमा करने से सभी तीर्थ का पुण्य प्राप्त होता है।

प्रयागराज के रक्षक: द्वादश माधव पीठों का विस्तृत वर्णन

द्वादश माधव परिक्रमा में आने वाले 12 मंदिरों का अपना विशिष्ट स्थान, कथा और आध्यात्मिक महत्व है। अगर आप प्रयागराज आएँ, तो इन 12 माधव पीठों के दर्शन करके अपने जीवन धन्य बना सकते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयागराज नगरी आपको आमंत्रित करता है लिए जाने माधव के 12 रूपों के बारे में। यहां पर हम प्राचीन माधव पीठ की परिक्रमा के बारे में भी बताने जा रहे हैं जैसा कि हमने आपको बताया है कि मुगलों के शासनकाल और अंग्रेजों के शासनकाल में यह परिक्रमा बंद कर दी गई थी लेकिन आजादी के बाद माधव पीठ की परिक्रमा फिर शुरू हो गया है। वर्तमान में सरकार ने इन मंदिरों का जीर्णोद्धार करना शुरू कर दिया है। इसलिए आध्यात्मिक रूप से आप जुड़ जाइए और शुरू करते हैं 12 माधव के परिचय और उनके महत्व के बारे में इस तरह से आप इस आध्यात्मिक लेख के जरिए भगवान श्री माधव के विभिन्न रूपों से परिचित हो जाएंगे और आध्यात्मिक और धार्मिक पुण्य प्राप्त करेंगे।

1. श्री वेणी माधव (दारागंज)

द्वादश माधव परिक्रमा का शुभारंभ सदैव श्री वेणी माधव जी के दर्शन से ही होता है। यह मंदिर दारागंज में संगम तट के निकट स्थित है। वेणी माधव को प्रयागराज का प्रधान नगर देवता माना जाता है। यहाँ भगवान विष्णु अपनी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी के साथ चतुर्भुज रूप में विराजमान हैं, जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित हैं। संगम स्नान के बाद सबसे पहले वेणी माधव के दर्शन करने का विधान है।

2. श्री अनंत माधव (चौफटका/दारागंज वेदी)

परिक्रमा का दूसरा प्रमुख पड़ाव अनंत माधव हैं। यह पीठ दारागंज वेदी क्षेत्र के तहत आती है और सप्लाई डिपो के समीप चौफटका के पास स्थित है। आपकी जानकारी के लिए यहां बता दें कि समय के साथ शहर में बदलाव होता गया और सारे माधव क्षेत्र की पहचान धार्मिक ग्रंथो और पुराणों के अनुसार की गई और उन मंदिरों को फिर से जीर्णोद्धार भी किया गया हालांकि जब आप प्रयागराज आते हैं तो यहां के मोहल्लों का नाम आपको आसानी से समझ में आ जाता है और यहां तक पहुंचाने का साधन टेंपो बहुत आसान और सुलभ है। आप माधव धार्मिक स्थान तक बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं।

अब आपको हम बताते हैं कि अनंत माधव भगवान की असीम और अनंत अनुकम्पा के प्रतीक हैं। इनके दर्शन करने से भक्त को अनंत भक्ति और मानसिक दृढता की प्राप्ति होती है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन हनुमान प्रतिमा भी स्थापित है।

3. श्री असि माधव (अस्सी घाट, दारागंज)

दारागंज के अस्सी घाट क्षेत्र में गंगा तट पर स्थित असि माधव परिक्रमा का तीसरा केंद्र हैं। पापों को काटने वाले असि माधव का दर्शन करने से सारे पाप कट जाते हैं और आध्यात्मिक और धार्मिक स्थिति भक्त की हो जाती है।

असि माधव भगवान के पाप-विनाशक स्वरूप को दर्शाते हैं। मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से साधक के पूर्व जन्मों के समस्त असि (शस्त्र रूपी) पाप कट जाते हैं।

4. श्री मनोहर माधव (दारागंज)

प्रयागराज का दारागंज मोहल्ला संगम तट से ही कुछ दूरी पर स्थित है यहां पर आकर आप मनोहर माधव जी का दर्शन कर सकते हैं। जी हां मनोहर माधव का दिव्य मंदिर दारागंज क्षेत्र में ही स्थित है। जैसा कि नाम से आपको पता चल गया होगा। मनमोहक स्वरूप भक्तों के हृदय में ईश्वर भक्ति का दीप जलाता है। मनोहर माधव के दर्शन करने से मन की चंचलता दूर होती है, दुर्विचार नष्ट होते हैं और एकाग्रता की प्राप्ति होती है। दूर-दूर से भक्त यहां पर आते हैं और अपने मन को एकाग्र प्राप्त करके जीवन की सारी इच्छाओं को पूरा करते हैं।

5. श्री गदा माधव (छिवकी, नैनी)

यमुना पार नैनी क्षेत्र में छिवकी स्टेशन के पास स्थित श्री गदा माधव परिक्रमा का पाँचवाँ और दक्षिणी बिंदु हैं। छिवकी स्टेशन यमुना के पार जाना माना स्टेशन यहां पर बहुत से ट्रेन आते हैं लेकिन आप अगर प्रयागराज की किसी भी स्टेशन पर ठहरते हैं तो यहां तक आने का साधन टेंपो बहुत सरल और सुलभ है। यहां आना बहुत आसान है आपके लिए।

धर्म और सत्य की रक्षा के लिए भगवान यहाँ गदा धारण किए हुए विराजमान हैं।

यहाँ दर्शन करने से साधक को अकाल मृत्यु और काल-भय से मुक्ति मिलती है। हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पंचमी को यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन भी होता है।

6. श्री पद्म माधव (बीकर-देवरिया, घूरपुर)

यमुना पार घूरपुर के बीकर-देवरिया गाँव में स्थित पद्म माधव का मंदिर अत्यंत शांत वातावरण में है। हाथ में कमल पुष्प (पद्व) लिए भगवान का यह स्वरूप पवित्रता, शांति और आत्मिक सौंदर्य का संदेश देता है। यहाँ दर्शन करने से जीवन में सुख-समृद्धि जीवन में आती है।

7. श्री चक्र माधव (अरैल)

यमुना पार अरैल क्षेत्र में प्रसिद्ध सोमेश्वर नाथ मंदिर के पास श्री चक्र माधव जी का धाम है। चक्र माधव को कालचक्र और धर्मचक्र को संचारित करने वाला माना गया है। इनके पूजन से जीवन में आने वाली अचानक बाधाएँ और ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं।

8. श्री बिंदु माधव (द्रौपदी घाट)

मेरा सबसे प्रिय स्थान द्रौपदी घाट पर स्थित बिंदु माधव है। यह स्थान अत्यंत अलौकिक है। यह परमात्मा के सूक्ष्म (बिंदु) तत्व को दर्शाता है। यहाँ संगम तट से थोड़ी दूरी पर लेटे हुए हनुमान जी का भी सुंदर मंदिर है। बिंदु माधव के दर्शन से जीवन के कठिन से कठिन संकटों का निवारण हो जाता है।

9. श्री शंख माधव (छतनाग, मुंशी बगीचा)

झूंसी के पास छतनाग क्षेत्र में स्थापित शंख माधव भगवान के शंखधारी स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं। शंख की दिव्य ध्वनि जिस प्रकार वातावरण की नकारात्मकता को मिटाती है, उसी प्रकार शंख माधव का पूजन भक्तों के जीवन से समस्त अशुभ तत्वों और दरिद्रता का नाश करता है।

10. श्री संकटहर माधव (झूंसी)

झूंसी क्षेत्र में स्थित दसवें माधव 'संकटहर माधव' हैं। जैसा कि नाम से सिद्ध होता है, यह स्वरूप अपने शरणागत भक्तों के समस्त संकटों, दुखों और मानसिक तनावों को पल भर में हर लेता है।

11. श्री अक्षय वट माधव (संगम तट)

त्रिवेणी संगम के अत्यंत समीप स्थित अमर वृक्ष 'अक्षय वट' के पास ही अक्षय वट माधव का निवास है। इस स्वरूप का दर्शन करने से अक्षय (कभी नष्ट न होने वाले) पुण्य की प्राप्ति होती है।

12. श्री आदि माधव / योग माधव (झूंसी)

द्वादश माधव परिक्रमा का अंतिम पड़ाव झूंसी में स्थित आदि माधव (योग माधव) का मंदिर है। यह स्थान आध्यात्मिक साधना, योग मार्ग और सृष्टि के प्रारंभिक काल का प्रतीक है। इनकी पूजा से साधक को मोक्ष और ईश्वर ज्ञान की प्राप्ति होती है।

मोक्ष का मार्ग: इस यात्रा को 'मोक्षदायिनी परिक्रमा' कहा गया है, जो साधक को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त करती है।

परिक्रमा करने की सरल व व्यावहारिक विधि

यदि आप एक दिन में द्वादश माधव परिक्रमा पूरी करना चाहते हैं, तो नीचे दी गई व्यवस्था का पालन कर सकते हैं:

परिक्रमा को ई-रिक्शा, ऑटो या निजी वाहन के माध्यम से 8 से 10 घंटे में आसानी से पूरा किया जा सकता है।

प्रारंभ (प्रातः 6:00 बजे): सुबह स्नान के बाद दारागंज स्थित श्री वेणी माधव मंदिर से यात्रा का संकल्प लेकर शुरुआत करें।

प्रथम चरण (पूर्वाह्न): दोपहर से पहले दारागंज क्षेत्र के मंदिरों (अनंत माधव, असि माधव, मनोहर माधव) का दर्शन करें।

द्वितीय चरण (अपराह्न): इसके बाद द्रौपदी घाट (बिंदु माधव), नैनी व घूरपुर क्षेत्र (गदा माधव, पद्म माधव) और अरैल (चक्र माधव) के दर्शन पूरे करें।

तृतीय चरण (सायंकाल): अंत में झूंसी क्षेत्र के मंदिरों (शंख माधव, संकटहर माधव, आदि माधव) और अक्षय वट माधव के दर्शन करते हुए संगम पहुँचें।

समापन: परिक्रमा की पूर्णता पर त्रिवेणी संगम में पावन स्नान करें, दीपदान करें और सात्विक दान देकर यात्रा को संपन्न करें। पूरे दिन सात्विक आहार और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप बनाए रखें।

प्रयागराज की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कि संगम स्नान के साथ इन 12 नगर रक्षकों के दर्शन न कर लिए जाएँ। द्वादश माधव के दर्शन कर आप भी अपने जीवन में आध्यात्मिक सुख और अक्षय पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न द्वादश माधव पीठ मंदिर कहां स्थित है?

उत्तर : आपको बता दे कि द्वादश माधव पीठ प्रयागराज के नगर देवता के रूप में स्थित है। 12 माधव मंदिर यहां पर परिक्रमा की जाती है।

प्रश्न: प्रयागराज के वेणी माधव मंदिर कहां स्थित है?

उत्तर : संगम क्षेत्र में वेणी माधव माधव का मंदिर है। यह मंदिर दारागंज मोहल्ले में स्थित है।

प्रश्न : प्रयागराज के माधव मंदिर का क्या महत्व है?

उत्तर : प्रयागराज के माधव मंदिर का बहुत बड़ा महत्व है। नगर देवता के रूप में विष्णु यहां पर माधव के नाम से विराजमान है। इन मंदिरों की परिक्रमा करने से जितने भी तीर्थ स्थान हैं, उनके दर्शन और परिक्रमा करने का फल प्राप्त होता है।

प्रश्न: प्रयागराज कैसे पहुंचे?

उत्तर: प्रयागराज आपको बस मार्ग और रेलवे लाइन के माध्यम से आ सकते हैं इसके साथ ही यहां बमरौली हवाई अड्डे से विमान की भी सुविधा है। संगम क्षेत्र कैब और ई रिक्शा के माध्यम से आसानी से आप पहुंच सकते हैं। दिसंबर और जनवरी के महीने में माघ मेला शुरू होता है इस दिन आना बहुत ही बेहतर होता है इसके अलावा साल भर आप यहां पर संगम और माधव मंदिर के दर्शन के लिए आ सकते हैं।

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Updated on09/23/26

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