मेरी समझ से, डीपफेक एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसमें किसी इंसान का चेहरा या आवाज़ AI की मदद से बदलकर ऐसा दिखाया जाता है जैसे वो सच में वही बोल या कर रहा हो, जबकि असल में उसने ऐसा कुछ किया ही नहीं होता।
पहली बार देखने पर ये बिल्कुल असली लगता है, इसलिए पहचानना मुश्किल होता है कि ये नकली है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल कभी-कभी गलत चीज़ों के लिए भी किया जाता है, जैसे फेक वीडियो बनाना या किसी को बदनाम करना।
हालांकि, ये टेक्नोलॉजी पूरी तरह बुरी नहीं है—फिल्मों और एंटरटेनमेंट में इसका अच्छा इस्तेमाल भी होता है। लेकिन अगर गलत हाथों में चली जाए, तो ये काफी मिसलीडिंग और खतरनाक हो सकती है।





