मेरे नजरिए से, जमानत देना सीधे तौर पर गलत संदेश नहीं देता, क्योंकि जमानत का मतलब यह नहीं होता कि व्यक्ति निर्दोष या दोषी साबित हो गया है। यह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें अदालत यह तय करती है कि जांच के दौरान व्यक्ति को जेल में रखा जाए या बाहर रहने दिया जाए।
अगर सबूत मजबूत हों, तो सजा बाद में भी दी जा सकती है। इसलिए जमानत को “छूट मिलना” मानना सही नहीं है।
हाँ, कुछ लोगों को ऐसा लग सकता है कि बड़े या मशहूर लोगों को आसानी से राहत मिल जाती है, जिससे असमानता का एहसास होता है। लेकिन असल में अदालतें कानून के आधार पर ही फैसला करती हैं, न कि व्यक्ति की पहचान के आधार पर।





