शारीरिक शिक्षा
शरीर से जुड़ी शिक्षा को शारीरिक शिक्षा कहा जाता है. अर्थात वह जानकारी जो हमारे शरीर से संबंधित है. अंग्रेजी में इसे फिजिकल एजुकेशन कहा जाता है. शारीरिक शिक्षा के अंतर्गत योग,व्यायाम, जिम्नास्टिक आदि चीजों के बारे में पढ़ाया जाता है.
शारीरिक शिक्षा में बच्चों को न केवल स्वस्थ रहना सिखाया जाता है बल्कि शरीर के महत्व से भी उन्हे अवगत कराया जाता है. इसके अलावा हमें अपने शरीर के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
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दुनिया भर के पाठ्यक्रमों में शारीरिक शिक्षा को शामिल किया जा चुका है. बच्चों के पाठ्यक्रम में यह उतना ही महत्वपूर्ण है जैस गणित , विज्ञान, अंग्रेजी आदि।
क्या है शारीरिक शिक्षा?
हम शारीरिक शिक्षा को एक प्रकार का मनोविज्ञान भी कह सकते है. इसमें बाल मनोविज्ञान को भी उतना ही महत्व दिया गया है जितना एडल्ट मनोविज्ञान को। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के शरीर को ही नहीं बल्कि मस्तिष्क के साथ उनके व्यवहार को भी नियंत्रित करना सिखाती है.
शारीरिक शिक्षा बच्चों की मानसिक स्थिति को भी संतुलित रखना सिखाती है.सरल शब्दों में कहें तो शारीरिक शिक्षा बच्चों के संपूर्ण विकास को प्रभावित करती है.
शारीरिक शिक्षा नियोजित तरीके से बच्चों को विकसित होना सिखाती है. इसे पढ़ने से बच्चों का मानसिक और बौद्धिक विकास होता है. शारिरिक शिक्षा को बच्चों के पाठयक्रम से जोड़ना एक प्रशंसनीय कार्य है. इससे बच्चों का चरित्र निर्माण करने में भी मदद होगी। यह शिक्षा बच्चों को समाज में रहकर देश को प्रगति में भी योगदान देना सीखाता है.
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शारिरिक शिक्षा की कुछ अन्य परिभाषाएं
शारिरिक शिक्षा उन अनुभवों का सामूहिक प्रभाव है जो शारीरिक क्रियाओं द्वारा व्यक्ति को प्राप्त होता है. (डेलबर्ट यूफर)
शारिरिक शिक्षा व्यक्ति के भीतरी अनुभवों के कारण व्यक्ति विशेष में होने वाले परिवर्तनों के कुल जोड़ को कहते है.(रोजालैंड)
शारिरिक शिक्षा का उद्देश्य क्या है ?
शारिरिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है. इसमें बच्चों का बौद्धिक और मानसिक दोनों विकास सम्मिलित है. शारीरिक शिक्षा के अंतर्गत बच्चों को ना केवल खेलकूद के माध्यम से बल्कि उन्हें समाज में किस तरह व्यवहार करना है यह भी सिखाया जाता है. शिक्षा के माध्यम से बच्चे अपने सामाजिक परिवेश के साथ सामंजस्य स्थापित करना भी सीखते हैं
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शारिरिक शिक्षा का इस्तेमाल क्या है?
शारिरिक शिक्षा सबसे पहले सभी वर्ग के इंसानों को स्वस्थ रहने में मदद करता है. यह शरीर के संतुलन और शक्ति को बनाए रखता है. यह बच्चों के कौशल विकास में भी सहायक है.इसका इस्तेमाल शरीर के अंदरूनी और बाहरी विकास को बढ़ावा देने के लिया भी किया जा सकता है. कहते है स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन निवास करता है. यदि हमें भी ऐसा ही बनना है तो शारीरिक शिक्षा का सही इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. इससे हम योग करना , दौड़ना, कसरत करना, व्यक्तित्व का विकास करना, बच्चों को दूसरों के साथ खेलना, उन्हें मानसिक रूप से मजबूत और स्वस्थ बनना, सेहत से जुड़े उपकरणों का सही इस्तेमाल करना, पर्यावरण और आसपास होने वाली गतिविधियों को सीखने में मदद करना और पर्यावरण को लेकर जिम्मेदार बनाना भी सीखा सकते है.
शारिरिक शिक्षा को लेकर आमतौर पर यह भी सोचा जाता है कि ये केवल स्वस्थ लोगों के लिए है. जबकि यह मिथ्या है । शारिरिक शिक्षा जिस प्रकार स्वस्थ लोगों के लिए काम करती है वह ठीक विकलांगों के लिए भी वैसा ही कार्य करती है. बल्कि विकलांग बच्चें इससे और अधिक लाभ ले सकते है.
विकलांग बच्चों के लिए यह और भी अधिक कारगर हथियार है चूंकि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है. इसका मतलब यह हुआ कि यदि बच्चा शरीर का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है तो वह अपने दिमाग का विकास करने पर और अधिक ध्यान लगाएगा।
विकलांग बच्चों को विशेष कौशल सीखने में मदद करेगा। उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाएगा।