Abhishek kant
Abhishek kant· 23 दिन पहले
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प्रयागराज तीर्थ का राजा क्यों कहलाता है?

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अपडेट किया गया10/06/26

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​गंगा, यमुना और पवित्र अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर बसा प्रयागराज भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का एक पवित्र धार्मिक स्थल है। इसे 'तीर्थराज' यानी सभी तीर्थों का राजा और 'त्रिवेणी संगम' के नाम से भी जाना जाता है।

​प्रयागराज को 'तीर्थराज' क्यों कहते हैं और इसका प्रमाण कहाँ है?

  • ​प्रयागराज को सभी तीर्थों का राजा कहे जाने पड़ने के बारे में मत्स्य पुराण, पद्म पुराण और अग्नि पुराण जैसे सनातन धर्म ग्रंथों में मिलता है।

  • ​पौराणिक कथाओं के में बताया गया है कि संसार के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड की रचना के बाद धरती पर अपना सबसे पहला यज्ञ इसी स्थान पर संपन्न किया गया था।

  • संस्कृत में 'प्र' का अर्थ 'उत्कृष्ट (बेस्ट) ' या 'प्रथम' (पहला) होता है और 'याग' का अर्थ 'यज्ञ' होता है। इस प्रकार 'प्र' और 'याग' के मिलने से 'प्रयाग' शब्द बना। क्योंकि इस पावन भूमि पर देवताओं के राजा की उपस्थिति में प्रथम महायज्ञ हुआ। इसीलिए इसे ग्रंथों में समस्त तीर्थों का राजा यानी 'तीर्थराज प्रयाग' की उपाधि दी गई।

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस नगरी के मुख्य संरक्षक स्वयं भगवान श्री विष्णु हैं और यहाँ 'माधव' रूप में विराजमान हैं। कहा जाता है कि प्रयाग क्षेत्र में भगवान विष्णु के 12 स्वरूप (द्वादश माधव) में प्रयागराज की रक्षा करते हैं ।

​पातालपुरी मंदिर और प्रयागराज देवता

​अगर आप प्रयागराज जाते हैं, तो संगम तट पर स्थित अकबर के किले के भीतर 'पातालपुरी मंदिर' एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। इस प्राचीन मंदिर में प्रवेश करते ही सबसे पहले नगर के रक्षक 'प्रयागराज देवता' की पुरानी प्राचीन मूर्ति के दर्शन होते हैं। स्थानीय मान्यताओं और मंदिर के पुजारियों के अनुसार इन्हीं 'प्रयागराज देवता' के नाम पर भी इस पवित्र भूमि की पहचान जुड़ी हुई है।

इनके दर्शन के बाद ही मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों का पूजन पूर्ण माना जाता है।

​अक्षय वट और ऐतिहासिक शिवलिंग

​पातालपुरी मंदिर के भीतर ही प्रसिद्ध 'अक्षय वट' वृक्ष और एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है।

मोक्ष और पाप मुक्ति: हिंदू मान्यताओं के अनुसारसंगम तट पर स्नान और दान करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष यानी पुनर्जन्म के चक्र से छुटकारा मिलता है।

त्रिवेणी संगम तट

​ऐतिहासिक ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रयागराज को 'तीर्थराज' यानी सब तीर्थों का राजा माना गया है। महाभारत, रामायण और पुराणों में इस बात का विवरण मिलता है कि यहाँ माघ मेले और 12 वर्षों में लगने वाले महाकुंभ में स्नान करने से प्राणी को अक्षय पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा की निर्मलता, यमुना की गहराई और सरस्वती की गुप्‍त धारा का यह संगम केवल नदियों का मिलन नहीं, बल्कि जीव का ईश्वर से मिलन का प्रतीक है। यही दिव्य विश्वास इसे सृष्टि का सबसे पावन स्थल बनाता है।

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Abhishek Kant Educator | Journalist | Writer About Me / परिचय Master of Journalism & Mass Communication (MJMC) degree holder with extensive experience in journalism, teaching, and content writing. Passionate about sharing knowledge, telling impactful stories, and inspiring others through meaningful content. मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री के साथ पत्रकारिता, अध्यापन और कंटेंट राइटिंग का समृद्ध अनुभव। अपने लेखन और शिक्षण के माध्यम से लोगों तक सही जानकारी और विचार साझा करना ही मेरी प्रेरणा है।

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