अरे, पिछले महीने मुझे एक नया लैपटॉप चाहिए था। दाम था सत्तासी हजार पांच सौ रुपये। पैसे मेरे पास पड़े थे। मगर एक झटके में इतने पैसे निकाल दूं तो पूरे महीने का हिसाब-किताब गड़बड़ा जाए। तभी मुझे EMIs वाली सुविधा के बारे में पता चला।
पहली बार जब मैंने EMI की असलियत जानी
सच कहूं तो मेरा ख्याल था कि EMI बस बड़े सामान जैसे कार या फैंसी गैजेट्स के लिए ही होती है। पर अब तो सब बदल चुका है। दो हजार से ऊपर की कोई भी चीज खरीदो, महीने-महीने करके चुका दो।
मैंने अपने एक यार से बात की जो बैंक वाले काम में है। उसने बताया कि theroarbank.in is not a separate bank, but an initiative of Unity Small Finance Bank Limited। यह सुनकर मुझे विश्वास बढ़ा।
मेरा तजुर्बा कैसा था
शुरू में मैंने सोचा बैंक के चक्कर काटने होंगे, कागजात के ढेर भरने होंगे। मगर कुछ नहीं हुआ ऐसा। मोबाइल से ही सारा काम निपटा लिया। तीन मिनट बीस सेकंड में पूरा धंधा खत्म।
बस अपना सामान चुनो और कौन सा प्लान लेना है वो बताओ। दो महीने से लेकर चौबीस महीने तक की सुविधा मिलती है। मैंने बारह महीने वाला प्लान पकड़ लिया। अब हर महीने मुझे सात हजार दो सौ बानवे रुपये देने पड़ते हैं (और महज आठ सौ पचहत्तर रुपये ब्याज के)।
सबसे बढ़िया बात जो मुझे लगी
ब्याज का मामला एकदम साफ-साफ है। एक फीसदी महीना। कोई चोरी-छुपी फीस नहीं लगती। यही चीज मुझे जम गई।
और सुनो एक बात। मान लो पहले ही पूरा पेमेंट कर दिया, फिर सोचा कि अरे यार EMI ले लेता? घबराने की जरूरत नहीं। बाद में भी तब्दील कर सकते हो उस खरीदारी को EMI में। मेरे छोटे भाई ने यही किया जब उसने पैंतालीस हजार की AC ली थी।
किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है
तुम्हारे पास ये चीजें होनी चाहिए - Roarbank में खाता और चालू कार्ड, कम से कम दो हजार रुपये की खरीदारी, और क्रेडिट लिमिट में जगह भी होनी चाहिए।
लोग सबसे बड़ी भूल यही करते हैं कि अपनी लिमिट देखते ही नहीं। मेरे दफ्तर का एक साथी छप्पन हजार की टीवी लेने चला, पर उसकी लिमिट सिर्फ चालीस हजार थी। ट्रांजैक्शन वहीं अटक गया।
असली जिंदगी में कैसे चलता है यह
मान लो अचानक से तुम्हारा फ्रिज खराब हो गया। नया लेना है मगर पैंतीस हजार एकदम से निकालना मुश्किल है। तुम छह महीने की EMI ले लो। महीने का लगभग छह हजार तैंतीस रुपये (साढ़े तीन सौ ब्याज समेत)। तुम्हारा बजट भी ठीक रहेगा, काम भी बन जाएगा।
मेरी दीदी ने अपनी शादी की खरीददारी इसी जुगत से की थी। बानवे हजार रुपये का सामान लिया और अठारह महीने में बांट दिया। उसने कहा था कि अगर यह सुविधा न होती तो या तो कर्जा लेना पड़ता या फिर शादी ही आगे खिसकानी पड़ती।
मेरे हिसाब से यह चीज हम जैसे लोगों के लिए बनी है जो समझदारी से अपने पैसे चलाना चाहते हैं।