दुर्गा-पूजा का महत्व - letsdiskuss
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asha hiremath

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दुर्गा-पूजा का महत्व


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मां दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं। वह कष्टों को हरने वाली और पापों का नाश करने वाली है। महामोह, अविद्या और अज्ञान के बादलों को छिन्न-भिन्न करके वह विद्या और ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाली है। शत्रुओं से पराजित राजा और शत्रु भय से निष्कासित समाधि वैश्य ने इसी देवी की आराधना करके ही मोक्ष की प्राप्ति की थी।

यह देवी हम सब को मोक्ष प्रदान करने वाली है। यदि देवी के आराधना हम सच्चे मन से करें तो हम महारोग महोत्पात, महासंकट और महाशोक से मुक्त ही नहीं होते बल्कि जीवन-मुक्त भी हो सकते हैं।

दुर्गा पूजा का महोत्सव भारत में अत्यंत धूम-धाम से मनाया जाता है। औपचारिक रूप से यह उत्सव अश्विन मास की दूसरी प्रतिपदा से दसवीं तक मनाया जाता है।

जिन नौ मां दुर्गाओं की पूजा होती है उसके नामः

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  • मां शैलपुत्री,
  • मां ब्रह्मचारिणी,
  • मां चंद्रघंटा,
  • मां कुष्मांडा,
  • मां स्कंदमाता,
  • मां कात्यायनी,
  • मां कालरात्रि,
  • मां महागौरी और
  • मां सिद्धिदात्री है, यह सभी महाशक्ति दुर्गा के नौ रूप है।

भारत के विभिन्न भागों में दुर्गा का पूजन विभिन्न ढंग से होता हैः –

  • राजस्थान में दुर्गा पूजा के दिन शास्त्र पूजन भी होता है।
  • गुजरात में पूजन के साथ नृत्य का आयोजन किया जाता है।
  • महाराष्ट्र में दुर्गा पूजन के साथ ही दीपोत्सव भी मनाया जाता है।
  • दक्षिण के राज्यों में दुर्गा की पूजा के साथ ही सरस्वती की पूजा भी की जाती है।
  • मैसूर, कुल की घाटियों में दुर्गा पूजा अत्यंत भव्यता से की जाती है और मेलों का आयोजन किया जाता है।
  • बनारस से पंजाब तक इस अवसर पर भगवान राम के जीवन से संबंधित तरह-तरह की लीलाओं का आयोजन किया जाता है और उसके दाम दानव संहारक एवं पापनाशक रुप को विभिन्न लीलाओं के द्वारा चित्रित किया जाता है।

भारत के बाहर भी मां दुर्गा के पूजा विभिन्न आकृतियों से होती है। अन्य देशों में रहने वाले हिंदू भी इस शक्ति - वाहिनी देवी की आराधना इस अवसर पर करते हैं।


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