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वर्तमान समय में ज़िंदगी जीना मुश्किल

K

| Posted on June 4, 2018

वर्तमान समय में ज़िंदगी जीना मुश्किल

वर्तमान समय कि बात न ही करें तो बेहतर होगा | क्योकि वर्तमान में जितना देश आधुनिक होता जा रहा हैं,उतना ही देश बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है,और जो हालात आज कल के हो रहे है,उसके बाद तो धरती का विनाश संभव है | इंसान अब इंसान नहीं हैं,जानवर बनता जा रहा है | इंसान की इंसानियत ऐसे कैसे ख़त्म होती जा रही है ? क्या हो गया है इस धरती के लोगो को ? कुछ नहीं पता न ही समझ आ रहा है |

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हर रोज ऐसी खबरे आ जाती है,जो इंसान को किसी दूसरे इंसान पर भरोसा न करने की तरफ प्रभावित करती है | अब ये स्थिति आ गई है कि कोई किसी पर भरोसा नहीं कर सकता | समय जितना आधुनिक हो रहा है,उतना ही लोगो के दिमाग में गंदगी भर्ती जा रही है | बस बेटी पढ़ाओ में लगे है ,पर बेटियों की सुरक्षा का क्या ? क्यों कोई इसमें आवाज नहीं उठा रहा है ?

ये कानून बनाया जा रहा है कि सिर्फ नाबालिग से रेप करने वाले को सजा का प्रावधान है,तो इसका मतलब क्या समझा जाये कि जो बालिग है उनके साथ कोई कुछ भी कर सकता है उसका कोई कानून नहीं है | ऐसा कानून सिर्फ नाबालिग के लिए ही नहीं बल्कि हर महिला के लिए होना चाहिए | रेप एक गुनाह है और वो चाहे बालिग का हो या नाबालिग का गुनाह सिर्फ गुनाह होता है ,और गुनाह कि सजा मिलती है न कि उनमे कोई अन्तर किया जाता है |

जब गुनाह करने वाले की इंसानियत ख़तम हो गई है तो उसको सजा देने में भी इंसानियत मत दिखाओ | अगर गुनेहगार हिरासत में है तो क्यों उसको जेल में बंद कर के दो वक़्त मुफ्त का खाना देकर ,क्यों बेवजह कोर्ट में उनका केस चला कर इतना समय बर्बाद किया जाता है ? क्यों उनको सीधा सज़ा नहीं दी जा सकती ? जब उनमे इंसानियत नहीं तो हम में क्यों ? पहले खुद बदलो तभी देश बदलेगा | हम जब तक अपने आप को नहीं बदलेंगे देश कभी नहीं बदल सकता |

बस जब भी कोई ऐसी घटना होती है,तो लोग पहुँच जाते है मोमबत्ती हाथ में लेकर इंडिया गेट पर ,बस कुछ दिन का तमाशा रहता है आम जनता का भी ये फिर लोग ठन्डे पड़ जाते है क्योकि लोगो के पास समय नहीं है | मोमबत्ती लेकर पहुँचने से बेहतर हैं ऐसे गुनाह पर रोक लगाने के लिए कानून से नियम बनवाए जाये | कोई भी प्रदर्शन सिर्फ तब न किया जाए जब किसी के साथ कोई ऐसा संगीन गुनाह हुआ हो |

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