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ravi singh· 5 years ago
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भारत के लिए नाथूराम गोडसे ने क्या किया?

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नाथूराम गोडसे एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें भारत का हर एक इंसान पहचानता है। नाथूराम गोडसे जी का जन्म 19 मई 1910 में हुआ था। नाथूराम गोडसे एक कट्टर हिंदू थे। जब नाथूराम गोडसे को यह बात पता चली कि महात्मा गांधी भारत का विभाजन कर रहे थे ये सब नाथूराम गोडसे जी को स्वीकार नहीं था कि भारत का विभाजन हो उसी वक्त नाथूराम गोडसे जीने 30 जनवरी को महात्मा गांधी जी के सीने में 3 गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। और अपना जुर्म कबूल कर लिया। जिसके बाद उन्हें जेल की सजा हो गई इसके बाद 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे जी को फांसी की सजा सुनाई गई थी। नाथूराम गोडसे जी ने महात्मा गांधी को गोली इसलिए मारी थी क्योंकि उनकी वजह से भारत देश का विभाजन हो रहा था।

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Answered by
Krishna Patel
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Answered on06/07/22
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नाथूराम गोडसे एक ऐसा नाम है जिसे पूरी दुनिया में हर एक शख्स हर एक इंसान अच्छी तरह जानता है

नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई 1910 बारामती में हुआ था और इनकी मृत्यु 15 नवंबर 1949 में अंबाला में हुई थी

नाथूराम गोडसे कट्टर हिंदू थे और नाथूराम गोडसे का यह कहना था कि जब भारत का विभाजन हुआ था तो उस समय महात्मा गांधी ने भारत और पाकिस्तान के मुस्लिमों का समर्थन किया था तो एक कट्टर हिंदू थे नाथूराम गोडसे जनवरी 30 तारीख को 1948 को नई दिल्ली में महात्मा गांधी को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी।

नाथूराम गोडसे एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्व से सदस्य भी रह चुके हैं।

महात्मा गांधी की हत्या करने के बाद नाथूराम गोडसे को अदालत में खड़ा किया गया तो नाथूराम गोडसे ने अपना जुर्म बिना किसी रोक-टोक के शिकार कर लिया था कि हां मैंने गांधी जी को गोली मारकर हत्या कर दी उनकी मृत्यु का जिम्मेदार मैं हूं पर गौर से नहीं गांधीजी के लिए यह बात भी कही कि गांधी जी ने देश के लिए जो समर्पण दिया जो देश की सेवा करी मैं उन का तहे दिल से तन मन से सम्मान करता हूं मैंने उन पर गोली चलाई क्योंकि वह देश का विभाजन कर रहे थे जनता की आंखों में धूल झोंक कर रहे थे हमारे देश हमारी मातृभूमि का विभाजन करने का अधिकार किसी को भी नहीं है ना ही किसी को मिल सकता है यह संभव है।

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नाथूराम गोडसे एक कट्टर हिंदू थे तो उनका मानना था कि मेरा पहला दायित्व हिंदुओ के लिए एक देशभक्त होने के नाते मेरा यह धर्म है सभी करोड़ों हिंदुओं की स्वतंत्रता और हितों का रक्षा करना मेरा एकमात्र धर्म है।

और इसी सोच के चलते नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी के अंतिम उपवास रखा था वह मुसलमानों के पक्ष में गया था।

तो यह बात नाथूराम गोडसे ने सोची और यह निर्णय लिया कि अब गांधी का अस्तित्व मिटाना होगा उनकी मृत्यु करनी होगी।

और जब गांधी दक्षिण अफ्रीका मैं भारतीय समुदाय को उनका हक दिलाने की दिशा में बहुत अच्छा काम कर कर आए थे।

परंतु जब वापस भारत आए तो उनकी मानसिकता पूरी तरह से बदल चुकी थी यानी ऐसे सोचने लगे कि क्या सही है क्या सही होगा और क्या गलत है यह सोचना उनका सही था पर परंतु वहीं निर्णय के लिए खुद को अंतिम पद मानने लगे थे यानी जो मेरा फैसला होगा वही सब का फैसला होगा सभी को मानना पड़ेगा ऐसी उनकी मानसिकता बन चुकी थी।

नाथूराम ने जनवरी 30 तारीख को 1948 इको महात्मा गांधी को सामने से तीन गोली मारकर हत्या कर दी थी जिनमें से दो गोली तो उनके शरीर से आर पार हो गई पर एक गोली अंदर ही फस कर रह गई जिस कारण वश गांधी जी की मृत्यु हो गई और उसी समय तुरंत नेहरु जी ने अचानक से एक दीवार पर चढ़कर यह घोषणा कर दी कि अब गांधी जी नहीं रहे उनका निधन हो चुका है यह बात तेजी से फैलने लगी।

उसके बाद नाथूराम गोडसे ने अपने दोनों हाथ हवा में उठा कर सरेंडर कर दिया था पर उनके पास ना तो पुलिस आ रही थी ना ही कोई जनता फिर करीब 5 मिनट तक जब उन्होंने पुलिस पुलिस चिल्लाया तब जाकर उन्हें पकड़ लिया गया और पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

फिर 15 नवंबर की तारीख को 1949 ईस्वी को नाथूराम गोडसे को फांसी के तख्ते पर चढ़ा दिया गया।

और हां गॉड से को यह भी छत था कि गांधीजी दोनों तरफ अपनी एक अच्छी छवि बनाने के चक्कर में मातृभूमि का बंटवारा कर रहे हैं गोडसे का मानना यह भी था कि सरकार मुस्लिमों का अनुचित रूप से तुष्टिकरण कर रहे हैं और यह सब गांधीजी की सोची-समझी नीतियां हैं।

और गॉड से को जब पता चला है कि कश्मीर समस्या के बावजूद जिन्ना ने गांधी जी के पाकिस्तान दौरे को सहमति दे दी है तो गॉड से उस समय मानसिक तनाव व टेंशन में आ गया कि यह सब इसलिए हो रहा है कि गांधीजी का मुसलमानों के लिए कुछ ज्यादा ही प्रेम भाव व लगाओ दया भाव हो रहा है और हिंदुओं के हित व भावनाओं को तो वह सोच भी नहीं रहे हैं।

इन्हीं कारणों वश गोडसे ने गांधी जी को भी मृत्यु करने का एक फैसला किया

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N
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Answered on07/09/21
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