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हीना खान · 8 साल पहले
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आज कल के बच्चे सिर्फ फ़ोन पर ही क्यों लगे रहते है ?

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जवाब दिया गया05/13/26

आजकल phones बच्चों के लिए सिर्फ entertainment नहीं बल्कि पूरा world बन चुके हैं। Games, YouTube, reels, chatting और social media सब कुछ phone में ही मिल जाता है इसलिए naturally attraction बढ़ता है। Parents भी कई बार busy होने की वजह से बच्चों को phone दे देते हैं ताकि वो occupied रहें। Problem तब शुरू होती है जब screen time habit या addiction जैसा बन जाता है। Outdoor games, hobbies और real-life interaction कम होने लगे हैं। Honestly, सिर्फ बच्चों को blame करना भी सही नहीं है क्योंकि adults भी पूरा दिन phones पर रहते हैं। Technology useful है, लेकिन balance और limits maintain करना बहुत जरूरी हो गया है।

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Reporting what matters — with 12 years of ground-level journalism behind every story.
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Pari Deshmukh is a journalist with over 12 years of experience covering current affairs across print and digital media in India. She holds a Master's degree in Journalism and Mass Communication from Pune University, bringing both academic grounding and extensive field experience to her reporting. Over her career, Pari has reported on national politics, policy developments, social issues, and breaking news events across India. Her work has appeared on platforms including The Print, Scroll.in, and Hindustan Times Digital, where she has built a reputation for factual, balanced, and timely reporting on stories that shape public discourse. With 12+ years in the field, she has covered major national events, conducted ground-level investigations, and interviewed policymakers, civil society leaders, and public figures. Her journalism is driven by one standard — verified facts reported without distortion, regardless of the pressure or pace of the news cycle. She has participated in press panels at the Ramnath Goenka Excellence in Journalism Awards and is a member of the Press Club of India. Her reporting continues to serve readers who need current affairs coverage they can trust.

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अपडेट किया गया05/21/26

आज कल के बच्चे सिर्फ फोन पर इसलिए लगे रहते है, क्योंकि उनके माता -पिता बच्चो को मोबाइल देकर रखते है। ज़ब बच्चे रोते है, या माता -पिता कोई काम कर रहे होते है तो बच्चे उन्हें परेशान करते है,तो माता -पिता बच्चो को मोबाइल पकड़ा देते है और धीरे -धीरे बच्चो की आदत मोबाइल देखने की पड़ जाती है।
बच्चे मोबाइल देखने की इस लत के कारण बच्चो के आँखों मे कई परेशानियां होने लगती है जैसे कि बच्चो के आँखों मे कम दिखाई देने लगता है, आँखों से आंसू आना, सिर मे अचानक से दर्द होना।

इसलिए हर एक माता -पिता को अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए क्योंकि बच्चे तो नासमझ होते है, लेकिन माता -पिता समझदार होते है। इसलिए माता -पिता को बच्चो को मोबाइल देने के बजाय अपने बच्चो के साथ फुटबॉल, बैटमिंटल खेलना चाहिए, जिससे बच्चो का मनोरंजन हो जाएगा और बच्चे मोबाइल नहीं देखेंगे।
Letsdiskuss

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जवाब दिया गया10/31/22

आज कल के बच्चे सिर्फ फोन पर इसलिए लगे रहते है उनके माता-पिता आपने बच्चो पर ध्यान नहीं दें पाते है, क्योकि उनके माता -पिता सारा टाइम ऑफिस रहते है और आपने बच्चो को घर पर मोबाइल देकर वह ऑफिस चले जाते है और बच्चे घर पर अकेले रहते है जिस कारण से वह सारा टाइम मोबाइल चलाने मे लगे रहते है। लेकिन बच्चो को ज्यादा देर तक मोबाइल नही चलाने दें,उनकी आंख खराब होने का खतरा रहता है।

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जवाब दिया गया06/26/22

यह बात बिल्कुल सही है कि आजकल के बच्चे दिन भर फोन में लगे रहते हैं दरअसल इसके पीछे का कारण यह है कि आजकल के माता-पिता आधुनिक हो चुके हैं और अपने बच्चों को भी आधुनिक बनाने के चक्कर में उन्हें ज्यादा से ज्यादा मोबाइल फोन इस्तेमाल करने को देते हैं। दूसरी बात यह है कि आजकल के माता-पिता को काम के चक्कर में अपने बच्चों के लिए समय नहीं मिल पाता है जिस वजह से वे अपने बच्चों को मोबाइल देकर उनका टाइमपास करने के लिए मोबाइल फोन दे देते हैं। जिस वजह से बच्चों को धीरे धीरे मोबाइल फोन के लत लग जाती है और ज्यादा से ज्यादा समय भी मोबाइल फोन पर गुजारते हैं।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया11/25/20
निशांत कुमार बिहार के एक इंजीनियरिंग स्नातक हैं, जिन्हें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एकमात्र बच्चे के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म बिहार में हुआ था। उन्होंने BIT मेसरा, रांची से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है।
निशांत कुमार, वास्तव में, बिहार के तीन जाने-माने राजनेताओं में से सबसे कम ज्ञात पुत्र हैं - लालू प्रसादयादव, नीतीश कुमार, और रामविलास पासवान, क्योंकि वे खुद को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखते हैं, और इसलिए सामाजिक और राजनीतिक समारोहों से दूर रहते हैं। लालू यादव के बेटे, तेजस्वी यादव और रामविलास पासवान के बेटे, चिराग पासवान दोनों सक्रिय राजनेता हैं। 2017 में, पटना में एक क्षेत्रीय टीवी चैनल के साथ बातचीत करते हुए, उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने से इनकार कर दिया और आध्यात्मिक जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की, उन्होंने कहा,
“मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है, न ही राजनीति करने का कोई ज्ञान। इसलिए मैंने राजनीति में शामिल होने का फैसला नहीं किया है, बल्कि आध्यात्मिक जीवन जी रहा हूं। ”
“मेरी माँ और पिता ने मुझे इतनी संपत्ति दी है कि मुझे किसी भी चीज़ के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। यह अच्छा है कि तेजस्वी और तेजप्रताप राजनीति में हैं, लेकिन मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। ”



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अपडेट किया गया05/21/26

नमस्कार हीना जी ,बहुत अच्छा सवाल है आपका , आज कल के बच्चे फ़ोन पर क्यों लगे रहते है ? क्या आपको नहीं लगता आज कल के बच्चे जो फ़ोन पर लगे होते है ,टीवी विडिओ गेम मे लगे होते है इसका कही न कहीकारण माँ - पिता खुद है | क्योकि बच्चे पहले सेनहीं जानते फ़ोन के बारे मे उनको हम ही बताते है क्योकि हम ही है जो उनको आधुनिक बनाने मे लगे है |

आज कल की जनरेशन बहुत ज्यादा आधुनिक हो गए है | और कही न कही बच्चो के अधिक फ़ोन मे लगे रहना उनके माँ -पिता के कारण ही है क्योकि आज कल के माँ -पिता के पास समय का आभाव है | वर्तमान मे जहा इंसान को अपने लिए समय नहीं वही औरो के लिए तो क्या ही समय होगा | और अपने रोजाना की व्यस्त ज़िंदगी मे अपने बच्चो के लिए समय न दे पाना कोई आश्चर्य जनक बात नहीं |

जब बच्चो को उनके अपनों का समय नहीं मिलता तब वो ऐसी चीजों का सहारा लेते है जिससे उनका मन लगा रहे या वो व्यस्त रहे | और आज के समय मे उनके खालीपन को दूर करने और उनको व्यस्त रहने का एक सरल उपाय फ़ोन है | जब हम अपने बच्चो को समय नहीं देंगे तो उनको ऐसी चीजों की आदत हो ही जाएगी |

इसके लिए जरुरी है कि आप अपने बच्चे को समय दे | जितना हो सके उनसे बात करे | अपनी ज़िंदगी मे अपने बच्चो का एक विशेष स्थान रखे चाहे आप कितना भी व्यस्त हो पर जब भी आप घर मे हो तो आप स्वयं मे हो सके तो अपने फ़ोन से दूर रहे और उनसे बात करे | अपने बच्चो को समय दे , उनको अपनी और आप उनकी ज़िंदगी मे जगह बनाए | आधुनिक होना गलत नहीं पर समय से पहले अपने बच्चो कोआधुनिक बनाना आपके लिए हानिकारक हो सकता है |

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अपडेट किया गया05/21/26

हीना खान जी आपने आज बहुत ही अच्छा सवाल किया है। आपका सवाल है कि आजकल के बच्चे ज्यादातर फोन में ही क्यों लगे रहते हैं। तो जैसे कि आप और हम सभी जानते हैं कि बच्चे स्वयं फोन चलाना नहीं सिखते सबसे पहले तो माता-पिता ही अपने बच्चों को फोन चलाना सिखाते हैं ताकि उनके बच्चे आधुनिक चीजों को सीखें। लेकिन माता-पिता को यह मालूम नहीं है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बच्चों की आंखों पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि आपका बच्चा भी ज्यादा मात्रा में फोन चलाता है तो आप भी सतर्क हो जाइए नहीं तो आगे चलकर आपके बच्चों की आंखों को बहुत बड़ी दिक्कत आ सकती है। यदि बच्चे ज्यादा मात्रा में फोन का इस्तेमाल करते हैं तो बच्चों की आंखें कमजोर हो जाती हैं उन्हें दिखाई कम देने लगता है।

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