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Aanya Singh· 2 years ago
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भारत के कौन से राज्य में कुत्ते की पूजा की जाती है?

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भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले के खपरी गांव में “कुकुरदेव” नाम की मंदिर मे कुत्ते की पूजा की जाती है। कुकुरदेव मंदिर मे देवी-देवताओ की नहीं बल्कि कुत्ते की पूजा की जाती है, इस मंदिर  में शिवलिंग आदि मूर्तियां भी स्थापित की गयी है। मान्यता के अनुसार कुकुरदेव मंदिर मे दर्शन करने से कुकुर खांसी तथा कुत्ते के काटने का कोई भय नहीं होता है।

 

कुकरदेव मंदिर का इतिहास-

कुकुरदेव मंदिर का निर्माण फणी नागवंशी शासकों द्वारा 14वीं-15 वीं शताब्दी में किया गया था। इस मंदिर के गर्भगृह में कुत्ते की मूर्ति स्थापित की गयी हैऔर कुत्ते के मूर्ति के बगल में एक शिवलिंग भी स्थापित की गयी है,कुकुर देव मंदिर 200 मीटर के जमीन मे बनाया गया है।इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर भी दोनों ओर कुत्तों की प्रतिमा स्थापित की गयी है, कई लोग शिव जी के साथ ही कुत्ते की पूजा करते हैं, जैसे कि अन्य शिव मंदिर मे शिव जी के साथ नंदी की पूजा की जाती है।

 

साथ ही कुकुरदेव मंदिर में गुंबद के चारों दिशाओं में नागों के चित्र बनाये गये है, इस मंदिर के चारों ओर शिलालेख भी रखे बनाये गये है लेकिन स्पष्ट दिखाई नहीं देते हैं। इस मंदिर मे के पीछे दिवार मे राम लक्ष्मण और शत्रुघ्न की प्रतिमा भी बनायीं गयी है इसके अलावा एक ही पत्थर से बनी दो फीट की ऊंचाई मे गणेश भगवान की प्रतिमा भी मंदिर में स्थापित की गयी है।

 

जनश्रुति के अनुसार, यहाँ पर बंजारों की बस्ती हुआ करती थी। मालीघोरी नाम के एक बंजारे के पास एक कुत्ता था। अकाल पड़ने के कारण बंजारे को अपने कुत्ते को साहूकार को गिरवी रखना पड़ा।इसी बीच साहूकार के घर चोरी हो गयी थी,कुत्ते ने चोरों को साहूकार के घर से चुराया माल तालाब में छुपाते देख लिया था। सुबह कुत्ता साहूकार को चोरी का सामान जिस जगह छुपाये थे उसी जगह साहूकार को लेकर गया तो साहूकार का चोरी का सामान मिल गया,कुत्ते की वफादारी का पत्र लिखकर कुत्ते के गले में बांध दिया और कुत्ते क़ो उसके मालिक के पास जाने के लिए बोल दिया। अपने कुत्ते को साहूकार के घर से लौटकर आते देखकर बंजारे ने कुत्ते क़ो डंडे से पीटकर कुत्ते क़ो मार दिया।

 

कुत्ता ज़ब मर गया तो कुत्ते के गले में बंधे पत्र को देखकर बंजारे क़ो अपनी गलती का एहसास हुआ और बंजारे ने अपने कुत्ते की याद में कुकुर समाधि बनवाकर मूर्ति स्थापित करवा दिया।तभी से इस मंदिर क़ो कुकुरदेव मंदिर कहा जाने लगा।

 

 

 

Letsdiskuss

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Answered on03/07/24
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आज हम आपको अपने भारत देश के एक ऐसे राज्य के बारे में बताने वाले हैं। जहां पर कुत्ते की पूजा की जाती है। शायद आपको इस बात पर यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन यह बात पूरी तरह से सत्य है। तो चलिए देरी किस बात की जानकारी प्राप्त करते हैं।

 

यहां पर मैं आपको बताने वाली हूं कि भारत का वह कौन सा राज्य है जहां पर कुत्ते की पूजा की जाती है:-

 

हमारे भारत देश के छत्तीसगढ़ राज्य के बालोद जिले के एक छोटे से गांव खपरी में कुकुर देव मंदिर है जहां शिवलिंग के साथ वफादारी के प्रतीक एक कुत्ते की पूजा की जाती है। मैं आपको बता दूं कि यह मंदिर महाशिवरात्रि और नवरात्रि के समय श्रद्धालुओं से भर जाता है। आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि मंदिर में शिवलिंग होने के बावजूद भी मंदिर पूर्णता कुत्ते को समर्पित है। इस मंदिर में रोजाना बड़े-बड़े नेता जैसे कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अपनी उपस्थिति का दर्ज करा चुके हैं। यहां के स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार इस मंदिर में पूजा करने पर मनुष्य को कुकुर खांसी रोग और कुत्ते के काटने का खतरा नहीं रहता है।

 

चलिए जानते हैं कि क्यों होती है कुत्ते की पूजा:-

स्थानीय लोगों द्वारा माना जाता है कि सदियों पहले एक बंजारा अपने कुत्ते और परिवार के साथ इस गांव में आया था। और गांव में अकाल पड़ जाने के कारण बंजारे ने गांव के साहूकार से कर्ज लिया लेकिन वह उसे कर्ज को वापस नहीं चुका पाया तो कर्ज के बदले बंजारे ने साहूकार के पास अपनी वफादार कुत्ते को गिरवी रखवा दिया। और गांव को छोड़कर चला गया  लेकिन कुछ ही दिनों बाद साहूकार के घर चोरी होती है तो बंजारे द्वारा दिए गए कुत्ते ने लूट हुई चीजों के जगह का पता लगाया और साहूकार को जमीन तक ले गया। और कुत्ते द्वारा बताए गए जमीन को खोदा गया तो उसे साहूकार का उसका माल वापस मिल गया इस कार्य से खुश होकर कुत्ते के गले में पर्ची लगाकर उसे असली मालिक के पास भेज दिया गया।

 

Letsdiskuss

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Answered on03/10/24
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