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उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण

Nirupama Sekhri

@ Listener of Small Voices | | News-Current-Topics

"गौ हत्या का प्रतिवाद अथवा विरोध एक विश्वास नहीं है बल्कि एक सुविधा या उपयोग मात्र ही है |" 


अयोध्या में बाबरी मस्जिद के गिराए जाने की छब्बीसवी वर्षगांठ पर 6 दिसम्बर को राजनीतिज्ञज़ो और जनता द्वारा उतेज़ना तथा जोशीले नारे लगे | माइक व स्पीकरों पर अनेक प्रवचनरुपी भाषण भी दिए गए |  


इन बड़े झुंडो के बीच चार व्यक्तियों का दुबका हुआ आपस में एक सहमा हुआ सा समूह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर गांव खेरी से आया था | ये रामनगर कायना के निवासी है, यह छोटा सा गांव दिल्ली से 470 किमी दूर पूर्व की ओर तथा लखनऊ से 187 किमी उत्तर की ओर स्थित है | यहाँ की जनसँख्या 4 हज़ार से भी कम है | हम यहाँ चार पुस्तो से रह रहे है किन्तु हमारे प्रधान प्रेम सिंह जी ने ज़बरदस्ती हमसे हमारी ज़मीन ले ली है, और बाहर के लोगो को बेच दी है, और जब हम इस बात की जांच करवाने के लिए कहते है तो हमे धमकिया मिलती है और हमे तंग किया जाता है |

ये कैसा क़ानून है ? उनका ये कहना है |


नाथू का यह कथन है उनकी दस झोपड़िया उन लोगों ने अपनी मनमर्ज़ी से ले ली है और प्रशासन भी उनकी कोई बात नहीं सुनता है | सबने पैसे खाए है अब चाहे वो स्थानीय प्रशासन हो या फिर पुलिस हो | यदि कोई पुलिस वाला सहानुभूति हमारी बात सुनता है तो उसे तबादले की धमकी दी जाती है ये कैसा न्याय है ? उनकी यही मांग है |



ये तो स्पष्ट साबित हो रहा है की भूमि हथियाने या हड़पने का मुद्दा महत्वपूर्ण है ,तभी तो "योगी योजना प्रोग्राम " जो उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी के द्वारा प्रारम्भ की गयी है , इस मुद्दे की और इशारा करती है | इस योजना के तहत "anti - bhoo - mafia " पोर्टल बना है जहाँ भूमि हथियाने की शिकायतों का पंजीकरण हो सकता है |  


उनमे से एक है मणिराम, यह दुर्बल व्यक्ति है उनसे सहायता लेकर online foam भरा है , जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया है की "लाइसेंस वाली बंदूक की धमकी और पाले हुए गुंडों के डर से वहाँ के स्थानीय दंगा करने वालो ने उनकी फसलों को तहस-नहश कर दिया है, सारे खेतों को बर्बाद कर दिया है और जमीन को भी हथिया लिया है |


ऐसा नहीं है की यह पहली शिकायत है भले ही ये लोग निरक्षर हो पर सभी के पास ध्यान पूर्वक लिखित शिकयतों के पुलिंदे है, जो पिछले वर्ष जनवरी के महीने में पेश हुए थे |



मणिराम की पत्नी लज़्ज़ा कहती है - " बताइये मै अपने परिवार को कहाँ से खिलाऊंगी ? वह पति के साथ आयी है जिससे वह भाग दौड़ मे उसकी मदद कर सके, और साथ मे ढाई साल का बेटा मोहित भी है | " उसने कहा - हम अपने चार बच्चो को घर पर ही छोड़ कर आये हैं, और हमारी स्थिति अत्यंत निराशाजनक है " |



मणिराम का कहना है की हमारी परेशानिया और भी कठिन हो गयी है जब उन्होंने इस मानसून के दौरान हमारी एक गाय को मार डाला | हर एक बात हर एक घटना का रिकॉर्ड रखने के बाद भी कोई फायदा नहीं है| हमे कोई भी मदद नहीं मिल रही है |

पिरथीमाता दीन अपनी बांह दिखता है जो धीरे धीरे अब ठीक हो रही है इसकी हड्डी टूटी थी जब इसकी झोपडी की छत बैठ गयी थी, अब हम मज़बूर हो गए है | हम दबाब और तनाव के कारण निकल पड़े है क्योंकि हमारे खाने आमदनी या पैसो का कोई साधन नहीं रहा | हमारा घर परिवार धीरे धीरे समाप्त होता जा रहा है |


इनके तीन और मित्र इस बात की स्वीकृति लेने आएं है कि यहाँ जंतर मंतर मे अपना प्रतिवाद जता सकें |

अनुमति लेते वक़्त पुलिस ने उन्हें बताया कि वह आठ दिन बाद ही अनुमति दे पाएंगे | आठ दिन ? तब तक हम क्या करेंगे ?

दिल्ली तक कि तीस घंटो कि यात्रा ही हमारे लिए तनाव पूर्ण थी "


मणिराम बोले हम इतने दिन यहाँ कैसे रहेंगे |

हम केवल थोड़े से लोग है, हम जगह भी थोड़ी से घेर रहे है फिर ये लोग हमे अनुमति क्यों नहीं दे रकते है क्यों नहीं देंगे | उसे यह भी शक हो रहा है कही ये सब लोग भी पैसो के इच्छुक तो नहीं है |