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अभिनेता पंकज त्रिपाठी की जीवन गाथा

pooja mishra

@ Content writer | | Entertainment

बॉलीवुड में कई ऐसी दिग्गज हस्तिया हैं जो स्क्रीन पर कभी लीड रोल में नज़र नहीं आती लेकिन सबके दिलो को छू जाती हैं | इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो अपने अभिनय की प्रतिभा से ना केवल अपने fans का दिल जीतते नहीं बल्कि अपने अभिनय के हुनर में किसी किरदार को निभाते वक़्त उसमें अपनी जान फूंक देते हैं | ऐसे ही बॉलीवुड के दिग्गज हुनरबाज़ प्रतिभाशाली कलाकारों में से एक नाम हैं  " पंकज त्रिपाठी"| पंकज त्रिपाठी एक ऐसे इंसान हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को साबित कर दिया की फ़र्श से अर्श तक का रास्ता केवल कड़ी मेहनत और कठिन परिश्रम से ही बनाया जा सकता हैं|





बॉलीवुड में करीब 40 से ज्यादा फिल्मो में अपने अभिनय का हुनर दिखा चुके पंकज त्रिपाठी ने कभी भी किसी फिल्म में लीड किरदार को नहीं निभाया लेकिन, हमेशा ही अपनी जादुई परफॉरमेंस से सबको अपनी और मन मुग्ध कर के रखा , और किरदार छोटा हैं या बड़ा बिना इस बात की परवाह करते हुए सिर्फ अपने अंदर की कला को निखारा और हमेशा कोशिश की वह सिनेमा के बड़े पर्दे पर कुछ ऐसा कमाल दिखा दे की सामने बैठे दर्शक सिर्फ उनकी सरहाना करते रहे |



(courtesy-wikibio)

बिहार के छोटे से बेलसंड गांव गोपालगंज से मुंबई की और कदम रखते हुए पंकज त्रिपाठी ने कभी भी नहीं सोचा था की वह भारतीय सिनेमा के एक अनमोल कलाकार के रूप में निखरेंगे , क्योंकि पंकज त्रिपाठी के माता पिता हमेशा से ही उन्हें बड़ा डॉक्टर बनाने का सपना देखते थे , इसी सोच के साथ पंकज ने भी अपने जीवन को आगे के पथ पर बढ़ाया था लेकिन उनकी किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था |


पंकज त्रिपाठी के माता-पिता किसान हैं , और पंकज ने अपने एक इंटरव्यू में बताया की "मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था कि मुझे एक्टर बनना है, न ही कोई प्लानिंग थी, न ही आसपास कोई इंस्पीरेशन. उस वक़्त न टीवी सेट थे और न ही सिनेमा हॉल मौजूद थे कि फिल्मों का प्रभाव हो मैं पढ़ाई करने के लिए पटना आया था. मां-बाप ने भेजा था कि डॉक्टर बनाना है. पटना आकर मैं एक छात्र संगठन से जुड़ गया. छात्र आंदोलनों में भाग लेने लगा"|


पंकज त्रिपाठी को अपनी आगे की पढाई पूरी करने के लिए उनके माता पिता ने उन्हें पटना भेज दिया था , जहाँ पंकज त्रिपाठी ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और पटना के होटल मौर्य में दो साल तक एक बावर्ची के रूप में काम किया , यही वजह हैं की पंकज त्रिपाठी के गुणों में एक घुन यह भी शामिल हैं की वह बहुत अच्छा और लज़ीज़ खाना बनाना भी जानते हैं |


(courtesy-mumbaimirror)



जब पंकज त्रिपाठी मुंबई आये तो वर्ष 2004 से 2010 तक, उन्होंने टेलीविज़न में कई छोटी भूमिकाएं और टाटा टी का एक विज्ञापन किया , उसके बाद पंकज त्रिपाठी बॉलीवुड के करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में अभिषेक बच्चन और भूमिका चावला स्टारर फिल्म रन से की थी, जिसमें पंकज त्रिपाठी ने एक चोर की भूमिका निभाई थी , साल 2010 में, उन्होंने स्टार प्लस पर प्रसारित “गुलाल” नामक एक टीवी शो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और ठीक उसी दौरान पंकज त्रिपाठी ने फिल्म "गैंग्स ऑफ वासेपुर " के लिए ऑडिशन दिया था , और उनके "सुलतान " के रोल के लिए चुनन लिया गया और फिर क्या था मानो फिल्म "गैंग्स ऑफ वासेपुर " के सुलतान नाम के character ने स्क्रीन पर धमाल मचा दिया जिसके लिए पंकज त्रिपाठी को ना केवल दर्शको की बल्कि फ़िल्मी दुनिया के सभी लोगो की सरहाना मिली |  




गैंग्स ऑफ़ वासेपुर की सफलता के बाद पंकज त्रिपाठी को कई नए फिल्म निर्माताओं से प्रस्ताव मिलने लगे , और उसके बाद कई सारी फिल्मो में उन्होंने खलनायक का किरदार भी निभाया हैं , पंकज त्रिपाठी ने हमेशा से बॉलीवुड में किसी ना किसी फिल्म में छोटे-छोटे किरदारों को निभाया , लेकिन उनके काम को सफलता की नयी पहचान उनकी फिल्म ‘न्यूटन’ के बाद मिली , जिसके लिए पंकज त्रिपाठी को अतुल्नीय सरहान मिली , फिल्म में अभिनय के लिए पंकज को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला | 


पंकज त्रिपाठी ने फुकरे, मांझी, द माऊंटेन मैन, और मसान, जैसी फिल्मों में बेहतरीन अदाकारी से आलोचकों और दर्शकों से काफी सराहना भी बटोरी हैं | पंजक ने हमेशा से सिनेमा को एक आर्ट कहा है उनका मानना है की सिनेमा कभी भी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं हैं |


पंकज त्रिपाठी के पूरे बॉलीवुड करियर में पहली बार "THE MAN" के MAGAZINE के फ्रंट कवर पर अपना दमदार लुक दिखाते हुए नज़र आये , साल 2018 उनके अभिनय करियर और उनके लिए बेहद ही ख़ास रहा हैं | क्योंकि इस साल आयी उनकी फिल्म "स्त्री " के लिए पंकज त्रिपाठी को सर्वश्रेष्ठ सहायक का स्क्रीन अवार्ड भी मिला |


(courtesy-aajtak)


इतना ही नहीं बल्कि अमेजन प्राइम की वेब सीरीज "मिर्जापुर" में पंकज त्रिपाठी द्वारा निभाए जा रहे character कालीन भैया का असर दर्शको पर कुछ ज्यादा छाने लगा है | इस सीरीज की कहानी है की मिर्जापुर शहर में सिर्फ कालीन भैया का राज है, कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी जो कारपेट के व्यवसायी, पर वो मिर्जापुर से पूर्वांचल के अपराध जगत को कंट्रोल करते हैं |   


अगर मिर्जापुर में देखें तो पंकज का किरदार आख़िरी एपिसोड के उस सीन में अदायगी के लिहाज से बहुत ऊंचाई पर नजर आता है, जहां वो पुलिस अफसर मौर्या के साथ संवाद करते हैं| इस बात से साबित होता हैं की पंकज त्रिपाठी एक ऐसी शक्शियत है जिनके किरदार को लिखते वक़्त कई बार सोचा जाता होगा क्योंकि वह अपने हर किरदार में जान दाल देते हैं और पूरे दिल से अपने अभिनय को निभाते हैं |


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