Updated on09/16/18
जैसा कि सभी जानते हैं, कि सूर्य देव ऐसे भगवान हैं, जिन्हे पिता का नाम दिया जाता है | अर्थात जिस तरह एक परिवार में सबसे महत्वूर्ण पिता का स्थान होता है, उसी प्रकार ब्रह्माण्ड में सूर्य ग्रह को और भगवान की गिनती में सूर्य को सबसे बड़ा और अहम् स्थान प्राप्त है |
ब्रह्माण्ड में सिर्फ सूर्य और चंद्र देव ही हैं, जिनका दर्शन मिलना संभव होता है | चंद्र देव तो फिर भी 15 दिन के अंतर में दिखाई देते हैं, परन्तु सूर्य देव हमेशा आकाश में चमकते रहते हैं | हर सुबह सूर्य देव का दर्शन मात्रा इंसान के मन को खुश और पवित्र करता है |
सूर्य की उत्पत्ति :-
प्राचीन काल से यह माना जाता है, कि पूरी धरती में शुरू से सिर्फ अंधेरा था, तब भगवान भगवान विष्णु के नाभिकमल से उत्पन्न भगवान ब्रह्मा ने अपने मुख से सबसे पहला शब्द जो लिया वह ॐ था | मान्यता के अनुसार ॐ शब्द के उच्चारण में एक तेज उत्पन्न हो गया | जिस तेज ने धरती के अँधेरे को एक रोशनी प्रदान की | यह रोशनी इतनी तेज थी कि इसने अंधकार को चीर कर उजाला किया | कहा जाता है, ॐ शब्द सूर्य देव का छोटा स्वरूप था।
जैसा कि ब्रह्मा जी के चार मुख हैं, तो उनके चार मुखों से 4 वेदों की उत्पत्ति हुई | जिसमें कई बार ॐ शब्द का उच्चारण था | जिसके उच्चारण से पूरी धरती में उजाला हो गया | धरती में तेज इतना बढ़ गया, कि उजालें से धरती जलने लगी | तो ब्रह्मा जी की प्रार्थना से ही सूर्य देव ने अपने महातेज को समेत कर एक अकार में विद्द्मान कर लिए | जिससे सूर्य देव की उत्पत्ति हुई |
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