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digital marketer | पोस्ट किया | ज्योतिष


देवी के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कौन से हैं जिनका नवरात्रि में दर्शन करना शुभ माना गया है


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साल की शुरुआत से लेकर अंत तक कई सारे पर्व हैं जिनका अपना ही एक नियम और महत्व होता है । नवरात्री का पर्व के नौ दिनों में माता का पूजन बड़ी ही धूम धाम होता है । अगर नवरात्रि आप माता के शक्तिपीठ के दर्शन करें तो आपको जीवन में सुख समृद्धि मिलती है । आइये माता के शक्तिपीठ के बारें में जानते हैं ।


माता के मुख्य शक्तिपीठ :- 

1 - सुनंदा देवी :-
यहाँ माता सती की नाक गिरी थी । यह शक्तिपीठ बंगला देश में शिकारपुर नामक गांव में सुनंदा नदी के किनारे स्थित है।

2 - विशालाक्षी देवी :- 
यहाँ माता सती के कान के कुंडल गिरे थे । यह बनारस के मणिकर्णिका घाट के पास स्थित है।

Letsdiskuss(IMAGE _ hindi.webdunia.com )

3 - उमाशक्ति देवी :- 
इस शक्तिपीठ की स्थापना माता के केश से हुई । यह मथुरा – वृंदावन रोड पर वृंदावन से डेढ मील की दूरी पर स्थित है।

4 - महिषमर्दिनी देवी :- 
यहाँ पर माता के नेत्र गिरे थे और यह मध्यप्रदेश में कोल्हापुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित है।

5 - विश्व मातृका देवी :- 
इस जगह माता का बायां गाल गिरा था । यह आंध्रप्रदेश के गोदावरी स्टेशन के पास कुष्षूर नामक स्थान पर बसी गोदावरी नदी के किनारे स्थित है।

6 - नारायणी देवी :- 
इस शक्तिपीठ की स्थापना माता के दांत गिरने से हुई । यह शक्तिपीठ कन्याकुमारी के पास शुचीद्रम नाम के शिव मंदिर में स्थित है।

7 - ज्वालामुखी देवी :- 
इस स्थान पर देवी सती की जीभ गिरी थी । यह पंजाब के ज्वालामुखी नामक स्थान पर स्थित है।

8 - अवन्ती देवी :- 
यहाँ पर देवी सती का होंठ गिरा था। यह उज्जैन की शिप्रा नदी के किनारे पर स्थित भैरव पर्वत पर स्थित है।




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  • नैना देवी मंदिर
  • अम्बाजी मंदिर मां का सिद्धपीठ
  • ज्वाला देवी
  • सप्तश्रृंगी देवी
  • काली मंदिर कोलकत्ता 




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DIGITAL MARKETING EXECUTIVE | पोस्ट किया


नैनीताल में, नैनी झील के उत्त्तरी किनारे पर नैना देवी मंदिर स्थित है। 1880 में भूस्‍खलन से यह मंदिर नष्‍ट हो गया था। बाद में इसे दुबारा बनाया गया। यहां सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है। मंदिर में दो नेत्र हैं जो नैना देवी को दर्शाते हैं। नैनी झील के बारें में माना जाता है कि जब शिव सती की मृत देह को लेकर कैलाश पर्वत जा रहे थे, तब जहां-जहां उनके शरीर के अंग गिरे वहां-वहां शक्तिपीठों की स्‍थापना हुई। नैनी झील के स्‍थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। इसीसे प्रेरित होकर इस मंदिर की स्‍थापना की गई है।


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