ऐसी बहुत सारी जगह है। जहां पर लोग के होते हुए भी इंसान खुद को अकेला समझता है। जैसे स्टेशन बस अड्डा पार्क वाली जगह। आसपास लोग होते हैं फिर भी वह अपने आप को अकेला महसूस करता है। ऐसा इंसान जब किसी भीड़ भाड़ वाले स्थान पर होता है और उसे मदद की जरूरत होती है लेकिन कोई मदद नहीं करता है तो उसे लगता है कि वह अकेला है। इसी तरह से जब वह किसी ऐसी जगह पर होता जहां ढेर सारे लोग तो हैं लेकिन यह सारे लोग अपरिचित हैं उनसे वह अपनी मन की बात नहीं कह सकता है इसलिए वह स्वयं को उस समय अकेला समझता है। इसके उलट इंसान अगर कमरे में बैठा हो और अपने में खोया हुआ है तो भी वह अपने आप को अकेला नहीं समझता है क्योंकि वह अपने से सोच रहा है अपने बारे में समझ रहा है। जब इंसान एग्जामिनेशन हॉल में होता है तभी वह खुद को अकेला महसूस करता है। लेकिन कुछ ऐसी जगह भी है जहां पर इंसान अकेले होते हुए भी अकेला महसूस नहीं करता है जैसे उसकी मनपसंद जगह हो।

असल में इंसान अकेला इसलिए महसूस करता है क्योंकि वह और लोगों से जुड़ना नहीं चाहता है यदि आसपास के लोगों से वह बात करें तो उसे अकेलापन महसूस नहीं होता है इसलिए कह सकते हैं कि भीड़भाड़ वाले स्थान पर वह अपने मन मुताबिक परिस्थितियों के कारण ही खुद को अकेला महसूस करता है जबकि उसे मालूम है कि आसपास इंसान ही है।