Updated on May 30, 2026news-current-topics

एयर इंडिया की बिक्री का कारण क्या है,क्या एयर इंडिया का सरकार पर करोड़ो बकाया है ?

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Updated on May 27, 2026

एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन की तैयारी पूरी हो चुकी है | एयर इंडिया को निजी हाथों में सौंपने के लिए इसे 4 भागों में बांटा गया है- एआई-एआई एक्सप्रेस-एआई सैट्स, ग्राउंड हैंडलिंग यूनिट, इंजीनियरिंग यूनिट और अलायंस एयर और सभी को अलग-अलग बेचा जाएगा | इंडिगो एयरलाइंस और एक विदेशी एयरलाइंस एयर इंडिया को खरीदने की होड़ में सबसे आगे हैं | विदेशी एयरलाइंस का नाम अभी सामने नहीं आया है |

इंडिगो ने एयर इंडिया के विदेशी सेवाओं एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को खरीदने में रुचि दिखाई है | अगर इसमें बिजनेस के दृष्टिकोण से कोई फायदा दिखा तो टाटा संस-सिंगापुर एयरलाइंस जेवी विस्तारा भी एयर इंडिया को खरीद सकती है | जिस विदेशी एयरलाइन कंपनी ने एयर इंडिया को खरीदने में रुचि दिखाई है उसने सरकार से कहा है कि वो एयर इंडिया में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छुक है |

एक सरकारी सूत्र ने बताया कि जिस विदेशी कंपनी ने विनिवेश नियमों के अनुसार सरकार के पास 49 फीसदी हिस्सा खरीदने की इच्छा जताई है वो कोई जानी-मानी एयरलाइन कंपनी नहीं है और इस कंपनी को हिस्सेदारी बेचा जाए या नहीं इसपर अभी नजरिया साफ नहीं है |

इसके अलावा जेट एयरवेज की निगाहें भी एयर इंडिया की लगने वाली बोली पर लगी है | जबकि कतर एयरवेज ने भी हाल में भारत में बिजनेस शुरू करने की इच्छा जाहिर की थी | इस वजह से हो सकता है कि एयर इंडिया के खरीदारों की दौड़ में कतर एयरवेज भी शामिल हो | सरकार ने जून के आखिर में एयर इंडिया की बिक्री शुरू करने की योजना बनाई है और दिसंबर के आखिर तक इसकी प्रक्रिया पूरी कर लेने की उम्मीद है |

टाइम्स इंडिया में छपी खबर के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एयर इंडिया को 4 भागों में बेचा जाएगा और सबसे पहले मुख्य एयरलाइंस को बेचा जाएगा | इसके लिए आवश्यक दस्तावेज कुछ हफ्तों में जारी कर दिए जाएंगे | इसके बाद अन्य हिस्सों की बोली के लिए भी दस्तावेजों को जारी कर दिया जाएगा | एयर इंडिया के ऊपर अभी 70,000 करोड़ रुपए का बकाया है |

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ABOUT THE AUTHORBrijesh Mishra

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Answered on May 14, 2026

एयर इंडिया को बेचने का सबसे बड़ा कारण उसका लगातार बढ़ता घाटा और भारी कर्ज था। कई सालों तक कंपनी को नुकसान हो रहा था और सरकार को बार-बार उसमें हजारों करोड़ रुपये डालने पड़ रहे थे। 2007 में Indian Airlines के merger के बाद financial problems और बढ़ गईं। Reports के अनुसार Air India पर लगभग ₹61,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज और liabilities हो चुकी थीं। Tata Group ने Air India खरीदते समय लगभग ₹15,300 करोड़ का debt अपने ऊपर लिया, जबकि बाकी बड़ी राशि सरकार ने special company (AIAHL) में transfer की।

हाँ, सरकार को Air India के fuel dues, loans और operational liabilities जैसी बड़ी रकम भी settle करनी पड़ी थी। आखिरकार लगातार नुकसान और debt burden की वजह से सरकार ने Air India को Tata Group को बेच दिया।

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