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Medha singh kapoor· 8 साल पहले
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तुलसी कब तोड़ना वर्जित है ?

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ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया10/17/26

पहले एक बात साफ़ कर दूँ: ये सारे नियम धार्मिक मान्यताएँ हैं। अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में इनमें थोड़ा फ़र्क़ भी मिलता है। मैंने जो स्रोत देखे, वे ज़्यादातर हिंदी समाचार पोर्टलों के धर्म वाले पन्ने हैं, मूल शास्त्र नहीं। इसलिए इन्हें परंपरा की जानकारी समझिए, पक्का शास्त्रीय प्रमाण नहीं।

किन मौक़ों पर तुलसी तोड़ना मना माना जाता है

1. एकादशी और रविवार
मान्यता है कि एकादशी, रविवार, चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसका कारण यह बताया जाता है कि माँ तुलसी एकादशी के दिन निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन उन्हें जल देना और पत्ते तोड़ना ठीक नहीं माना जाता। रविवार के लिए भी यही कहा जाता है। हालाँकि एक स्रोत के अनुसार रविवार को आप तुलसी पर फूल चढ़ा सकते हैं। यानी पूरी तरह मनाही है या सिर्फ़ जल और पत्ते की, इस पर मतभेद है।

2. ग्रहण काल
सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय तुलसी को जल चढ़ाना, पत्ते तोड़ना या पूजा करना वर्जित माना गया है। ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देना शुभ माना गया है।

3. सूर्यास्त के बाद, यानी शाम और रात
सूर्यास्त के बाद तुलसी को न छूने और पत्ते न तोड़ने की मान्यता है। कुछ लोग मानते हैं कि इससे घर में दुर्भाग्य आता है।

4. द्वादशी और अमावस्या
कुछ स्रोत द्वादशी तिथि पर पत्ते तोड़ना भी वर्जित बताते हैं, और अमावस्या पर तुलसी को जल देने की मनाही का ज़िक्र करते हैं। इन दोनों को लेकर सभी परंपराएँ एकमत नहीं हैं।

5. बिना नहाए या गंदे हाथों से
बिना स्नान किए तुलसी को छूना या पत्ते तोड़ना, और जूठे हाथों से तोड़ना ठीक नहीं माना गया है।

अगर पूजा के लिए पत्ते चाहिए हों तो?

इसका आसान हल सब बताते हैं: पत्ते पहले ही, यानी वर्जित दिन या तिथि आने से पहले तोड़कर रख लें। साथ ही बिना ज़रूरत बार-बार पत्ते न तोड़ें, उतने ही लें जितने चाहिए, और पौधे को नुकसान न पहुँचे इसका ध्यान रखें। यह आख़िरी सलाह पौधे की सेहत के हिसाब से भी समझदारी भरी है।

मेरी ईमानदार राय

  • "दुर्भाग्य" या "पाप" वाली बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ये आस्था से जुड़ी बातें हैं। जो लोग श्रद्धा से मानते हैं, उनके लिए ये नियम मायने रखते हैं, पर इन्हें तथ्य की तरह नहीं पढ़ाया जा सकता।

  • एक व्यावहारिक तर्क (यह मेरा अनुमान है, किसी स्रोत में नहीं मिला): रात में पौधे को बार-बार छेड़ने से बचना, और बिना ज़रूरत पत्ते न तोड़ना, दोनों पौधे के लिए अच्छे हैं।

  • अलग-अलग घरों की परंपरा अलग हो सकती है। अगर आपके परिवार में कोई ख़ास नियम चलता है, तो उसे ही मानना ठीक रहेगा।

सार

आम तौर पर जिन मौक़ों पर मनाही बताई जाती है, वे हैं एकादशी, रविवार, ग्रहण, सूर्यास्त के बाद, और कुछ जगह द्वादशी या अमावस्या। अगर पूजा के लिए पत्ते चाहिए, तो एक दिन पहले तोड़ लीजिए।

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जवाब दिया गया04/02/23

सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते न तोड़ें, क्योकि सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते तोड़ने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।
तुलसी का पौधा पूजनीय माना जाता है, इसलिए तुलसी की पत्तियां तोड़ना वर्जित है,शास्त्रों के मुताबिक बताया गया है कि रविवार के दिन तुलसी तोडना वर्जित है क्योकि रविवार के दिन तुलसी का पत्ता तोडना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा एकादशी के दिन भी तुलसी के पत्ते तोडना वर्जित है क्योंकि यदि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ते है तो आपको पूजा का फल प्राप्त नहीं होगा।लेख की तस्वीर

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जवाब दिया गया06/14/22

जैसे कि आप सभी जानते हैं हमारे हिंदू धर्म में तुलसी का एक विशेष स्थान है और उसका महत्व भी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमें किस दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। रविवार के दिन और बुधवार के दिन तुलसी के पत्ते को तोड़ना वर्जित माना जाता है और एकादशी के दिन भी तुलसी के पत्ते को नहीं तोड़ा जाता है ऐसी मान्यता है कि यदि आप इन दिनों में तुलसी के पत्तों को तोड़ते हैं तो आपको पूजा करने का फल प्राप्त नहीं होगा और घर में दुर्भाग्य आता है। इसलिए इन दिनों तुलसी के पत्ते को तोड़ना सख्त मना किया गया है।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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अपडेट किया गया06/01/26

बहुत अच्छा सवाल हैं आपका ,जैसा की सभी जानते हैं की तुलसी का पौधा विज्ञान और वास्तु दोनों के आधार पर बहुत मह्त्वपूर्ण स्थान रखता हैं | शाश्त्रो के अनुसार तुलसी को रविवार और बुधवार के दिन नहीं तोड़ना चाहिए | तुलसी का पौधा भारत में हिन्दू धर्म में पूजनीय हैं,और साथ साथ तुलसी को औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता हैं |

तुलसी का पौधा रविवार को और बुधवार को तोड़ना वर्जित माना गया हैं परन्तु तुलसी को एकादशी जिसको ग्यारस भी कहते हैं ,उस दिन भी नहीं तोड़ना चाहिए | तुलसी के बारे में एक महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स में कहा गया हैं की "शिवलिंग और गणेश जी की प्रतिमा के सामने या ऊपर कभी भी तुलसी के पौधे की पत्ती नहीं चढ़ानी चाहिए और ऐसा करना हिन्दू धर्म के अनुसार वर्जित हैं "
 
तुलसी को भगवान विष्णु जी ने स्थान दिया था कि "तुम किसी भी घर में स्थाई रूप से अंदर नहीं रहोगी,परन्तु घर के आँगन में तुम्हारा वास होगा और मेरी पूजा तुम्हारे बिना अधूरी मानी जाएगी " भगवान् के भोग में बिना तुलसी डाले उनका भोग पूरा नहीं होता | हिन्दू धर्म में तुलसी का बहुत महत्व हैं |
 
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