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Rinki Singh· 8 years ago
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हर मंत्र के उच्चारण के पहले ॐ शब्द का उच्चारण जरुरी क्यों होता है ?

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Updated on06/05/26

Om को हिंदू धर्म और कई भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में अत्यंत पवित्र ध्वनि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार “ॐ” ब्रह्मांडीय ऊर्जा, सृष्टि और परम चेतना का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण कई मंत्रों के पहले इसका उच्चारण किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि “ॐ” का उच्चारण मन को शांत करने, ध्यान केंद्रित करने और आध्यात्मिक वातावरण बनाने में मदद करता है। कई लोग इसे मंत्र की शुरुआत में एक शुभ और शक्तिशाली ध्वनि मानते हैं।

योग और ध्यान practices में भी “ॐ” chanting को breathing, vibration और mental focus से जोड़ा जाता है। हालांकि अलग-अलग परंपराओं और मंत्रों में इसके उपयोग के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए हर मंत्र में “ॐ” का उपयोग अनिवार्य हो, ऐसा सभी परंपराएँ नहीं मानतीं।

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Answered on04/12/18
हिन्दू धर्म के वेदो हिन्दू धर्म के वेदोके अनुसार ॐ शब्द खुद में ही इतना शक्तिशाली है कि इसके उच्चारण मात्रा से ही हमारे आस-पास का वातावरण सकारात्मक हो जाता है | ॐ शब्द के उच्चारण से ही समस्त दुखो और कष्टो का विनाश होता है तथा हर कामना की प्रतिपूर्ति हो जाती है | ॐ अक्षर के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नही मानी जाती, हमने अक्सर धार्मिक जगह में हो रही कथाओ, पाठो और अन्य पूजा आरतियों में ॐ का उच्चारण अवश्य ही सुना होगा |
वेदो के अनुसार कहा जाता है बिना ॐ उच्चारण के सृष्टि की कल्पना भी नही की जा सकती व सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदा ओम की ध्वनि निकलती है | ओम तीन अक्षरो अ, उ तथा म से मिलकर बना है,जिनमे अ का अर्थ होता है उत्तपन होना, उ का अर्थ है उठना अर्थात विकास होना तथा म का अर्थ है मौन धारण करना यानी ब्रह्मलीन हो जाना |
ॐ का उच्चारण हर मंत्र के पहले होता है | बिना ॐ के कोई मंत्र पूरा नहीं होता | मंत्र हमेशा हमारे जीवन में एक सकारात्मक वातावरण बना कर रखता है | जैसे बिना मंत्र पूजन अधूरा होता है वैसे ही बिना ॐ के उच्चारण के हर मंत्र अधूरा होता है |
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