पाकिस्तान के साथ भारत का नाता उस के बनने से लेकर अब तक कुछ ख़ास अच्छा नहीं रहा है। पाकिस्तान को आज़ादी के दिनों से भारत के कश्मीर मामले में टांग अडानेकी आदत लगी हुई है। दो बार जंग में मुंह की खाने के बाद भी इस देश के रवैये में कोई तबदीली नहीं आई है। हालांकि अभी का मामला बिलकुल अलग है। अन्य देशो के साथ उस के ख़राब सम्बन्ध और आर्थिक हालात खस्ता होने की वजह से अब उस ने भारत के साथ बातचीत की पेशकश की है पर जहाँ बात की कोई गुंजाइश ही नहीं है वहां क्या बात करना। मोदीजी यह बात अच्छे से जानते है और इसीलिए पाकिस्तान की इस पेशकश का कोई प्रत्युत्तर नहीं दे रहे।
सौजन्य: जागरण
जब तक पाकिस्तान कश्मीर के मामले से अपने आप को अलग नहीं करता उस के साथ बात करने का कोई मतलब नहीं है। भारतीय राजनेता अब पाकिस्तान की बातचीत की चाल को अच्छे से समाज चुके है क्यूंकि शिमला समझौता और कारगिल में हुए धोखो को भारत अभी तक भुला नहीं है। इस हाल में मोदीजी पाकिस्तान से कोई बात करेंगे यह मानना बिलकुल बेबुनियाद है। मोदीजी एक अच्छे राजनेता है और जनता की आवाज को समझते हुए वो पाकिस्तान से बिलकुल बात नहीं करेंगे।

