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ज़िंदगी का कमजोर पल......

ज़िंदगी है,न चलना किसी का सहारा लेकर,थम जाएगी ज़िंदगी खुद ही सही किनारा देख कर... जब भी वक़्त मिले तो पूछ लेना खुद से,वो कौन सा कमजोर पल होता है.... जब चली जाती है ज़िंदगी,हमें बेसहारा छोड़ कर...............

Kanchan Sharma

@ Content Writer | पोस्ट किया 04 Oct, 2018 | अन्य

Posted By: Kanchan Sharma ( पोस्ट किया 04 Oct, 2018)

मुझे suicide का बहुत ख्याल आता है, में क्या करूं ?


आत्महत्या एक ऐसा शब्द है, जो अपने आप में किसी आतंक से कम नहीं है | इंसान की तकलीफ और उसका दुःख एक इसी शब्द में सिमट कर रह जाता है | अगर आपका कोई अपना इस शब्द का प्रयोग करें, तो आपको जितना दुःख होता …

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Ghanshyam Sonwani

सुंदर 


Sweety Sharma

बहुत ही सुन्दर जवाब है आपका