दोस्तों ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर बहुत ही लंबे समय से विवाद चलता आ रहा है। अभी यह ज्ञानवापी मस्जिद का मामला काफी चर्चे में है क्योंकि अब इस मामले पर सुनवाई होने वाली है। जानकारी के अनुसार पुरातत्वो के द्वारा सर्वेक्षण कार्य को पूरा कर लिया गया है। मामला यह है कि हिंदू पक्ष का आरोप है की काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित एक और मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर ज्ञानवापी मस्जिद को बनाया गया है। किंतु मुस्लिम पक्ष इस बात से साफ इंकार करती है इसीलिए 21 जुलाई को वाराणसी जिला कोर्ट ने सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। जिसमें खुदाई करने की बात कही गई थी तथा खुदाई करके यह पता लगाने के लिए कहा गया था कि क्या वाकई में काशी विश्वनाथ के बगल में स्थित एक और मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर ज्ञानवापी मस्जिद को बनाया गया है। ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर इलाहाबाद कोर्ट, वाराणसी कोर्ट समेत हाई कोर्ट तक याचिका दायर की गई है।
1991 में सबसे पहली याचिका काशी विश्वनाथ मंदिर के पुरोहितों द्वारा जारी की गई थी। इसमें कहा गया था कि 1669 ईस्वी में ज्ञानवापी में स्थित मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाया गया था और मस्जिद में मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया है इसलिए ज्ञानवापी मस्जिद की जमीन हिंदू समुदाय को मिलनी चाहिए। हालांकि इस ज्ञानवापी मस्जिद का आर्किटेक्चर भी बहुत अलग ढंग से किया गया है। ध्यान से देखने पर मस्जिद के गुंबद के ठीक नीचे मंदिर जैसी दीवार नजर आती है। यहां तक की मस्जिद के खंभे भी मंदिर शैली पर बनाए गए है। यही कारण है कि हिंदू पक्ष बार-बार आरोप लगाता रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद मंदिर के अवशेषों पर बना हुआ है। इतना ही नहीं बल्कि ज्ञानवापी मस्जिद के दीवारों पर ऊँ, श्री स्वस्तिक तथा त्रिशूल आदि के निशान भी बने हुए हैं और नमाज पढ़ने की जगह पर ऊँ भी लिखे हुए हैं तथा मस्जिद के स्तंभ अष्ट कोण में बने हुए हैं जो कि केवल मंदिरों में होते है। मस्जिद के बाहर एक नदी मस्जिद की ओर मुंह किए हुए हैं जिसका साफ मतलब है कि वहां पर शिवलिंग स्थापित था जिसे तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद को बनाया गया है तथा मस्जिद में एक शृंगार गौरी मंदिर भी स्थित है। हाल ही में किए वैज्ञानिकों द्वारा किए गए सर्वेक्षण में या खुलासा हुआ है की मस्जिद के तहखाना में शिवलिंग भी है।
ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर के मध्य एक 10 फीट का गहरा कुआं मौजूद है। जिस कुएं का नाम ज्ञानवापी है। यहां ज्ञान का अर्थ बोध होना और वापी का अर्थ जल है। कहा जाता है कि इस कुएं के जल पीने से ज्ञान का बोध होता है तथा इस कुएं को शंकर भगवान ने अपने त्रिशूल से खोद कर बनाया था। यहीं पर भगवान शंकर ने पार्वती जी को ज्ञान दिया था तथा पहले इसी ज्ञानवापी के कुएं से जल लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर के शिवलिंग पर चढ़ाया जाता था। ज्ञानवापी कुएं के नाम पर ही मस्जिद का नाम ज्ञानवापी मस्जिद पड़ा है।
मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर में केवल नवरात्रि की चतुर्थी को पूजा होती आई है लेकिन अब मांग यह है कि वहां रोज पूजा करने की इजाजत दी जाए। सर्वेक्षण के दौरान मस्जिद के गर्भ गृह में शिवलिंग मिलने की बात सामने आने पर मस्जिद के वजूखाने को बंद कर दिया गया था। लेकिन कोर्ट द्वारा मस्जिद में नमाज जारी रखने पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी।
मंदिर के होने के मिले साक्ष्य पर डॉक्टर आचार्य का कहना है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से देखा जाए तो विवादित जमीन पर मंदिर के होने के साक्ष्य मिलते हैं। किंतु अंत फैसला न्यायालय का ही होगा तथा दोनों धर्म को उसे फैसले पर सहमति दिखानी होगी। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का भी यह कहना है कि हमें हर मामले में कोर्ट की ही बात सुनाई चाहिए। शिवलिंग तो पूरी दुनिया मे मौजूद है तो इसका मतलब यह नहीं की हर जगह हिंदू धर्म का कब्जा होगा इसीलिए हमें किसी भी बात का मुद्दा नहीं बनना चाहिए और ज्ञानवापी मस्जिद के मामले पर कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए और उनके फैसले के साथ अपनी सहमति दिखानी चाहिए।
निष्कर्ष- अंत में यह कहा जा सकता है कि ज्ञानवापी मस्जिद का सीधा मामला यह है कि हिंदू पक्ष का मानना है कि ज्ञानवापी मस्जिद के जगह पर पहले मंदिर हुआ करता था जिसे तोड़कर मंदिर के अवशेषों पर मस्जिद को खड़ा किया गया है। वही मुस्लिम पक्ष इस बात से सीधे इंकार करती है तथा मस्जिद में मिले साक्ष्यप भी वहां मंदिर होने की बात का प्रमाण करते हैं। कोर्ट की तरफ से ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर सर्वे करने का आदेश दिया गया है जिसमें साफ कहा गया है की जरूरत पड़ने पर खुदाई की जाए। सर्वेक्षण के अनुसार ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाना में शिवलिंग जैसी कोई आकृति होने की बात सामने आई है जिसके बाद से मस्जिद के वजूखाने को बंद कर दिया गया है। हालांकि अभी ज्ञानवापी मस्जिद में नमाज जारी है और आखिरी फैसला अदालत द्वारा अब भी नहीं सुनाया गया है।






