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Apr 11, 2026others

सभी 12 देसी महीनों के नाम और उनका महत्व क्या-क्या है?

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@meenakushwaha8364Mar 7, 2026

किसी व्यक्ति से पूछा जाएं कि कौन सा महीना है, तो वह व्यक्ति तुरंत जवाब देता है कि फ़रवरी या मार्च का महीना चल रहा है। साथ ही यदि हम बच्चों को महीने के नाम इंग्लिश मे ही याद करवाते है जैसे कि मार्च, अप्रैल, मई, जून इसी तरह 12 महीनो के नाम याद कराते हैं।  लेकिन यदि हमारे बच्चों या हमसे महीने के नाम हिंदी मे पूछा जाता है तो हम मे से कुछ लोगो क़ो महीने के नाम हिंदी मे पता रहते है और कुछ लोगो क़ो हिंदी मे महीनो के नाम पता नहीं रहते है।

ऐसे में चलिए हम आप सभी लोगो क़ो देशी महीने के नाम हिंदी मे बताएंगे -

फागुन,चैत्र,वैशाख, ज्येठ, आषाढ, सावन,भादप्रद, कार्तिक,अश्विन,मार्गशीर्ष,माघ, पौष आदि।

देशी महीने मे हिंदी मे नाम फागुन है, फागुन क़ो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार फ़रवरी कहते है, फ़रवरी महीने मे कई सारे त्यौहार जैसे -शिवरात्रि, बसंत पंचमी और होली का त्यौहार आता है।

चैत्र के महीने मे नवरात्री आता है, चैत्र के महीने मे किसी भी तारीख क़ो नौवरात्रि नौ दिनों तक चलने वाला मुख्य त्यौहार होता है। नौवरात्रि के नौ दिनों तक हिन्दू धर्म मे महिलाएं, पुरुष व्रत रखते है और माता रानी की पूजा -पाठ करते है।

आषाढ के महीने से मानसून का महीना शुरू होता है,इस महीने से बारिश होने लगती है,आषाढ का महीना अंग्रेजी कैलेडर के अनुसार जून या जुलाई का महीना होता है।

श्रावण या सावन का महीना भगवान शिव जी का महीना होता है, इस महीने मे यदि कोई भी महिला, कुंवारी कन्या 16सोमवार का व्रत रखती है तो उसकी मनोकामना भगवान शिव जी जरूर पूरी करते है।

भाद्रपद क़ो भादो के नाम से जानते है,भादो मे तीजा, गणेश चतुर्थी,रक्षाबंधन, कजलियां आदि त्यौहार आते है।भादो का महीना अगस्त से सितंबर के महीने तक रहता है और इसी बीच त्यौहार भी फसते है।
मार्गशीर्ष महीने क़ो अगहन भी कहते है। अगहन के महीने क़ो अंग्रेजी कैलेडर के अनुसार नवंबर का महीना होता है।नवम्बर के महीने से ठंडी का मौसम शुरू होता है।

पौष का महीना दिसम्बर का महीना होता है, पौष का महीना जनवरी तक चलता है। इस महीने मे किसमिस डे तथा अन्य त्यौहार आते है और जनवरी के महीने मकर संक्रति का त्यौहार भी आता है।

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@komalsolanki9433Mar 29, 2024

देसी महीने कौन से होते है?  यदि किसी ने भी आपसे यह प्रश्न पूछ लिया तो यकीनन आप इसका जवाब नही दे पाएंगे। पता भी होंगे तो आपको एक या दो महीने ही पता होंगे। 

 

लेकिन यदि आपसे कोई पूछ ले महिनो के नाम क्या है? 

तो आप तुरंत जवाब दे देंगे - जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल। 

क्योकि शुरू से हमे यही पढाया और सिखाया गया है। आज भी स्कूलों मे बच्चों को यही अंग्रेजी कैलेंडर के नाम सिखाये जाते है। लेकिन उन्हे हिंदी कैलेंडर का कोई ज्ञान नही होता। वह बड़े होकर भी यह जानना नही चाहेंगे के हिंदू कैलेंडर और उनके महीने क्या है।

अंग्रेज चले गए पर अपने पीछे कई ऐसी चीजे छोड़ गए जिनको बदल पाना अब थोड़ा मुश्किल है। 

हिमानी जी के प्रश्न का जवाब देते हुए मे देसी महिनो को बताउगी -

सबसे पहला महिना चैत्र होता है। इसी महीने से साल की शुरुवात मानी जाती है। लेकिन हम सभी अंग्रेजी कैलेंडर को अपना मानते हुए अंग्रेजो की तरह 1 जनवरी का स्वागत धूम धाम से करते है। 

 

चैत्र आधा महिना ही चलता है फिर आधे महीने के बाद बैसाख का महिना शुरू हो जाता है। बैसाख हिंदू कैलेंडर का दूसरा महिना होता है। इसके बाद ज्येष्ठआषाढ, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और अंतिम महिना फाल्गुन।  हिंदू कैलेंडर मे कोई भी महिना एक साथ नही होता।  चैत्र महिना मार्च के बीच मे शुरू होता है और अप्रैल मे बीच तक चलेगा। फिर आधे महीने के बाद दूसरा  महीना बैसाख शुरू हो जायेगा जो तीसरे महीने यानी ज्येष्ठ के आधे महीने तक चलेगा। 

 

साल का अंतिम महिना फाल्गुन होता है ना की दिसम्बर। 

हिंदू कैलेंडर के देसी महीने भी हमे पता होना चाहिए। 

हमारी दादी नानी या माँ से यदि आज भी पूछा जाए तो वह हमे हिंदू कैलेंडर के हिसाब से ही महीने का नाम बतायेंगी। 

हिंदू अपने धर्म अपनी संस्कृति से बड़ा प्यार करते और उतना ही आदर भी करते है। इसलिए उन्हे इन सभी छोटी छोटी बातो का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है। 

 

 

 

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@krishnapatel8792Mar 7, 2026

आपने बिल्कुल सही कहा कि यदि आज के बच्चों से पूछ लिया जाए की देसी महीना के नाम बताइए तो बच्चे इसका जवाब नहीं दे पाएंगे क्योंकि उन्हें इस चीज की जानकारी स्कूल में भी नहीं दी जाती है अक्सर बच्चों को जनवरी,फरवरी मार्च और अप्रैल बचपन से ही पढ़ाया जाता है इसलिए हमें इसकी जानकारी रहती है। लेकिन दोस्तों इस बात को जानना बेहद जरूरी है कि देसी महीने किसे कहते हैं तो चलिए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं।

 दोस्तों मैं आपको यहां पर हिंदी धर्म के आने वाले सभी महीनो के नाम बताने वाली हूं :-

  • चैत्र महीना पहला महीना कहलाता है।
  •  बैसाखी महीना दूसरा महीना कहलाता है।
  •  ज्येष्ठ महीना तीसरा महीना कहलाता है।
  •  आषाढ़ महीना चौथा महीना कहलाता है।
  •  श्रावण महीना पांचवा महीना कहलाता है।
  •  भाद्रपद महिना छठा महीना कहलाता है।
  •  अश्विनी महीना सातवां महीना कहलाता है।
  •  कार्तिक महीना आठवां महीना कहलाता है।
  •  मार्गशीर्ष नौवां महीना कहलाता है।
  •   पौष महीना दसवां महीना कहलाता है।
  •  माघ का महीना 11 महीना कहलाता है।
  •  और अंतिम यानी की 12 महीना फागुन का महीना कहलाता है।

 दोस्तों मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि चैत्र महीने से हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है। और यदि अंग्रेजी कैलेंडर की बात की जाए तो इसके अनुसार चैत्र माह मार्च के मध्य में शुरू होता है। और इसके बाद अप्रैल के मध्य में खत्म हो जाता है।

चलिए हम आपको अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार बताते हैं कि कौन-कौन से महीने आते हैं:-

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सबसे पहले नंबर पर जनवरी का महीना आता है यहीं से नए साल की शुरुआत होती है। इसके बाद फरवरी,मार्च, अप्रैल, मई जून,जुलाई,अगस्त, सितंबर, अक्टूबर,नवंबर, दिसंबर आते हैं और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार दिसंबर साल का सबसे अंतिम महीना होता है।

 दोस्तों यहां पर मैंने आपको अंग्रेजी महीना के और देसी महीना के नाम बता दिए हैं।

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@kirankushwaha3551Mar 7, 2026

चलिए दोस्तों आज हम आपको सभी देशी महीनों के बारे मे बताते हैं। आजकल के अंग्रेजी के चलते कोई भी महीनों के नाम हिंदी से नही बोलता क्युकी हिंदी मे उन्हें महीनों के नाम शिखाये ही नही गए हैं। एक कारण और हैं जो लोग महीनो के नाम हिंदी में नहीं बोलते हैं वह कारण है कैलेंडर, आजकल कैलेंडर आते हैं और उसमें जनवरी-फरवरी मार्च अप्रैल में जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्टूबर नवंबर दिसंबर इंग्लिश में महीना के नाम दिए होते हैं और हम कैलेंडर के हिसाब से महीना के नाम जानते हैं। जो पहले के लोग उनके जमाने में कैलेंडर नहीं थे तब लोग महीना के नाम  मौसम के अनुसार बोलते थे चलिए हम आपको बताते हैं देसी महीना के नाम क्या हैं।

 सभी देसी महीना के नाम- चैत्र, वैशाख, जेष्ट, आषण,सावन, भादो,कुवार, कार्तिक,माघ पुष,अगहन, फागुन। चैत्र देसी महीना का सबसे पहला महीना होता है और फाल्गुन आखरी महीना है।

देसी महीने में मार्च और अप्रैल को चैत्र कहते हैं। अप्रैल के आधे महीने को और मई के आधे महीने को वैशाख कहते हैं। मई और जून के आधे महीने को जेष्ठ करते हैं। जून और जुलाई के महीने को आषण कहते हैं। जुलाई अगस्त के महीने को सावन कहते हैं। अगस्त और सितंबर के महीने को भादो कहते हैं। सितंबर और अक्टूबर के महीने को कुवार कहते हैं। अक्टूबर और नवंबर के महीने को कार्तिक कहते हैं। नवंबर और दिसंबर के महीने को पूष कहते हैं। दिसंबर और जनवरी के महीने को अगहन कहते हैं। जनवरी और फरवरी के महीने को फाल्गुन कहते हैं। फिर से मार्च और अप्रैल के महीने को चैत्र कहते हैं।

तो दोस्तों आज हमने आपको इस पोस्ट के चाहिए सभी देसी महीना के नाम को बताए हैं आशा है कि आपको देसी महीना के नाम पता चल गए होंगे। अगर आपसे कोई देसी महीना के नाम पूछे तो आप बिल्कुल भी घबराइएगा नहीं और  इन्हीं देसी नहीं महीना के नाम को बताइएगा।

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@rameshkumar7346Mar 7, 2026

भारतीय हिंदू कैलेंडर (विक्रमी संवत) के अनुसार 12 देसी महीनों के नाम चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होते हैं। इन महीनों की शुरुआत आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर के मार्च-अप्रैल महीने से होती है।

सभी 12 महीनों की सूची:

  1. चैत्र (Chaitra): मार्च-अप्रैल (पहला महीना)
  2. वैशाख (Vaisakha): अप्रैल-मई
  3. ज्येष्ठ (Jyaistha): मई-जून
  4. आषाढ़ (Asadha): जून-जुलाई
  5. श्रावण (Sravana): जुलाई-अगस्त (सावन)
  6. भाद्रपद (Bhadrapada): अगस्त-सितंबर (भादो)
  7. आश्विन (Asvina): सितंबर-अक्टूबर
  8. कार्तिक (Kartika): अक्टूबर-नवंबर
  9. मार्गशीर्ष (Margashirsha): नवंबर-दिसंबर
  10. पौष (Pausha): दिसंबर-जनवरी
  11. माघ (Magha): जनवरी-फरवरी
  12. फाल्गुन (Phalguna): फरवरी-मार्च

यह महीने न केवल समय की गणना करते हैं, बल्कि भारत के प्रमुख त्योहारों और मौसम परिवर्तन (ऋतुओं) का भी आधार हैं।

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@vipinyadav4181Apr 11, 2026

हिंदू पंचांग (विक्रम संवत) के अनुसार साल में 12 'देसी' महीने होते हैं। हर महीने का मौसम, त्योहारों और धर्म के हिसाब से अपना एक खास महत्व है। अंग्रेज़ी कैलेंडर के हिसाब से ये महीने लगभग 15-15 दिन आगे-पीछे चलते हैं।

चलिए, मैं आपको इन 12 देसी महीनों के नाम और उनकी खासियत बताता हूँ:

1. चैत्र (मार्च - अप्रैल)

  • महत्व: यह हिंदू नववर्ष (नया साल) का पहला महीना होता है। प्रकृति में नई शुरुआत और वसंत ऋतु का असल आगमन इसी समय होता है। चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा और राम नवमी जैसे बड़े त्योहार इसी महीने आते हैं।

2. वैशाख (अप्रैल - मई)

  • महत्व: यह रबी की फसल (जैसे गेहूं) के पकने और कटने का समय होता है। खेती-किसानी के लिए यह उल्लास का महीना है। सिखों का प्रमुख त्योहार 'बैसाखी', 'अक्षय तृतीया' (आखा तीज) और 'बुद्ध पूर्णिमा' इसी महीने में मनाए जाते हैं।

3. ज्येष्ठ या जेठ (मई - जून)

  • महत्व: यह साल का सबसे गर्म महीना होता है। सूर्य का तेज सबसे ज्यादा होता है। जल के महत्व को बताने वाले त्योहार जैसे 'गंगा दशहरा' और बिना पानी पिए रखा जाने वाला 'निर्जला एकादशी' का कठिन व्रत इसी महीने आता है।

4. आषाढ़ (जून - जुलाई)

  • महत्व: भीषण गर्मी के बाद इसी महीने से बारिश (मानसून) की शुरुआत होती है। 'गुरु पूर्णिमा' और भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा इसी महीने निकलती है। 'देवशयनी एकादशी' भी आषाढ़ में आती है, जिसके बाद से 4 महीने के लिए शुभ काम (जैसे शादी-ब्याह) रुक जाते हैं।

5. श्रावण या सावन (जुलाई - अगस्त)

  • महत्व: यह महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित है और बहुत पवित्र माना जाता है। कांवड़ यात्रा, सोमवार के व्रत, रक्षाबंधन और हरियाली तीज जैसे खूबसूरत त्योहार सावन की फुहारों के बीच ही आते हैं।

6. भाद्रपद या भादों (अगस्त - सितंबर)

  • महत्व: यह महीना भगवान श्री कृष्ण और गणेश जी की पूजा के लिए खास है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और महिलाओं का खास व्रत 'हरतालिका तीज' इसी महीने में धूमधाम से मनाए जाते हैं।

7. आश्विन या क्वार (सितंबर - अक्टूबर)

  • महत्व: इस महीने के पहले 15 दिन 'पितृ पक्ष' (श्राद्ध) के होते हैं, जिसमें पूर्वजों को याद किया जाता है। इसके तुरंत बाद शक्ति की आराधना का पर्व 'शारदीय नवरात्रि' शुरू होती है और फिर बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार 'दशहरा' (विजयादशमी) आता है।

8. कार्तिक (अक्टूबर - नवंबर)

  • महत्व: हिंदू धर्म में कार्तिक को बहुत ही पुण्य और पवित्र महीना माना जाता है। करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली (दीपावली), गोवर्धन पूजा, भैया दूज और छठ पूजा जैसे सबसे बड़े और जगमग त्योहार इसी महीने आते हैं। 'देवउठनी एकादशी' के साथ शादियों का सीज़न फिर से शुरू हो जाता है।

9. मार्गशीर्ष या अगहन (नवंबर - दिसंबर)

  • महत्व: भगवद गीता में भगवान कृष्ण ने इस महीने को अपना ही स्वरूप बताया है ("महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ")। यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इसी महीने में राम-सीता विवाह (विवाह पंचमी) भी मनाया जाता है।

10. पौष या पूस (दिसंबर - जनवरी)

  • महत्व: यह कड़ाके की ठंड का महीना होता है। इस महीने में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। लोहड़ी और मकर संक्रांति (जिस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं) जैसे त्योहार पौष के अंत या माघ की शुरुआत में आते हैं।

11. माघ (जनवरी - फरवरी)

  • महत्व: माघ के महीने में पवित्र नदियों (खासकर गंगा और प्रयागराज संगम) में स्नान और दान करने का बहुत बड़ा महत्व है। विद्या और कला की देवी सरस्वती की पूजा का दिन 'वसंत पंचमी' इसी महीने में आता है।

12. फाल्गुन या फागुन (फरवरी - मार्च)

  • महत्व: यह हिंदू कैलेंडर का आखिरी महीना है। इस महीने में सर्दी खत्म होने लगती है और मौसम बहुत सुहाना हो जाता है। प्यार और रंगों का त्योहार 'होली' और भगवान शिव की सबसे बड़ी रात 'महाशिवरात्रि' इसी फाल्गुन महीने में मनाई जाती है।

इन 12 महीनों की सबसे अच्छी बात यह है कि ये हमारे मौसम चक्र, हमारी खेती और हमारी संस्कृति से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं!

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