देसी महीने कौन से होते है? यदि किसी ने भी आपसे यह प्रश्न पूछ लिया तो यकीनन आप इसका जवाब नही दे पाएंगे। पता भी होंगे तो आपको एक या दो महीने ही पता होंगे।
लेकिन यदि आपसे कोई पूछ ले महिनो के नाम क्या है?
तो आप तुरंत जवाब दे देंगे - जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल।
क्योकि शुरू से हमे यही पढाया और सिखाया गया है। आज भी स्कूलों मे बच्चों को यही अंग्रेजी कैलेंडर के नाम सिखाये जाते है। लेकिन उन्हे हिंदी कैलेंडर का कोई ज्ञान नही होता। वह बड़े होकर भी यह जानना नही चाहेंगे के हिंदू कैलेंडर और उनके महीने क्या है।
अंग्रेज चले गए पर अपने पीछे कई ऐसी चीजे छोड़ गए जिनको बदल पाना अब थोड़ा मुश्किल है।
हिमानी जी के प्रश्न का जवाब देते हुए मे देसी महिनो को बताउगी -
सबसे पहला महिना चैत्र होता है। इसी महीने से साल की शुरुवात मानी जाती है। लेकिन हम सभी अंग्रेजी कैलेंडर को अपना मानते हुए अंग्रेजो की तरह 1 जनवरी का स्वागत धूम धाम से करते है।
चैत्र आधा महिना ही चलता है फिर आधे महीने के बाद बैसाख का महिना शुरू हो जाता है। बैसाख हिंदू कैलेंडर का दूसरा महिना होता है। इसके बाद ज्येष्ठ, आषाढ, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और अंतिम महिना फाल्गुन। हिंदू कैलेंडर मे कोई भी महिना एक साथ नही होता। चैत्र महिना मार्च के बीच मे शुरू होता है और अप्रैल मे बीच तक चलेगा। फिर आधे महीने के बाद दूसरा महीना बैसाख शुरू हो जायेगा जो तीसरे महीने यानी ज्येष्ठ के आधे महीने तक चलेगा।
साल का अंतिम महिना फाल्गुन होता है ना की दिसम्बर।
हिंदू कैलेंडर के देसी महीने भी हमे पता होना चाहिए।
हमारी दादी नानी या माँ से यदि आज भी पूछा जाए तो वह हमे हिंदू कैलेंडर के हिसाब से ही महीने का नाम बतायेंगी।
हिंदू अपने धर्म अपनी संस्कृति से बड़ा प्यार करते और उतना ही आदर भी करते है। इसलिए उन्हे इन सभी छोटी छोटी बातो का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है।
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