पंचायती राज व्यवस्था देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाली शासन प्रणाली है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश के 80 से 90% जनसंख्या हमारे ग्रामीण इलाकों में निवास करती है। जब भी हम ग्रामीण क्षेत्र की बात करते हैं तो ग्राम पंचायत या पंचायत समिति का जिक्र जरूर होता है। भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र विकास कार्यों के सूचारु संचालन के लिए पंचायती सिस्टम के तहत पंचायती राज मंत्रालय बनाया है जो देश भर के पंचायत समिति और जिला परिषद के कार्यों का निर्धारण और संरक्षण करता है।
तो चलिए हम आपको बताते हैं कि पंचायती राज व्यवस्था क्या है।
पंचायती राज व्यवस्था को भारत के संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम,1992 के तहत लागू किया गया है।जैसा कि आप जानते हैं कि पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्रामीण इलाकों के विकास से संबंधित बहुत से कार्य किए जाते हैं। आप सरल भाषा में यह समझ सकते हैं।
देश के ग्रामीण इलाकों कार्य करने वाली ग्रामीण स्थानीय सरकार भारत के केंद्र सरकार की ही शाखा है। पंचायती राज ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्यों को करने वाली एक स्थानीय निकाय है जो लोगों के जनकल्याण से जुड़े कार्यों को करती है।
केंद्र सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था कार्य के आधार पर मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया हुआ है जो निम्न प्रकार के हैं।
- ग्राम पंचायत
- पंचायत समिति
- जिला परिषद।
पंचायती राज व्यवस्था का इतिहास-
देश में अंग्रेजों के शासनकाल के समय में वायसराय रहे लॉर्ड रिपन को भारत में स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था का जनक कहा जाता है। वर्ष 1882 में लार्ड रिपन ने अंग्रेजों महासभा में स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था का प्रस्ताव दिया था।
लेकिन वर्ष 1919 में भारत शासन अधिनियम के तहत देश के सभी प्रांतो में दोहरी शासन व्यवस्था को लागू किया गया है।
इसके बाद जब हमारा देश आजाद हुआ 2 वर्ष 1957 में योजना आयोग के गठन के साथ ही विभिन्न समितियां के सुझावों को तहत समुदायिक विकास और राष्ट्रीय सेवा विस्तार कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।
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