preeti  patel
preeti patel· 4 years ago
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लेखांकन प्रमाप का अर्थ क्या है? इसकी आवश्कता बताइए?

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Answered on11/18/21

लेखांकन प्रमाप का अर्थ - लेखांकन व्यवसायिक भाषा होने के कारण व्यवसाय के वित्तीय परिणामों को वित्तीय विवरणों के माध्यम से विभिन्न पक्षकारों को प्रदान करता है!लेखांकन प्रमाप व्यवहारों एवं घटनाओं को मापन, मान्यता प्रस्तुतीकरण आदि तत्वों से संबंधित विषयों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करता है एवं विभिन्न पक्षकरो को उपयोगी लेखांकन सूचनाएँ उपलब्ध कराता है!

लेखांकन प्रमापों की आवश्यकता - लेखांकन प्रमापों का उद्देश्य विभिन्न व्यवसायिक संस्थाओं द्वारा अपनाई जा रही विविध लेखांकन नीतियों एवं व्यवहारो में एकरूपता व समानता लाना है ताकि लेखांकन के क्षेत्र में विभिन्न मंदों के संबंध में अपनाये जा रहे विविध व्यवहारों को प्रभावित किया जा सके!
1)वित्तीय विवरणों की विश्वसनीयता बढ़ायी जा सके! 2) वित्तीय विवरणों को तुलनीय बनाया जा सके!
3) प्रमापित लेखांकन नीतियों की संरचना की जा सके! 4) विभिन्न मदों के संबंध में मूल्यांकन आधार प्रदान किया जा सके!
5) पूर्ण प्रकटिकरण व लेखांकन में पारदर्शिता लाई जा सके!

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Health & nutrition Specialist
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Answered on03/09/26

लेखांकन प्रमाप (Accounting Standards) का सरल अर्थ उन नियमों, सिद्धांतों और दिशा-निर्देशों के समूह से है, जो वित्तीय विवरणों (Financial Statements) को तैयार करने और उन्हें प्रस्तुत करने के लिए बनाए जाते हैं। ये मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि विभिन्न कंपनियों के खातों में एकरूपता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे। भारत में इन्हें मुख्य रूप से भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) द्वारा जारी किया जाता है।

लेखांकन प्रमाप की आवश्यकता (Importance & Need):

  • एकरूपता और तुलनात्मकता: प्रमाप यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी संस्थाएं समान नियमों का पालन करें। इससे एक कंपनी के वित्तीय परिणामों की तुलना दूसरी कंपनी से या उसी कंपनी के पिछले वर्षों के प्रदर्शन से करना आसान हो जाता है।

  • विश्वसनीयता और पारदर्शिता: जब खाते निर्धारित मानकों के अनुसार बनाए जाते हैं, तो निवेशकों, बैंकों और सरकार का उन पर भरोसा बढ़ता है। इससे वित्तीय धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है।

  • कानूनी अनुपालन: कई बार कानून द्वारा यह अनिवार्य होता है कि कंपनियां विशिष्ट मानकों का पालन करें। इससे कर (Tax) निर्धारण और ऑडिट प्रक्रिया सरल हो जाती है।

  • भ्रम का निवारण: लेखांकन में कई वैकल्पिक तरीके हो सकते हैं (जैसे मूल्यह्रास/Depreciation निकालने के अलग तरीके)। प्रमाप किसी एक श्रेष्ठ तरीके को चुनकर भ्रम को दूर करते हैं।

निष्कर्ष: लेखांकन प्रमाप केवल कागजी नियम नहीं हैं, बल्कि ये किसी भी अर्थव्यवस्था की वित्तीय सेहत को मापने और उसे पारदर्शी बनाने का मुख्य आधार हैं।

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