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shweta rajput· 6 years ago
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नारी को नारायणी क्यों कही जाता है?

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Answered on06/09/22

हमारे भारत देश में प्राचीन काल से ही नारी का स्थान उच्च रहा है। और नारी का सम्मान हमेशा से ही किया जा रहा है। हमारे भारत देश में नारी को नारी तू नारायणी का नाम देकर सम्मान किया जाता है। महाभारत की एक उक्ति आज भी चली आ रही है यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता। नारी के अनेक रूप होते हैं नारी मां भी बनती है, बहन का भी रूप है, स्त्री का भी रूप है, इस तरह नारी के अनेक रूप है। जिस घर में नारी का सम्मान नहीं होता है उस घर में माता लक्ष्मी कभी भी नहीं ठहरती है इसलिए हमेशा नारी का सम्मान करना चाहिए।Article image

Krishna Patel
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Updated on07/08/20
नारी तू नारायणी ?

सनातन धर्म के घोर शत्रु धूर्त सैकुड़र व वामपंथियियों के प्रभाव में आकर जो भी भाई बहन यह कहते हैं कि #वेशभूषा" और "#पहनावे" से कुछ नहीं होता, तो इस पर मेरा कहना है कि वे बहुत भोले हैं और दुष्टों ने उन लोगों का दिमाग भ्रमित कर रखा है।

क्योंकि प्राकृतिक सत्य के अनुसार यह मानवीय स्वभाव है कि चाहे स्त्री हो या पुरूष, एक-दूसरे को जितना बिना "आवरण" के देखेंगे मन में कामुकता का प्रभाव उतना ही बढ़ता जाएगा।

संसार के किसी भी प्राणी को प्रभावित करने के लिए रूप, रस, शब्द, गन्ध, स्पर्श ये बहुत प्रभावशाली कारक हैं, इनके प्रभाव से विस्वामित्र जैसे मुनि के मस्तिष्क में विकार पैदा हो गया था। जबकि उन्होने सिर्फ रूप कारक के दर्शन किये ...... आम मनुष्यों की बिसात कहाँ।

दुर्गा शप्तशती के देव्या कवच में श्लोक 38 में भगवती से इन्हीं कारकों से रक्षा करने की प्रार्थना की गई।
#रसे_रुपे_च_गन्धे_च_शब्दे_स्पर्शे_च_योगिनी।
#सत्त्वं_रजस्तमश्चैव_रक्षेन्नारायणी_सदा।।
रस रूप गंध शब्द स्पर्श इन विषयों का अनुभव करते समय योगिनी देवी रक्षा करें तथा सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण की रक्षा नारायणी देवी करें।

अब बताइए, हम भारतीय हिन्दु महिलाओं को "हिन्दु संस्कार" में रहने को समझाएं तो स्त्रियों की कौन-सी "स्वतंत्रता" छीन रहे हैं? और सनातन समाज को मिलजुल कर सबसे पहले ऐसे स्कूलों को ठोंक पीटकर सही करने की आवश्यकता है जो ये अपने स्कूल के कोमल हृदय बालकों को छोटे कपड़ों की डेस निरधारित करते हैं।

संभालिए अपने आप और समाज को, क्योंकि भारतीय समाज और संस्कृति का आधार नारीशक्ति है और धर्म विरोधी, अधर्मी, चांडाल (बॉलीवुड, वामपंथी, इसे मिशनरी) ये हमारे समाज के आधार को तोड़ने का षड्यंत्र कर रहे हैं ।

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Answered on07/13/20
भारत देश मे प्राचीन समय से ही स्त्री को देवी का स्वरूप माना जाता है जिस घर मे स्त्री खुश रहती है वो घर हमेशा धन और सुख शान्ति से भरा रहता है
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Answered on07/10/20
नारी जिसके बिना हर काम अधुरा है जिसके बिना घर सुना है जिसको वेद मे देवी बोला गया है
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Society & Culture Writer
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Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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Answered on07/09/20
नारी भारत मे पुजी जाती है यहा पर नारी के बिना आप का कोई पुजा पाठ सम्पन्न नही होता है
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Indian History Explorer
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Answered on07/08/20
भारत मे नारि का सम्मान प्राचीन काल से हि किया जाता है हमारे देश और धर्म मे महीलाओ का पुजा कीया जाता है हमारे धर्म मे बहुत से देवियो कि पुजा होती है
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Modern Day Philosopher
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