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Sumil Yadav· 8 साल पहले
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यदि आप शारीरिक शोषण का शिकार होते तो क्या आप दुनिया को इस बारे में बताते?

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जवाब दिया गया06/21/23

यदि आप शारीरिक शोषण का शिकार होते है तो आपको इस बारे मे दुनिया क़ो बताने की कोशिश करनी चाहिए ताकि 4 लोग आपका साथ देंगे और आपके साथ आकर खडे होंगे जिससे आपको इंसाफ मिलेगा। क्योंकि कई लड़कियां ऐसी होती है कि उनके साथ शारीरिक शोषण हो जाता है तो वह किसी से कुछ नहीं बताती है, लेकिन गलत है इस बारे मे लड़कियां अपनी सहेलीयों, बहन से बता सकती है।

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जवाब दिया गया06/20/23

यदि आप शारीरिक शोषण का शिकार हुये है तो आपको दुनिया क़ो इस बारे मे जरूर बताना चाहिए, क्योंकि कई बार लड़कियां शारीरिक शोषण हो जाने के कारण वह सोचती है कि दुनिया वालो के सामने कुछ बतएगी तो उनकी बेज़्ज़ती होंगी इसलिए वह किसी से कुछ नहीं बताती है, लेकिन ये गलत है लड़कियों क़ो इंसाफ चाहिए तो उनके साथ हुये
शारीरिक शोषण के प्रति आवाज़ उठानी चाहिए और सबको बताना चाहिए तभी उन्हें इंसाफ मिल पाएगा।

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जवाब दिया गया01/21/22

अक्सर जब भी किसी लड़की के साथ या फिर लड़के के साथ शारीरिक शोषण होता है तो उसे हमेशा खामोश कर दिया जाता है क्योंकि यदि वह अपने साथ हुए शोषण के बारे में किसी से बताती है तो उसकी इज्जत चली जाएगी और आगे चलकर उसकी शादी होने में बहुत दिक्कतें आएंगी ऐसे में उनके माता-पिता आवाज उठाने की बजाय उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर कर दिया जाता है।

आज मैं आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताना चाहती हूं किसके साथ शारीरिक शोषण होने पर उसे चुप करवा दिया गया था जी हां वह लड़की मेरी एक दोस्त थी एक दिन जब वह कोचिंग के लिए जा रही थी तो रास्ते में कुछ लड़के उसके साथ बहुत ही गलत किये और उसका रेप करने के बाद उसे जंगल में फेंक दिए लेकिन उसकी जान बच गई और जब वह घर पर गई तो अपने मम्मी पापा को इस बारे में बताया तो उसके मम्मी पापा ने उसे चुप करवा दिया और कहा कि इस बात को तुम किसी से मत कहना नहीं तो हमारी इज्जत चली जाएगी। इसलिए वह लड़की अपने माता-पिता की इज्जत के कारण अपने साथ हुए शोषण के बारे में किसी से नहीं बताया। लेकिन यह बात बिल्कुल गलत है।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया10/08/18

मै मेट्रो में अपने दोस्तों के साथ एक फंक्शन अटेंड करने जा रही थी | मेट्रो में शाम 6 बजे बहुत अधिक भीड़ होती है | मेरी दो सहेलियों ने पूरे कपड़े पहने थे "सभ्य कपड़े" और मैंने छोटे कपड़े | मेरे साथ मेरा एक दोस्त भी था | हम चारो मेट्रो में एक गोला बनाकर खड़े थे और हमारे सामने एक अंकल थे, जो उम्र में हमसे बहुत बड़े थे | मेट्रो में इतने झटके लग नहीं रहे जितना कि वो हमारे ऊपर गिरने की कोशिश कर रहे थे | वह हमे देखकर मुस्कुरा रहे थे | वह अच्छे परिवार के दिख रहे थे परन्तु जिस तरह कि हरकतें थी उनकी, वह कहीं से भी अच्छे संस्कारो के नहीं लग रहे थे | 15 मिनट तक यही हुआ, वो कभी मेरे पैरो को देख रहे थे तो कभी उनके बगल में खड़ी मेरी सहेली के ऊपर गिरने की कोशिश कर रहे थे |


करोल बाग़ में मेट्रो रुकी तो अचानक बहुत ज़्यादा भीड़ मेट्रो में चढ़ गयी | दूसरी तरफ से एक अंकल आये तो हमे धक्का देते हुए सीट ढूंढ़ने के लिए निकल गए | मेरे दोस्त ने उन अंकल से सिर्फ इतना कहा कि "अंकल लड़कियां खड़ी हैं साइड से निकलो" , इस कथन पर ही वो अंकल चिल्लाने लगे और हर तरफ चिल्लाहट होने लगी | सब मेरे दोस्त को ही कसूरवार ठहराने लगे कि तुम जैसे लड़के ही बुरे होते हो, लड़कियों के साथ घूमते हो और बेचारे बुजुर्गों पर आरोप लगाते हो | यह सुनकर वो पहले वाले अंकल अभी भी हंस रहे थे |
परेशानी हमेशा शारीरिक शोषण नहीं होती परन्तु लोगो का किसी लड़की को शोषित करने के प्रयास भी होते हैं | हमने कोशिश की थी कि हम बोले उन अंकल को कि साइड होके खड़े हो जाओ, परन्तु हम उनकी उम्र का लिहाज़ कर गए और बोल नहीं पाए | कोशिश करना कभी कभी बहुत मुश्किल होता है, खासकर तब जब सामने वाला व्यक्ति वो हो जिसकी हमे उम्मीद न हो | आवाज़ उठाने की कोशिश भी की पर लोगो ने शायद समझना नहीं चाहा और हम वहाँ बवाल भी नहीं करना चाहते थे |

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जवाब दिया गया09/22/23

यदि गलती से हरतालिका तीज का व्रत टूट जाये इन उपायों को अपनाये -

•यदि हरतालिका तीज का व्रत गलती से टूट जाये तों सबसे पहले आप भगवान से क्षमायाचना करें और भगवान जाने-अनजाने में भक्तों की गलतियां जरूर माफ कर देते हैं।

•हरतालिका तीज का व्रत बहुत ही कठिन होता है, ऐसे में किसी कारणवश परिस्थिति मे महिला व्रत रखने में असमर्थ हो जाती है या फिर महिला का व्रत टूट जाता है,तो उनके पति भी पत्नी के बदले हरतालिका तीज का व्रत रख सकते हैं।

•यदि महिलाए हरतालिका तीज पर व्रती गलती से कुछ खा या पी लेती है तो इससे व्रत दोष पति को लगता है और व्रत दोष दूर करने के लिए महिलाएं देवी-देवता की मूर्ति बना सकती है और इन्हें पंचामृत से स्नान करवाने क़े बाद मूर्ति पर अक्षत, फल,फूल चढ़ाये और देवी -देवताओ से माफ़ी मांगे और फिर पूरी विधि-विधान क़े साथ पूजा करें।Letsdiskuss

और पढ़े- प्रतिवर्ष भाद्रा शुक्ल की त्रतीया को मनाया जाने वाला हरितालिका तीज व्रत केसे मनाया जाता हैं?

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अपडेट किया गया10/08/18

शारीरिक शोषण, इन शब्दों का अर्थ ही मुझे तब समझ आया जब बहुत देर हो चुकी थी, और शायद हर हफ्ते मै इस "शारीरिक शोषण" से होते हुए गुज़री थी, उस उम्र में जब मुझे इन शब्दों का अर्थ नहीं मालूम था | कहना बहुत आसान होता है कि तुमने आवाज़ क्यों नहीं उठाई, मैंने कोशिश की थी पर मेरी आवाज़ दबा दी गयी थी | मै 13 साल की थी जब मेरी माँ गुज़र गयी थीं |


अब घर में सिर्फ भाई और पापा ही थे जिनका मुझे सहारा था, पर भाई छोटे थे और पापा अपने काम में व्यस्त रहते थे | वह मेरे परिवार के ही अंकल थे जिन्होंने मेरे नासमझ होने का फायदा उठाया | वह पापा के दूर के रिश्तेदार थे पर माँ के जाने के बाद उन्होंने पापा को संभाला भी और आर्थिक सहायत भी की | वह अक्सर घर आया करते थे और यही कारण है कि पापा को उनपर पूरा विश्वास था |


शायद उनके घर आने जाने को 5 महीने ही हुए थे जब उन्होंने मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की | मै डर चुकी थी पर मै कुछ कर नहीं पायी | मैंने पापा को इस बारे में बताने की कोशिश भी की, पर कोशिश कभी सफल नहीं हुई | मै अपने दोस्तों को भी नहीं बता पायी क्यूंकि वह मेरे बारे में पता नहीं क्या सोचते, और मै उन्हें खोना नहीं चाहती थी | भाई छोटे थे उन्हें इन सबका ज्ञान नहीं था, मुझे भी नहीं था पर मुझमे बोलने की हिम्मत भी नहीं थी |



वह अंकल हर हफ्ते आते थे और ऐसा अगले 15 महीनो तक चला | उसके बाद एक एक्सीडेंट में उन अंकल का देहांत हो गया | यह शायद पहली मृत्यु थी जिसकी मुझे ख़ुशी हुई थी | 


इस बारे में आजतक किसी को नहीं पता चला, और दुनिया तो बहुत दूर की बात है मै अपने पापा को भी इस बारे में कभी बता नहीं पायी |   

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जवाब दिया गया01/29/19

किसी भी मनुष्य का शारीरक शोषण होना उस व्यक्ति की गलती नहीं है | हाँ ये एक ऐसी पीड़ा है जो शोषित व्यक्ति को झेलनी पड़ती है | इसके बारें में बात करने या बताने में शर्म नहीं होना चाहिए , क्योकि जब आपका शोषण करने वाले को शर्म में आई तो इस बात को बताने वाले को कैसी शर्म |


अक्सर देखा गया है जिसके भी साथ ऐसा हुआ है ऐसे परिवार वाले लोग इस बात को दबा देते हैं | इसका कारण सिर्फ इतना है कि लोग बदनामी से डरते हैं | परन्तु दूसरी तरफ देखा जाए तो कुछ लोग इस बात को बहुत अधिक बढ़ावा देते हैं, सड़कों पर रैलियां निकाली जाती हैं, आंदोलन किये जाते हैं और कई बार तो इन बातों पर राजीनीति तक हो जाती है |

इस बात से पीड़ित महिला डरती है और ऐसी बातें नहीं बताती | लेकिन ये गलत है, क्योकि जो इंसान ग़लती करता है उसको उसकी सज़ा तो मिलना ही चाहिए और जहाँ बात रेप की आती है वो ग़लती नहीं एक गुनाह बन जाती है | जिसके लिए ऐसी सज़ा होनी चाहिए जिसको सोच कर ही लोग डरें |

रेप जैसे गुन्हाओं की सज़ा मिलना बहुत जरुरी है | अगर कोई इस पीड़ा से गुजर रहा है या गुजर चूका है तो उसे इस बात को अपने घर बताना चाहिए और घरवालों को भी अपने घर के उस सदस्य की बातों को समझना चाहिए न की उसको नकारना चाहिए | रेप जैसे गुनहगारों से ज्यादा बड़े गुनहगार ऐसे घरवाले होते हैं जो पीड़ित पर भरोसा नहीं करते उनका सपोर्ट नहीं करते | ऐसे घर वाले भी सज़ा के हक़दार होते हैं |

(Courtesy : The Feminist Wire )

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जवाब दिया गया10/11/18
कभी नहीं बताते , इसलिए नहीं की हम डरते हैं, बल्कि इसलिए क्योकि हमें बचपन से यही सिखाया गया है, कि " लड़कियां घर की इज़्ज़त होती हैं, उन्हें इस बात का ख्याल होना चाहिए की कैसे रहना हैं, क्या करना है और क्या नहीं " पर कोई ये क्यों नहीं सोचता कि लड़कियों का भी दिल होता है, उनकी भी ख़ुशी होती है, उन्हें भी जीने का अधिकार है |

किसी लड़की के साथ ग़लत हुआ है, तो लोग उससे ही सवाल क्यों करते हैं ? लड़कियाँ ही कटघरे में दोषी बनकर क्यों खड़ी रहती हैं ? क्यों उनको न्याय के नाम पर भीख दी जाती हैं ? क्यों ?

अगर ये सवाल किये जाएं तो शायद किसी के पास कोई जवाब नहीं होगा | इसलिए कोई भी लड़की अपने साथ हुआ हादसा किसी को नहीं बताना चाहती, क्योंकि लोग उसको समझेंगे नहीं बल्कि समझाएंगे कि अगर उसने आवाज उठाई तो उसके घर का नाम बदनाम होगा |
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अपडेट किया गया10/09/18

ये दुनिया क्या सोचेगी, घर वालों को कैसे बताऊँ, क्या बताना सही रहेगा, लोग किस नज़र से देखेंगे मुझे, बस यही सोच के मैंने कभी ये बात किसी से शेयर नहीं की | पर आज इस सवाल के जवाबों को देख कर कर मुझ मैं थोड़ी सी हिम्मत आई है, कि मैं भी अपने साथ हुई एक घटना के बारें में बताऊँ | 

हर रोज की तरह मैं मेट्रो से ऑफिस जा रही थी | ये तब की बात है, जब odd और even के कारण मेट्रो में यात्रियों की संख्या बढ़ गई थी | वैसे तो मैं हर रोज मेट्रो के सबसे पहले वाले कोच जो कि महिलाओं के लिए रिज़र्व रहता है, उसमें जाती थी, पर उस दिन शायद जल्दी थी जो मैं किसी दूसरे ट्रैन के डब्बे में चढ़ गई |

भीड़ बहुत थी तो समझ नहीं आ रहा था किस तरफ जाऊँ | फिर एक कोना तलाश किया और दरवाजे के पास खड़ी हो गई | तभी एक बहुत बुजुर्ग से अंकल जी आए और मेरे बगल में खड़े हो गए | भीड़ इतनी थी कि कुछ समझ नहीं आ रहा था | उस पर बार-बार वो अंकल मेरे करीब आने की कोशिश कर रहे थे | एक पल तो ऐसा आया जब हद ही हो गई | ट्रैन एक स्टेशन पर रुकी और उन्होंने मेरी कमर पर हाथ रखा और मुझे पकड़ लिया | भीड़ इतनी थी की कुछ समझ नहीं आ रहा था |

उस वक़्त एक लड़का ये सब देख रहा था | शायद उसको मेरी परेशानी महसूस हुई | वो इतनी भीड़ को धक्का देता हुआ मेरे पास आया और उन अंकल और मेरे बीच खड़ा हुआ और उन अंकल की तरफ से उसने अपने हाथ से मुझे कवर किया और बड़े ही अच्छे से कहा " अब आप आराम से खड़े हो जाओ, मैं हूँ यहां " उसकी बात मानो ऐसी थी उस वक़्त जैसे भगवान कृष्णा मेरे भाई बनकर आये हो | फिर उसने कहा आप कल से इस कोच में नहीं आएंगी | सबसे पहला कोच महिलाओं का होता है, उसमें जाएंगी | मैंने कहा ठीक है |

मेरा स्टेशन आया और मैं उतर गई | पर उस दिन से आज तक मुझे उस लड़के की बात याद है | उसने मुझसे कहा नहीं कि आप महिला कोच में आना अब से बल्कि उसने मुझे एक आदेश दिया और उसका आदेश मैं आज भी मानती हूँ |

मगर ऐसा क्यों ? बस ये सवाल मेरे मन में हमेशा रहा कि लड़कियों को लोग क्या समझते हैं | 

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जवाब दिया गया11/30/20
1.नरसंहार घाट एक महान दर्शनीय स्थल और कानपुर में एक परिवार हैंगआउट क्षेत्र है। जाजमऊ के पास गंगा के तट पर स्थित, यह घाट कानपुर के उत्तरी भाग को कवर करता है। आधिकारिक रूप से नाना राव घाट के रूप में नामित, इस जगह को सती चौरा घाट के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह बहुत ही स्थल था जहां महिलाएं सती के भयानक अनुष्ठान करती थीं।
2. भारत के सबसे पुराने और सुंदर चर्चों में से एक, कानपुर मेमोरियल चर्च अल्बर्ट लेन पर स्थित है। ऑल सोल्स कैथेड्रल चर्च के रूप में भी जाना जाता है, यह अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए लोकप्रिय है। 1857 में स्थापित, चर्च सिपाही विद्रोह के खो ब्रिटिश सैनिकों का एक संस्मरण है।
3. कानपुर संग्राहलय के रूप में भी जाना जाता है, कानपुर का यह आधिकारिक संग्रहालय पूल बाग मैदान में स्थित है। कानपुर संग्रहालय औपनिवेशिक काल से आधुनिक कानपुर तक कलाकृतियों और दस्तावेजों को प्रदर्शित करता है। पूर्व में किंग एडवर्ड सप्तम की स्मृति में किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉल के रूप में शुरू किया गया था, इसे 1999 में गांधी भवन के रूप में नाम दिया गया था। इसमें एक इन-हाउस पब्लिक लाइब्रेरी भी है।



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जवाब दिया गया10/09/18
जब भी सोचती हूँ उस हादसे के बारे में, तो कुछ धुंधला सा याद आता है,
सांसे थम सी जाती है, और आँखों में पानी सा नज़र आता है.....

ऐसा ही एक हादसा हुआ जब मैं पाँचवी क्लास में थी | मेरे घर में मेरे भाई के एक दोस्त आया करते थे | उन्हें मैं भाई कहती थी | जब भी वो आते थे, उनका आना मुझे अच्छा लगता हैं, बड़ा ही मजाक का माहौल बना कर रखते थे वो मेरे घर में |
वो मेरे घर मेरे बचपन से आया करते थे | कभी ऐसा कुछ नहीं लगा कि ये इंसान ग़लत हो सकता है | 1998 का वो एक भयानक दिन था | मेरे भाई के दोस्त घर आये और उस दिन घर पर कोई नहीं था | मैं हमेशा की तरह उनसे वैसे ही बात करने लगी | उन्होंने पूछा कि सब लोग कहाँ हैं, मैंने कहा माँ-पापा किसी रिश्तेदार के घर गए हैं, और भाई कॉलेज गया है, पर आप क्यों नहीं गए भैया ?

फिर न जाने कुछ हुआ, ये बात न किसी से कह सकती थी, न छुपा सकती थी | जितना डर था मन में उससे कही ज्यादा दर्द था | आत्मा तार-तार हो गई | कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ, बस दर्द और असहनीय दर्द और कुछ नहीं | जब आँख खुली तो पता चला की मैं 5 दिन से बेहोश थी |

जब होश आया तो सब ऐसे देख रहे थे मुझे जैसे मैंने कोई ग़लती की हो | सबकी नज़रों में मेरे लिए सिर्फ हमदर्दी दिखाई दे रही थी और कुछ गुस्सा भी |

फिर मैं जब घर आई तो अक्सर माँ-पापा को बात करते सुनती थी, कि रिश्तेदारों तक ये बात पहुंची तो क्या होगा ? इसकी शादी करना मुश्किल हो जाएगा | मैं सहमी सी रहती थी, आँखों में आंसू भरे हुए बस सोचती रहती थी , कि आखिर ऐसा हुआ क्या है ? आखरी मैंने किया क्या है?

वो हादसा आज भी मेरी ज़िंदगी में एक नासूर बना हुआ है | जब भी किसी को देखती हूँ तो मन में एक डर बैठ जाता है, कि कहीं फिर ऐसा कोई दर्द तो नहीं मिलेगा | जिस दर्द के असर से आज तक गुज़र रही हूँ | इतना बड़ा हादसा मेरे साथ हुआ, पर मैं कुछ न कर सकी क्योंकि सबका एक ही सवाल था मेरे लिए " सबको पता चलेगा तो बदनामी होगी इससे कौन शादी करेगा " बस फिर कुछ नहीं, जी रही हूँ, यही सोच कर की जो हुआ वो क्यों हुआ ?

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जवाब दिया गया10/08/18

मै छठी कक्षा में था | हाँ "था" ! बच्चा चाहे लड़की हो या लड़का, शारीरिक शोषण का शिकार दोनों ही होते हैं | मेरे टूशन वाले सर पर मेरे माता पिता को बहुत भरोसा था, शायद मुझसे भी ज़्यादा | मुझे आज भी वह तारीख अच्छी तरह याद है, 12 नवम्बर, 2009 | मै रोज की तरह टूशन गया था परन्तु वहाँ मेरे आलावा सिर्फ दो बच्चे थे, वो भी आधे घंटे बाद चले गए |


मुझे सर ने कहा कि मैंने अबतक बहुत छुट्टियां की हैं, इसलिए मुझे एक्स्ट्रा क्लास के लिए रुकना होगा | वो मुझसे बहुत प्यार से बात कर रहे थे, जोकि वह अक्सर नहीं करते थे | वह मुझे यहाँ वहाँ छूने लगे, मै घबरा गया था | उन्होंने मुझसे हस्तमैथुन कराया | मै कुछ बोल नहीं पाया पर मै बोलना चाहता था | उन्होंने मुझे घर भेजते हुए कहा कि "किसी को बताया तो वो तुझपे ही हसेगा |" मै उस वाक्य को याद नहीं करना चाहता क्यूंकि मुझे पता था कि यह मेरे लिए बहुत शर्म की बात है |


यही कारण है कि मै इस बारे में किसी से खुलके बात नही कर पाया | मैंने अपने पापा को यह बताने की कोशिश की पर उन्होंने मेरी बार सुनते ही कहा कि मै पढ़ाई से बचने का ड्रामा कर रहा हूँ, उन्होंने एक हफ्ते के लिए मेरा यहाँ वहाँ जाना बंद कर दिया, मुझे मेरे दोस्तों से मिलने नहीं दिया क्यूंकि उन्हें लगता था कि मेरे दोस्तों के बहकावे मै आकर मैंने यह नाटक किया है | मम्मी ने भी कुछ दिन मुझसे ठीक से बात नहीं की | मैंने उस टूशन में जाना तो छोड़ दिया पर उन सर का कुछ बिगड़ा नहीं, क्योनी मेरे माता पिता के लिए तो वह एक सज्जन व्यक्ति थे |

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