दोस्तो आप सभी ने दरियाई घोड़े का नाम तो सुना होगा। यह देखने मे गेंडे जैसा दिखता है । यह अपना अधिकतर समय पानी के बीच मे रहकर निकालता है। दिन में यह छुप कर बैठा रहता है और रात के समय यह अपने भोजन की तलाश मे निकलता है।
दरियाई घोड़े माँसाहारी होते नही है । इनका प्राथमिक भोजन हरि घास और शाकाहारी भोजन ही होता है। यह रात के समय 80 पाउड तक घास का सेवन कर लेते है।
यह हमेशा झुंड मे ही रहता है और अपने पसंदीदा स्थान पर हमेशा चिन्ह बना कर रखता है यह चिन्ह वह अपने मूत्र या मल से बनाता है ताकि वह इस स्थान को फिर से खोज सके।
आवश्यकता से अधिक भोजन मिलने पर यह भोजन को अपने पेट मे एक साइड मे जमा कर लेते है और भोजन ना मिलने पर इसमे से भोजन की पूर्ति करते है।
यह पानी मे जाकर काफी लंबे समय तक अपनी सांस को रोक सकता हैं। इसकी आँखो को बचाने के लिए एक झिल्ली होती हैं जो पानी मे जाकर आँखो को कवर कर लेती है जिससे आँखो को कोई नुकसान नही होता है।
जब यह पानी मे जाता हैं तो पानी में कोई हलचल ना हो इसक लिए यह अपने कान और नाक बंद कर लेता है। इन्हे नदी का घोड़ा भी कहा जाता है।
इनके बच्चे भी पानी मे ही होते है और 7 साल मे ही वह अकेला घूमने के लिए तैयार हो जाता है।
यह 45 वर्ष तक जीवित रहता है। इसका मूल प्रवास अफ्रिका मे माना जाता है। यह बहुत ही खुँखार जानवर माना जाता है। यह अपने बचाव मे मनुष्य को भी मार देता है। एक शोध के अनुसार हर साल 500 से अधिक मनुष्य इसके घातक हमलो से घायल होकर मर जाते हैं।
भोजन के बिना यह 3 सप्ताह तक भूखा रह सकता हैं।



