मध्य प्रदेश में सबसे कम आबादी वाले शहरों की सूची समय-समय पर जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बदल सकती है। सामान्यतः मंडीदीप, बिजावर, ओरछा जैसे छोटे नगरों की तुलना में कुछ नगरों की आबादी काफी कम होती है, लेकिन यदि आधिकारिक जनगणना के अनुसार देखा जाए तो सबसे कम आबादी वाले नगरों में धामोनी (जिला सागर) का नाम अक्सर शामिल किया जाता है।
हालांकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि "शहर" और "नगर" की प्रशासनिक परिभाषा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए सबसे कम आबादी वाला शहर किसे माना जाए, यह जनगणना के वर्गीकरण पर निर्भर करता है।
मध्य प्रदेश की जनसंख्या
मध्य प्रदेश भारत का क्षेत्रफल के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यहां बड़े महानगरों से लेकर छोटे कस्बों और नगरों तक विभिन्न प्रकार की बस्तियां मौजूद हैं।
राज्य के प्रमुख बड़े शहर हैं:
- भोपाल
- इंदौर
- ग्वालियर
- जबलपुर
- उज्जैन
वहीं दूसरी ओर कई छोटे नगर ऐसे भी हैं जहां आबादी कुछ हजार लोगों तक ही सीमित है।
आबादी कम होने के कारण
किसी शहर या नगर की आबादी कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- सीमित रोजगार के अवसर
- औद्योगिक विकास का अभाव
- ग्रामीण क्षेत्र का प्रभाव
- बड़े शहरों की ओर पलायन
- भौगोलिक स्थिति
जनगणना का महत्व
किसी भी शहर की वास्तविक आबादी जानने के लिए भारत की आधिकारिक जनगणना सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है। नई जनगणना के आंकड़े आने पर सबसे कम आबादी वाले शहरों की स्थिति में बदलाव हो सकता है।
मध्य प्रदेश में सबसे कम आबादी वाले नगरों में धामोनी का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है, हालांकि यह जानकारी जनगणना और प्रशासनिक वर्गीकरण के अनुसार बदल सकती है। राज्य में कई छोटे नगर और कस्बे हैं जिनकी आबादी बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है, और यही विविधता मध्य प्रदेश को जनसंख्या के दृष्टिकोण से विशेष बनाती है।
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