"धोखा कौन देता है—लड़का या लड़की?" यह एक ऐसा सवाल है जिसका कोई एक निश्चित, वैज्ञानिक या सीधा जवाब नहीं हो सकता। प्यार, दोस्ती या किसी भी रिश्ते में वफादारी या धोखा देना किसी व्यक्ति के जैंडर (Gender/लिंग) पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह उस व्यक्ति की मानसिकता, परवरिश, चरित्र और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
मनोवैज्ञानिकों (Psychologists) और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के अनुसार, धोखे की प्रवृत्ति को समझने के लिए हमें इन मुख्य बिंदुओं पर गौर करना चाहिए:
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चरित्र व्यक्तिगत होता है, सामूहिक नहीं: कोई भी लड़का या लड़की जन्म से धोखेबाज़ नहीं होते। अगर किसी एक लड़के या लड़की ने किसी रिश्ते में धोखा दिया है, तो उसके आधार पर दुनिया के सभी लड़कों या लड़कियों को गलत नहीं ठहराया जा सकता। हर इंसान स्वभाव से अलग होता है।
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धोखे के पीछे के कारण अलग हो सकते हैं: शोध बताते हैं कि लड़के और लड़कियाँ दोनों ही रिश्तों में धोखा दे सकते हैं, लेकिन उनके ऐसा करने के पीछे के कारण अक्सर अलग होते हैं। पुरुष (लड़के) कई बार शारीरिक आकर्षण या तात्कालिक उत्तेजना के कारण भटक जाते हैं, जबकि महिलाएं (लड़कियाँ) आमतौर पर तब कदम पीछे खींचती हैं जब उन्हें रिश्ते में मानसिक जुड़ाव, सम्मान या भावनात्मक सुरक्षा (Emotional Support) मिलना बंद हो जाती है।
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सोशल मीडिया और आधुनिक लाइफस्टाइल: आज के डिजिटल दौर में किसी भी रिश्ते में धैर्य की कमी हो गई है। ऐप्स और सोशल मीडिया के कारण विकल्प बढ़ गए हैं, जिससे लड़के और लड़कियों दोनों में ही कमिटमेंट (Commitment) की कमी देखी जा रही है।
निष्कर्ष: यह सोचना पूरी तरह गलत है कि सिर्फ लड़के ही वफादार होते हैं या सिर्फ लड़कियाँ ही। दुनिया में ऐसे लाखों लड़के भी हैं जिन्होंने अपने प्यार के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया, और ऐसी लाखों लड़कियाँ भी हैं जो पूरी वफादारी से रिश्ता निभाती हैं। धोखा एक व्यक्तिगत कमजोरी है, इसे किसी जेंडर के साथ जोड़ना नाइंसाफी होगी।
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