हिंदू धर्म मे पूजा, पाठ , व्रत, त्योहार सभी का महत्व है। हर एक पर्व को हिंदू धर्म के लोग पूरी विधि विधान के साथ मनाते है। खास तौर पर महिलाएं हर व्रत को करती हैं और पूजन आदि करती हैं।
सोमवार का व्रत महिलाओ के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इसे कुँवारी कन्याएं, महिलाएं करती हैं।
लेकिन यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनो कर सकते है इसमे किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नही है।
सोमवार का व्रत देवारी देव महादेव को समर्पित है। भगवान भोलेनाथ जी को प्रसन्न करके स्त्री और पुरुष अपना मनचाहा जीवन साथी की कामना करते है।
और विवाहित स्त्री और पुरुष अपने जीवन साथी की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना करते है ।
सोमवार का व्रत 16 सोमवार तक किया जाता हैं।
जो भी स्त्री या पुरुष सोमवार का व्रत का संकल्प लेता है वह 16 सोमवार पूरी श्रध्दा भक्ति के साथ सुबह को उठ कर स्नान करके नित्य कर्मो को करने के बाद भगवान भोलेनाथ का पूजन करता है और शिवालय मे जाकर भगवान शिव को नमन करके वहा भी उनका पूजन करके व्रत का आरंभ करता है। पुरा दिन भक्ति भाव के साथ वृति रहता है और शाम के समय पूजन करके व्रत का पारण करता है।
व्रत वाले दिन स्त्री और पुरुष दोनो को कुछ बातो का ध्यान अवश्य रखना चाहिए -
- व्रत वाले दिन मन मे किसी भी तरह के बुरे विचारो को नही आने देना चाहिए।
- किसी की भी बुराई नही करना चाहिए।
- गरीब बेसहारा लोगो को दूतकारना नही चाहिये।
- व्रत की कथा और पूजन विधि विधान के साथ करना चाहिए।
- किसी दूसरी स्त्री या पुरुष के बारे मे गलत विचार मन मे नही लाना चाहिये।
- अपने माता पिता के चरण स्पर्श अवश्य करना चाहिये क्योकि भगवान माता पिता के रूप मे हमेशा हमारे साथ रहते है।
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