1) प्रोग्राम और डाटा फाइल्स के बीच अंतर निर्भर रहता है! 2)डाटा में अनुरूपता का भाव रहता है!डाटा के कॉनकरंट एक्सेस के प्रबंधन कीअयोग्यता 3) चाक-चौबंद डाटा सुरक्षा प्रणाली का अभाव 4) समान डाटा का प्रयोग करने वाली एप्लीकेशन्स के बीच समन्वय का अभाव होता है! 5) असमान बैकअप और रिकवरी विधियां होती है! 6) आई स्थाई डाटा मैनजमेंट तकनीकी का प्रयोग किया जाता है ! 7) एनकोड किए डाटा एप्लीकेशन में हाई-कोड किया हुआ डाटा में लचीलेपन का अभाव होता है !
Database की कुछ सीमाएं निम्नलिखित है :-
1. डाटाबेस के सभी यूजर डाटाबेस पर उपलब्ध सभी जानकारी को एक्सेस करने का अधिकार नहीं रखते है।
2. DBMS मे डाटा रिड़न्डेन्सी की समस्या आ सकती है, अर्थात् डाटाबेस के कोई भी दो डाटा आइटम्स ऐसे भी हो सकते है, जो रियल वर्ल्ड के एक ही तथ्य को दर्शाते हो, ऐसा नहीं होना चाहिए।
3. समान डाटा का उपयोग करने वाला एप्लीकेशन के बीच समन्वय का अभाव पाया जाता है।
4. डेटाबेस को विकसित करना व डिजाइन करने में अधिक समय लगता है।
5. डाटा का बैकअप रखना व डेटाबेस की रिकवरी एक जटिल कार्य है।

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आइए आज हम आपको डेटाबेस की कुछ सीमाओं के बारे में बताते हैं।
डेटाबेस को डिजाइन करने में अधिक समय लगता है
दूसरा यह कि कंप्यूटर में मौजूद सिस्टम से डेटाबेस मैं डाटा को दूसरे सिस्टम में ट्रांसफर करने में बहुत कठिनाई आती है जिसमें समय भी अधिक लग जाता है।
डेटाबेस सिस्टम को इंप्लीमेंट करवाने में अधिक लागत लग सकती है यानि की ज्यादा पैसे खर्च हो सकते हैं।
डेटाबेस में असमान और बैकअप रिकवरी विधियां होती है।
डेटाबेस में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का कोस्ट अधिक हो सकता है।
कई बार डेटाबेस अधिक कॉन्प्लेक्स सिस्टम हो जाता है।





