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Updated on Mar 24, 2026others

क्या दवाई लेने से रोजा टूट जाता है?

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Updated on Mar 23, 2026

जैसा कि आप जानते हैं कि मुस्लिम धर्म के लोगों का रोजा सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। मैं आपको बता दूं कि रोज का त्योहार पूरा एक महीने तक चलता है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या दवाई लेने से रोजा टूट जाता है। तो चलिए मैं आपकी दुविधा को दूर करती हूं।

यहां पर मैं आपको बताने वाली हूं कि क्या दवाई लेने से रोजा टूट जाता है:-

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि रमजान के महीने में आंख में सुरमा या दवा डालने से क्या रोजा टूट जाता है तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि यदि आप रमजान के महीने में अपनी आंखों में सुरमा या दवा डालते हैं तो रोज नहीं टूटा।

 आईये अब हम आपको बताते हैं कि क्या-क्या करने से रोजा टूट जाता है:-

यदि स्नान के वक्त किसी व्यक्ति के मुंह में पानी चला जाता है तो इससे रोजा टूट जाता है। इसके अलावा रोजा के दौरान सूर्योदय के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए, क्योंकि सुबह सूरज निकलने से लेकर सूर्य डूबने तक रोजा रखा जाता है। इसके अलावा मैं आपको बता दूं कि रोज के समय मन में किसी इंसान के प्रति गलत नहीं सोचना चाहिए, और अपने से बड़े बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए।

रोजा रखने के नियम क्या है मैं आपको बताऊंगी:-

रोज़ा रखने वाले व्यक्ति को सुबह लगभग 3:00 बजे उठना चाहिए और फज्र की नमाज़ के समय से पहले खाना-पीना बंद कर देना चाहिए। पूरे दिन रोज़ेदार के लिए किसी भी प्रकार का खाना-पीना प्रतिबंधित होता है। मगरिब की नमाज़ अदा करने के बाद सूर्यास्त होने पर रोज़ा इफ्तार किया जाता है।

Letsdiskuss

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Answered on Mar 23, 2026

रोज़ा (उपवास) के दौरान क्या चीज़ रोज़ा तोड़ती है, यह इस्लामी नियमों पर आधारित होता है।

अगर कोई व्यक्ति मुंह से दवाई खाता या पीता है, तो आम तौर पर रोज़ा टूट जाता है, क्योंकि इसमें कुछ शरीर के अंदर जाता है।

लेकिन कुछ स्थितियों में छूट भी होती है:

अगर कोई व्यक्ति बीमार है और दवाई लेना जरूरी है, तो उसे रोज़ा न रखने या बाद में क़ज़ा करने की अनुमति होती है।

इंजेक्शन या बाहरी दवा (जैसे क्रीम) के बारे में अलग-अलग विद्वानों की राय हो सकती है, लेकिन आम तौर पर गैर-पोषक इंजेक्शन से रोज़ा नहीं टूटता माना जाता है।

इस्लाम में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए बीमार व्यक्ति के लिए रियायत दी गई है। रोज़े से जुड़े नियमों में नीयत (इच्छा) और स्वास्थ्य दोनों का ध्यान रखा जाता है।

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