औरंगजेब के माता का नाम मुमताज था और पिता का नाम शाहजहां था। जिन्होंने अपने प्रेम के लिए ताजमहल बनवाया था। औरंगजेब वह व्यक्ति थे जिन्होंने 50 वर्ष तक अपने शासन मे राज्य किया। औरंगजेब की 3 मार्च सन 1707 ई. दक्षिण के अहमदनगर में उनकी मृत्यु हो गई। औरंगजेब की मृत्यु के बाद उन्हें दौलताबाद में स्थित एक फ़कीर बुरुहानुद्दीन की क़ब्र के अहाते में उन्हें दफ़ना दिया गया। 
औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई?
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दोस्तों आपने औरंगजेब का नाम सुना ही होगा पर क्या आप जानते हैं कि औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई यदि नहीं जानते तो चलिए हम आपको इस पोस्ट में बताते हैं औरंगजेब एक क्रूर और निर्दई राजा था उसका सपना पूरे भारत में राज्य करना चाहता था
छत्रपति शिवाजी की मृत्यु हो चुकी थी औरंगजेब को कई बार मारने की योजना बनाई गई पर वह किस्मत का धनी था और हर बार बच जाता था। लेकिन छत्रसाल ने इसमें विजय पाई इन्होंने औरंगजेब को एक चीरा मारा था जिससे वह खाट पर लेट गया और वह तड़प तड़प के 3 मार्च 1707 में औरंगजेब की मृत्यु हो गई।

औरंगजेब इतिहास का सबसे क्रूर राजा था इस बात से तो आप सभी वाकिफ हैं औरंगजेब ने इतने अधिक अत्याचार किए थे कि उसे धीरे-धीरे मौत देना उसके लिए सही होगा। चलिए जानते हैं औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई थी। औरंगजेब शाहजहां का पुत्र था और उनकी माता का नाम मुमताज था। औरंगजेब को मारने के लिए लोग तरह तरह के प्रयास करते थे लेकिन औरंगजेब किस्मत का धनी था जिस वजह से वह बार-बार बजे जाता था लेकिन अंत में छत्रसाल के द्वारा औरंगजेब की मृत्यु हुई उन्होंने औरंगजेब के एक चीरा लगाकर उसकी हत्या की थी।
आमतौर पर औरंगजेब या अरमगीर यह प्रचार द्वारा दिया हुआ सा ही नाम था जिसका अर्थ होता है विश्व विजेता के नाम से जाना जाता था शाहजहां औरंगजेब को सब ताजमहल के निर्माता के रूप में जाने जाते थे जिसने अपनी बेगम की मृत्यु के उपरांत मुमताज बेगम उसकी याद में उसके लिए विश्व की खूबसूरत इमारत ताजमहल बनाने का यत्न किया था। उसका शासन 1658 से लेकर 1707 में उनकी मृत्यु तक चला औरंगजेब एक भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी से भी अधिक समय तक राज्य किया था.।
राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:
1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।
2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।
3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।
4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।
5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।
हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

औरंगजेब का जन्म 3 नवंबर 1618 में दोहद नामक स्थान पर हुआ था। यह छठवां मुगल सम्राट था। इसके पिता शाहजहां और माँ मुमताज महल थी। इनका धर्म सुन्नी इस्लाम था। औरंगजेब का वास्तविक नाम मुहिउद्दीन मोहम्मद था। औरंगजेब अकबर के बाद सबसे ज्यादा शासन करने वाला मुगल सम्राट था। सन 1663 में इसने सती प्रथा पर रोक लगाई। और सन 1699 में हिंदू मंदिरों को तुड़वाया। जिसमें बनारस का विश्वनाथ मंदिर व मथुरा का केशव मंदिर भी शामिल था। 3 मार्च सन 1707 को 88 वर्ष की आयु में इसका निधन हो गया।



