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| Updated on January 31, 2024 | others

₹1 वाले माचिस के बॉक्स में कितनी माचिस की तीलियों होती है?

1 Answers
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@komalsolanki9433 | Posted on January 30, 2024

दोस्तो, माचिस से हर कोई वाकिफ है। हर घर में माचिस का उपयोग किया जाता है किसी ना किसी रूप मे। चाहे वह पूजा स्थल हो या किचन ।

माचिस की आज के समय मे कितनी उपयोगिता है यह कोई नही समझ सकता। लाइटर होने के बाबजूद माचिस की मांग में कोई गिरावट नही आई।

माचिस का आविष्कार 31 दिसम्बर 1827 मे जॉन वॉकर नि किया था। यह ब्रिटेन के वैज्ञानिक थे। उन्होंने देखा की पत्थर को रगड़ने से आग निकलती है इस आग को उन्होंने एक लकड़ी पर एंटीमनी सल्फाइड , पोटाशियम क्लोरेट और स्टार्च का इस्तेमाल कर एक तीली बनाई। जिसे किसी खुरदुरी जगह पर रगड़ने से आग जलने लगी। लेकिन यह बहुत खतरनाक साबित हुई। क्योकि जैसे ही इसको रगड़ा जाता आग की जगह एक विस्फोट होता था और बदबु आने लगती थी। 1855 में स्वीडन ट्यूबकर ने दूसरे केमिकल का उपयोग कर के नई माचिस बनाई जिसे आज भी उपयोग किया जाता है।

माचिस के एक बॉक्स मे 50 तिलियां होती है।

भारत मे सबसे बड़ा माचिस का उद्योग तमिलनाडु में है। इसक अलावा तमिलनाडु के शिवकाशी, विरुधुनगर, गुड़ियाथम और तिरुनेलवेली मे भी मेनिफच्यूरिंग किया जाता हैं। कई कारखानों मे हाथो से यह काम किया जाता हैं और कई जगह इसे मशीनों के द्वारा किया जाता हैं।

भारत में माचिस निर्माण की शुरुआत 1895 मे हुई। पहले अहमदाबाद और फिर कोलकता में इसका कार्य शुरू हुआ। भारत में माचिस की कीमत पहले 5 पैसे थी फिर 1994 मे 50 पैसे जो 2007 मे बढ़कर 1 रुपये की गई थी। अधिक मांग को देखते हुए 14 साल बाद माचिस के दाम को बढ़ाकर 2 रुपये की गई।

माचिस के कारोबार में कोई फर्क नही आया है पहले भी इसकी मांग अधिक थी और आज भी इसकी मांग वैसी ही है।

भारत में कई कंपनियां है जो माचिस बनाने का कारोबार करती है।

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