कई बार लोग गलत चीज़ को पहचान तो लेते हैं, लेकिन उसे रोकने की हिम्मत या जिम्मेदारी महसूस नहीं कर पाते। डर, समाज का दबाव, अपने नुकसान का भय या “मुझे क्या” वाली सोच लोगों को पीछे रोक देती है। कुछ लोग विवाद से बचना चाहते हैं, इसलिए सिर्फ बोलकर अलग हो जाते हैं। वहीं कई बार इंसान को लगता है कि अकेले उसके बोलने या रोकने से कुछ बदलने वाला नहीं है। लेकिन सच यह भी है कि हर कोई ऐसा नहीं होता, कुछ लोग गलत के खिलाफ खड़े भी होते हैं। गलत को रोकना सिर्फ समझ की नहीं, बल्कि साहस, जिम्मेदारी और action लेने की बात भी होती है।
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