मैं जानना चाहती हूँ के इंसान गलत को गलत सिर्फ कहता है वो उस गलती को रोकता क्यों नहीं ? - letsdiskuss
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Rinki Singh

Chef at Hotel Radisson | पोस्ट किया |


मैं जानना चाहती हूँ के इंसान गलत को गलत सिर्फ कहता है वो उस गलती को रोकता क्यों नहीं ?


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Content Writer | पोस्ट किया


ये मानव स्वाभाव होता है | जो गलत को गलत देखता जरूर है पर उसको उस गलत को रोकने की ताकत नहीं होती | जब कोई बाहरी इंसान कोई गलती करता है तो हम सोचते है हमे क्या क्योकि न वो हमारा कोई लगता है और न हमे उससे कोई लेना देना है | बस यही सोच के हम आगे निकल जाते है | और ये गलती एक और गलती को जन्म देती है जो आगे चल कर गुनाह के रूप मे सामने आती है | 

जब कोई गलती हमारा अपना करता है तो हम इसलिए नहीं कह पाते क्योकि वो हमारा अपना होता है | हमे डर होता है के कही उसको बुरा न लग जाए या उसको हमारे ऐसा कहने से कोई परेशानी न हो जाए | हम भावुक हो जाते है क्योकि वो हमारा अपना होता है | और इस तरह हम उसकी हर गलती को भूल जाते है या भूलने की कोशिश करते है | और यही हमारी सबसे बड़ी गलती होती है |अगर आपको लगता है कोई गलत है तो उसको तभी रोक देना चाहिए जब वो गलती कर रहा हो | तब नहीं जब वो गुनाह करने पर उतर आए |

मानव स्वाभाव ही ऐसा होता है | हर जगह बस यही कहता है हमे क्या ,या फिर छोड़ो क्यों बेवजह बहस करना ,क्यों किसी और के लड़ाई मे बीच मे आओ,हमारा क्या हमे क्या करना बस यही शब्द होते है जो सामने वाले इंसान को गलती से बड़ा गुनाह करने पर मजबूर करते है | हम जब तक गलती करने वालो को ये बताएंगे नहीं के वो गलत कर रहे है तो उन्हें रोकेंगे कैसे | पहली गलती हम खुद करते है जो गलत होने देते है | दूसरी गलती हम ये करते है के हम भावुक हो जाते है अपने अपनों को देख कर जिसके कारण वो गलती पर गलती करता है और हम सिवा देखने के कुछ नहीं कर सकते |

Letsdiskuss


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Fitness trainer,Fitness Academy | पोस्ट किया


बहुत ही सुन्दर सवाल है आपका, हम इंसान की गलती देखते है ,पर कई बार तो हम उसको कहते ही नहीं कि वो गलत है ,जानते है क्यों ? क्योकि हम उसकी तरह गलत नहीं बन सकते | सबसे बड़ी बात अगर गलती करने वाला कोई अपना ही है,   तब तो हम कुछ कह ही नहीं सकते | क्योकि हमारे उस गलती करने वाले अपने से और लोग भी जुड़े होते है ,और हमारा उसको गलत कहना कही हमारे अपनों को बुरा न लग जाए बस यही सोच हमे रोक लेती है |

जब हम किसी को गलत कह ही नहीं सकते तो रोक तो सकते ही नहीं | ये बात हुए हमारे अपनों कि जिनको हम न तो कुछ कह सकते है और न रोक सकते है | अब बात करते है बाहर वालो की ,हम उनकी गलती न कहते न रोकते है ,क्योकि वो हमारे अपने नहीं है ,तो मानव स्वभाव है कि "ये हमारा कौन लगता है ,हमे क्या लेना देना " बस यही कारण है कि हम गलत को न तो गलत कह सकते है, और न ही रोक सकते है |


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